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क्या है नेटफ्लिक्स जो टीवी को ठीक वैसे ही लील जाएगा, जैसे टीवी रेडियो को खा गया!


हम आज तक किसी फ़िल्म या नाटक को या तो अपने टीवी में देखते थे या पिक्चर हॉल में या फिर सीडी, डीवीडी में.

लेकिन अब इनके अलावा एक और तरीके से हम फ़िल्म, सीरियल वगैरह देख सकते हैं. वो तरीका दिया है इंटरनेट ने. तरीके का नाम है ‘वीडियो स्ट्रीमिंग‘.


यू-ट्यूब, नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार और अमेज़न प्राइम तक इसी वीडियो स्ट्रीमिंग के चलते टेलीविज़न और सिनेमा हॉल से अलग हैं.

इस वीडियो स्ट्रीमिंग के लिए तीन चीज़ें होना ज़रूरी हैं –

# 1) इंटरनेट

जैसे टीवी में सिग्नल, डिश और केबल का तामझाम चाहिए होता है डाटा को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के वास्ते, वैसे ही वीडियो स्ट्रीमिंग वाली ट्रेन के लिए ‘पटरी’ का काम करता है इंटरनेट. इसी पर चलकर डाटा एंड यूज़र यानी दर्शक तक पहुंचता है.

# 2) स्क्रीन

जैसे टेलीविज़न के प्रोग्राम देखने के लिए टीवी स्क्रीन और फ़िल्में देखने के लिए रजत-पटल की ज़रूरत है वैसे ही स्ट्रीमिंग सर्विसेज़ के लिए भी हमें स्क्रीन की ज़रूरत पड़ेगी. अच्छी बात ये है कि टीवी और सिनेमा हॉल की तरह स्ट्रीमिंग सर्विसेज़ केवल एक दो स्क्रीन तक सीमित नहीं है.

स्मार्ट-टीवी
स्मार्ट-टीवी

आप अपने स्मार्टफोन में किसी स्ट्रीमिंग सर्विस का एप डाउनलोड कर सकते हैं, आप अपने लैपटॉप या डेस्क टॉप में इन स्ट्रीमिंग सर्विसेज़ की वेबसाइट में जा सकते हैं. साथ ही अपने टीवी में भी इन स्ट्रीमिंग सर्विसेज़ का आनंद ले सकते हैं.

टीवी पर इनका आनंद लेने के लिए या तो आपका टीवी ‘स्मार्ट-टीवी’ होना होगा या फिर आपको ऐसे किसी डिवाइस की ज़रूरत होगी जो आपके टीवी को स्मार्ट-टीवी में बदल दे.

स्मार्ट-टीवी मने ऐसा टीवी जिसमें आप स्मार्ट-फोन की तरह ही एप डाउनलोड कर सकते हैं और स्मार्ट-फोन की तरह ही उस एप में जाकर वीडियो भी देख सकते हैं. हां ये स्मार्ट-टीवी इंटरनेट से भी कनेक्टेड होना चाहिए.

और हां, अगर आपका टीवी एक स्मार्ट-टीवी नहीं है तो भी आप अपने टीवी में वीडियो स्ट्रीमिंग कर सकते हैं. इस दशा में आपके टीवी में एक यूएसबी पोर्ट होना ज़रूरी है. जिसमें आप अमेज़न-फ़ायर या फिर क्रोमकास्ट जैसी ‘पेन ड्राइव’ सी दिखने वाली डिवाइस लगा सकते हैं और आपका टीवी एक स्मार्ट-टीवी की तरह कार्य करने लगेगा.

अमेज़न फ़ायर और क्रोमकास्ट
अमेज़न फ़ायर और क्रोमकास्ट

इन्हें स्ट्रीमिंग डिवाइस भी कहा जाता है और ये बहुत सस्ते में आपके नॉर्मल टीवी को स्मार्ट-टीवी में बदल देती हैं.

3)  सब्सक्रिप्शन 

सारी टेक्निकल चीज़ों के अलावा वीडियो देखने-दिखाने के पुराने तरह के संसाधनों और ‘वीडियो स्ट्रीमिंग’ के बीच सबसे बड़ा अंतर विज्ञापनों का भी है. जहां टीवी में बीच में आपको ढेरों विज्ञापन देखने पर विवश होना पड़ता है वहीं अगर ‘वीडियो स्ट्रीमिंग’ की बात करें तो, यहां पर विज्ञापन ‘नहीं’ से लेकर ‘सीमित’ तक होते हैं.  इसका कारण है कि आपको इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए हर महीने एक निश्चित धनराशी इन वीडियो सेवा प्रदाताओं को देनी होती है. इसे ही ‘सब्सक्रिप्शन’ फीस कहा जाता है.

और ‘सब्सक्रिप्शन’ फीस ही दरअसल इन सर्विस प्रोवाइडर्स के ‘रेवेन्यू मॉडल’ का सबसे बड़ा हिस्सा है. मने जहां सिनेमा हॉल की कमाई टिकट की बिक्री और टीवी की कमाई विज्ञापनों से होती है वहीं वीडियो स्ट्रीमिंग की आय का सबसे बड़ा साधन सब्सक्रिप्शन है. और जहां पर सब्सक्रिप्शन नहीं देना है वहां पर या तो आपको विज्ञापन दिखेंगे (जैसे यू ट्यूब में) या फिर आपको हर फ़िल्म या हर शो के लिए अलग से पेमेंट करना होगा. (जैसे एचबीओ की स्ट्रीमिंग सर्विस). ये अलग से पेमेंट करने के ऑनलाइन रेंटिंग भी कही जा सकती है. ‘ऑनलाइन रेंटिंग’ मने ऑनलाइन किसी फ़िल्म या शो को किराए में लेना.

नेटफ्लिक्स का सबसे पहला लोगो
नेटफ्लिक्स का सबसे पहला लोगो

यू-ट्यूब में भी कई फ़िल्में आप ‘ऑनलाइन रेंट’ पर ले सकते हैं. और इन ‘पेड वीडियोज़’ में आपको विज्ञापन भी नहीं दिखेंगे.


# ओरिजनल्स

अब ये जो सर्विस प्रोवाइडर हैं (नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, अमेज़न प्राइम वीडियो) ये आप तक फ़िल्में, शो और धारावाहिक दो तरह से लेकर आते हैं.

– या तो ये पहले से ही बने शो खरीद लें. या फिर खुद के शो बनाएं.

पहले से ही बने शो मतलब, वो शो/सीरीज़/फ़िल्में जो मूलतः टीवी या सिनेमा हॉल के लिए बनाए गए थे और इन शोज़ को आप किसी और प्लैटफॉर्म्स पर भी देख सकते हैं. जैसे भारत के लिए ‘गेम ऑफ़ थ्रोंस’ हॉटस्टार नामक सर्विस प्रोवाइडर में खरीदा. जबकि ये शो टीवी (एचबीओ) के लिए बनाया गया था. अमेज़न प्राइम ने ‘अक्टूबर’ नाम की मूवी खरीदी. जबकि शूजित सरकार की यह फ़िल्म बड़े पर्दे के लिए बनाई गई थी.

हाउस ऑफ़ कार्ड्स
हाउस ऑफ़ कार्ड्स के करैक्टर्स

वहीं दूसरी तरफ ये सर्विस प्रोवाइडर अब इतने शक्तिशाली हो चले हैं कि अपने प्लेटफार्म के लिए खुद भी शो/सीरीज़/मूवी प्रोड्यूस करने का माद्दा रखते हैं. और वो ऐसा इसलिए करते हैं क्यूंकि ऐसे शो आप केवल एक जगह पर ही देख पाएंगे, यानी इनके प्लैटफॉर्म्स पर.

अगर ऐसे शो बेहतरीन हुए तो आपके पास इन सर्विस प्रोवाइडर्स का सब्सक्रिप्शन लेने के अलावा कोई विकल्प न बचेगा, जैसे ‘हाउस ऑफ़ कार्ड्स’ और ‘नार्कोज़’ आपको नेटफ्लिक्स के अलावा कहीं और देखने को नहीं मिलेगा. क्यूंकि ये नेटफ्लिक्स ने खुद बनाए हैं. खुद का पैसा लगाकर. कहा तो ये जाता है कि ‘हाउस ऑफ़ कार्ड्स’ ने रातों-रात नेटफ्लिक्स की किस्मत बदल दी.

हो सकता है कि बाद में इसकी डीवीडी आएं या टीवी वगैरह में भी दिखाया जाए. लेकिन अभी और सबसे पहले ये नेटफ्लिक्स में ही आए. ‘एक्सक्लूसिवली’. इन्हें नेटफ्लिक्स वाले नेटफ्लिक्स ओरिजनल और प्राइम वाले प्राइम ओरिजनल कहते हैं.


# नेटफ्लिक्स –

तो ऊपर की बातों से और आजकल चल रहे बज़ से हमें पता है कि भारत में नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, हॉटस्टार कुछ सबसे बड़े ऑनलाइन मीडिया सर्विस प्रदाता हैं.

लेकिन क्या आपको पता है कि नेटफ्लिक्स पूरी दुनिया में भी सबसे बड़ी ऑनलाइन मीडिया सर्विस प्रोवाइडर है.

narcos
नार्कोज़

नेटफ्लिक्स की शुरुआत हुई थी साल 1997 में. तब ये किराए पर डीवीडी उपल्बध करवाती थी. तब इंटरनेट था नहीं. जब एक पहचान बन गई, तो मेल के द्वारा डीवीडी घर-घर पहुंचाने का काम शुरू कर दिया. इस बिज़नेस आइडिया से इनकी धमक घर-घर तक पहुंच गई. मार्केट में पांव जम गया. फिर शुरू हुआ वीडियो ऑन डिमांड यानी जो प्रोग्राम जब देखना चाहें, तब देखें वाली सर्विस.

जैसे टीवी पर होता है न कि ‘सूर्यवंशम’ 12 बजे सेट मैक्स पर आएगी, तभी देख लो वरना ठाकुर भानू प्रताप को जहर वाली खीर खाते नहीं देख पाओगे. नेटफ्लिक्स ने ये दिक्कत दूर कर दी. जब जो चाहो देखो.

इस सर्विस के बाद इनके यूज़र बढ़ने लगे. फिर शुरू हुआ वो काम जिसके बदौलत आज इसके नाम की माला जपी जाती है. 2007 में इन्होंने स्ट्रीमिंग सर्विस शुरू की. लेकिन इनके लिए बड़े बदलाव का साल रहा 2012. इस साल नेटफ्लिक्स ने अपनी पहली सीरीज़ प्रोड्यूस की ‘लिलिहैमर’ नाम की. इसके बाद से वो सीरीज़ और फिल्म प्रोडक्शन करने लगे. इंटरनेट क्रांति इनके लिए बहुत मददगार साबित हुई और लोगों ने देखना शुरू किया. कंटेंट पसंद आ गया. इसके बाद आया साल 2016, जिस साल ये लोग सबसे ज़्यादा ओरिजनल कंटेंट देने वाले चैनल/नेटवर्क बन गए. उस साल इनकी तकरीबन 126 फिल्में/सीरीज़ रिलीज़ हुईं. इससे हुआ भयानक फायदा और अप्रैल 2018 तक इनके दुनियाभर में तकरीबन 12.8 करोड़  सब्सक्राइबर बन गए.

अभी एप्पल के आई फोन ने एक डेटा ज़ारी किया था, कि सबसे ज़्यादा कौन सा एप डाउनलोड होता है. एप था फेसबुक. लेकिन एक और लिस्ट भी थी, जिसपर कम ही लोगों का ध्यान गया होगा – सबसे ज़्यादा कमाई करने वाला एप कौन सा है. और इस लिस्ट में टॉप पर था – नेटफ्लिक्स.

नेटफ्लिक्स की वेबसाइट
नेटफ्लिक्स की वेबसाइट

अभी हाल ही में इन्होंने जियो को धन्यवाद किया था. और क्यूं किया था ये बताने की ज़रूरत नहीं.

और आज हम इसलिए इसकी बात कर रहे हैं क्यूंकि इन्होंने भारत में भी पैर जमाने शुरू कर दिए हैं. 2015 तक तो लोग-बाग ये कह रहे थे कि नेटफ्लिक्स कभी भारत नहीं आएगा, या निकट भविष्य में नहीं आएगा. लेकिन 2016 के आते-आते ये भारत में आ गया. और अभी जुम्मा-जुम्मा दो साल भी नहीं हुए कि भारत के लिए भी एक ‘एक्सक्लूसिव’ सीरीज़ शुरू कर दी – ‘सेक्रेड गेम्स’.

भारतीय कलाकार, भारतीय निर्देशक, भारतीय पृष्ठभूमि. और निर्माता – नेटफ्लिक्स.


# नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन प्लान

खैर हम सेक्रेड गेम्स के बारे में अलग से बात करेंगे. लेकिन अभी आपको बताते हैं कि भारत में नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन का रेट क्या है.

देखिए सबसे पहले आपको सबसे अच्छी बात बताते हैं. वो ये कि पहले महीने आपको कोई पैसा नहीं देना है. लेकिन हां पेमेंट डिटेल्स ज़रूर डालनी होंगी. क्यूं डालनी होंगी? जिससे कि हर बार अपने आप ही आपके अकाउंट से पैसा कट जाए (ऑटो डीडक्ट). लेकिन फिर भी अगर आपने केवल फ्री वाला एक महीना देखना है तो पहले सब्सक्राइब करें और एक महीना ख़त्म होने से पहले सब्सक्रिप्शन कैंसल कर दें.
अगर आप कंटीन्यू करते हैं तो आपके पास सब्सक्रिप्शन के लिए तीन प्लान्स उपलब्ध हैं –

बेसिक प्लान –

ये पांच सौ रुपए प्रतिमाह पर उपलब्ध है

इसमें आप एचडी और अल्ट्रा एचडी पर स्ट्रीमिंग नहीं कर पाएंगे. मने पिक्चर क्वालिटी ओके-ओके होगी. और साथ ही आप केवल एक स्क्रीन पर नेटफ्लिक्स देख पाएंगे. जैसे ही दूसरी स्क्रीन में लॉग-इन करेंगे पहली वाली से लॉग-आउट हो जाएंगे.

स्टेंडर्ड प्लान –

ये छः सौ पचास रुपए प्रतिमाह पर उपलब्ध है

इसमें आप एचडी पर तो स्ट्रीमिंग कर पाएंगे लेकिन अल्ट्रा एचडी पर स्ट्रीमिंग नहीं कर पाएंगे. मने पिक्चर क्वालिटी बेसिक प्लान से बेहतर होगी. और साथ ही आप दो स्क्रीन पर ‘एक साथ’ नेटफ्लिक्स देख पाएंगे.

प्रीमियम प्लान –

ये आठ सौ रुपए प्रतिमाह पर उपलब्ध है

इसमें अल्ट्रा एचडी पर भी स्ट्रीमिंग कर पाएंगे. मने पिक्चर क्वालिटी बाकी दोनों प्लान्स से बेहतरीन होगी. और साथ ही आप चार स्क्रीन पर ‘एक साथ’ नेटफ्लिक्स देख पाएंगे.

कुछ ऐसी वीडियो हैं जिनको आप डाउनलोड भी कर सकते हैं. अगर आपने बेसिक प्लान लिया है तो आप ऐसी वीडियोज़ को एक फोन या टेबलेट में डाउनलोड कर सकते हैं. स्टेंडर्ड प्लान में दो और प्रीमियम में 4 फोन या टेबलेट में डाउनलोड कर सकते हैं.

और हां आपने यदि प्रीमियम का प्लान खरीदा है तो अल्ट्रा एचडी तभी दिखेगा जब आपकी टीवी या मोबाइल स्क्रीन इसको सपोर्ट करेगी.


# नेटफ्लिक्स के आगे जहां और भी हैं 

भारत में नेटफ्लिक्स का एकछत्र राज हो ऐसा नहीं है. नेटफ्लिक्स के अलावा कुछ और ऐसे स्ट्रीमिंग एप हैं जिनपर आपकी नज़र रहनी चाहिए –

अमेज़न प्राइम –

यदि ओरिजिनल और प्रीमियम कंटेंट में नेटफ्लिक्स को कोई टक्कर दे रहा है तो वो अमेज़न प्राइम ही है. इनके पास भी काफी अच्छे ‘ऑरिजनल’ कंटेंट उपलब्ध हैं, जिनमें भारतीय दर्शकों के लिए बनाया गया – ‘ब्रीद’ और ‘चाचा विधायक हैं हमारे’ जैसे सीरियल्स शामिल हैं.

Prime Video

सोनी लिव –

फुटबॉल का कुंभ यानी फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप की लाइव स्ट्रीमिंग आजकल सोनी लिव में ही हो रही है. साथ ही इसमें ‘सोनी’ के सारे टीवी चैनल और ढेर सारी हिंदी मूवीज़ भी उपलब्ध हैं.

Sony Liv

हॉटस्टार –

क्रिकेट की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के लिए हॉटस्टार से बढ़िया कोई विकल्प नहीं. साथ ही ‘गेम ऑफ़ थ्रोंस’ भी यहीं उपलब्ध है.

सोनी लिव और हॉटस्टार के साथ-साथ अगर आप डिट्टो टीवी, वूट और ज़ी5 डाउनलोड कर लेते हैं तो आपको शायद ही डिश का कनेक्शन लेने की ज़रूरत पड़ेगी. बेशक आपको सब्स्क्रिप्शन के पैसे देने होंगे लेकिन कंटेंट के नाम पर आपके पास विदेशी से लेकर रीजनल तक का ढेर सारा वीडियो कंटेंट उपलब्ध होगा.

Hotstar

ऑल्ट बालाजी –

सास-बहू के सीरियल बनाने वाली एकता कपूर ‘ऑल्ट बालाजी’ नाम की स्ट्रीमिंग सर्विस को लेकर बहुत आशान्वित लगती हैं. ‘बोस’, ‘गंदी बात’ और ‘टेस्ट केस’ जैसे सीरयल्स कहीं से भी टीवी वाले एकता कपूर के बनाए नहीं लगते.

Alt Balaji

इरोज़ नाऊ –

‘मेरी निम्मो’ किसी सिनेमा हॉल में नहीं सबसे पहले इरोज़ नाऊ में ही रिलीज़ हुई. इनके पास फिल्मों का एक अच्छा ख़ासा बुके है.

Eros

टीवीएफ प्ले –

अपना सफर यूट्यूब से शुरू करने वाली टीवीएफ नए तरह का और युवाओं को टारगेट करता कंटेंट परोसने के लिए जाना जाता है. अब इनका अपना एप भी है. लेकिन एक दो दिन की देरी से ही सही, ये अपना सारा कंटेंट यूट्यूब में भी डाल देते हैं. और साथ ही शुरुआत में इनके एप में ‘स्लो’ स्ट्रीमिंग की दिक्कतें भी सुनाई दी थीं. होने को टीवीएफ को इंडिया में वेब सीरीज़ शुरू करने या उन्हें फेमस करने का श्रेय दिया जा सकता है. इनका ‘परमानेंट रूममेट्स’ और ‘पिचर’ बहुत ज़्यादा सराहा गया था. ‘परमानेंट रूममेट्स’ का बाद में दूसरा सीज़न भी आया था. इनके अलावा ‘बिष्ट प्लीज़’ और ‘ट्रिपलिंग’ ने भी टीवीएफ को स्थापित करने में सहयोग किया था.

TVF

इन सब के अलावा हर मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर का एक ऑनलाइन स्ट्रीमिंग का एप है, जैसे एयरटेल का – एयरटेल टीवी, जियो का – जियो टीवी, आईडिया का – आईडिया टीवी आदि.


# S3E2 का क्या मतलब है –

सभी तरह के स्ट्रीमिंग एप में सीरियल्स या सीरीज़ भी चलती है. इन सीरीज़ के निश्चित एपिसोड होते हैं. किसी सीरियल के कुछ एपिसोड देखने चुकने के बाद आपको एक साल का इंतज़ार करना पड़ता है. फिर अगले साल के पहले एपिसोड में कहानी वहीं से शुरू होती है, जहां पर पिछले साल के लास्ट एपिसोड में ख़त्म हुई थी. एपिसोड को शॉर्ट में E लिखा जाता है और सीज़न को S. यानी S3E2 का मतलब ये है कि आप तीसरे सीज़न (साल) का दूसरा एपिसोड देख रहे हैं.

इसी तरह S5E4 मने पांचवे सीज़न का चौथा एपिसोड.


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