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'थ्री बिलबोर्ड्स आउटसाइड एबिंग मिज़ोरी': दुनिया को गांधीगिरी का नया आइडिया देने वाली फिल्म

‘ऑस्कर वाली फ़िल्में’ सीरीज़ में छठी फिल्म है डायरेक्टर मार्टिन मेकडॉना की – Three Billboards Outside Ebbing, Missouri.

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“जेसन, मैं विलबी. अब मैं मर चुका हूं, माफ करना इसके लिए. लेकिन मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूं जो जिंदा रहते हुए मैं तुमसे कभी कह नहीं पाया. मुझे लगता है कि तुम्हारे अंदर एक बहुत बेहतरीन कॉप बनने की क्षमताएं हैं जेसन. और पता है क्यों? क्योंकि कहीं न कहीं भीतर में तुम एक सज्जन आदमी हो. मुझे पता है तुम सोचते हो कि मैं ऐसा नहीं सोचता. मैं ये ज़रूर सोचता हूं कि तुम गुस्से में हो और मुझे पता है कि ये तब से है जब तुम्हारे डैड चल बसे थे और उसके बाद से तुम्हे अपनी मॉम की देखभाल करनी पड़ी. मगर जब तक तुम इतनी अधिक नफरत अपने भीतर रखोगे, तब तक वो नहीं बन पाओगे जो तुम बनना चाहते हो – एक डिटेक्टिव. क्योंकि तुमको पता है एक डिटेक्टिव बनने के लिए तुम्हे क्या चाहिए. और मुझे पता है जब जानोगे तो चौंक जाओगे. एक डिटेक्टिव बनने के लिए तुम्हे जिसकी ज़रूरत है वो है – प्यार. क्योंकि प्यार के जरिए ही शांति आती है. और शांति के जरिए ही विचार या सोचना/समझना आता है. और कभी-कभी चीजों की जांच करने के लिए तुम्हे सोचने-समझने की जरूरत होती है जेसन. बस ये सब ही चाहिए. तुम्हे तो गन की ज़रूरत भी नहीं है. और निश्चित तौर पर तुम्हे नफरत की ज़रूरत तो बिल्कुल नहीं है. नफरत ने कभी किसी चीज का समाधान नहीं किया है. लेकिन शांतचित्त होने ने किया है. सोचने-समझने ने किया है. आज़मा के देखो. सिर्फ ज़रा बदलाव के लिए आज़मा के देखो. तुम एक सज्जन आदमी हो और तुम्हारा नसीब खराब रहा है लेकिन मुझे लगता है अब से तुम्हारे लिए चीजें बदलने वाली हैं.”

– शैरिफ बिल विलबी मरने से पहले तीन ख़त लिखकर जाते हैं. एक पत्नी के लिए, दूसरा मिल्ड्रेड के लिए और तीसरा पुलिस स्टेशन में अपने डेप्यूटी ऑफिसर डिक्सन के लिए जो उनसे बहुत प्यार करता है. ये ख़त वो डिक्सन के लिए लिखकर जाते हैं जो डिक्सन की जिंदगी बदलता है. डिक्सन के बारे में वो ये सब लिख रहे हैं क्योंकि वो बहुत हिंसक है और उस पर अफ्रीकी-अमेरिकी कैदियों को जेल में टॉर्चर देने का आरोप है. हालांकि असल जिंदगी में डिक्सन एक अलग ही दिशाहीन, भोला आदमी है.

मार्टिन मैकडॉना की लिखी और डायरेक्ट की इस फिल्म की कहानी मिल्ड्रेड हेज़ (फ्रांसेस मैकडॉरमेंड) के बारे में है जो अमेरिका के मिज़ूरी राज्य में एबिंग नाम की एक काल्पनिक जगह में रहती है. यहां की आबादी बहुत कम है. हर कोई एक-दूसरे को जानता है. मिल्ड्रेड सड़क से गुजरते हुए पास ही तीन खाली बिलबोर्ड देखती है और उसके दिमाग में कुछ कौंधता है. वो फिर उन बिलबोर्ड पर विज्ञापन लगाने वाली कंपनी के ऑफिस जाती है और एक साल के लिए वो एड स्पेस खरीद लेती है. अब कुछ दिनों में उन बिलबोर्ड्स पर जो छपता है उससे वहां की पूरी कम्युनिटी के लोग शॉक में आ जाते हैं. खासकर एबिंग पुलिस डिपार्टमेंट.

oscar

इन तीन बिलबोर्ड्स पर लिखा होता हैः
Raped While Dying
And Still No Arrests?
How Come, Chief Willoughby?
मतलब – जब वो मर रही थी तब उसका रेप किया जा रहा था, और फिर भी इस मामले में कोई गिरफ्तारियां नहीं? ये कैसे चीफ विलबी?

विलबी (वूडी हैरलसन) दरअसल एबिंग के शैरिफ का नाम है. सात महीने पहले मिल्ड्रेड की बेटी एंजला के रेप और मर्डर की दिल दहला देने वाली वारदात हुई थी. लेकिन दोषियों का कोई सुराग पुलिस को नहीं मिला. मिल्ड्रेड गुस्से में भरी हुई औरत है. वो मुंह खोलती है तो ऐसे बोल बोलती है कि कानों में अंगारों की तरह लगते हैं. वो गालियां बकते हुए सोचती नहीं. चाहे पुलिस ऑफिसर हो जिसे वो थाने जाकर गंदी से गंदी गालियों से संबोधित करती है; या बहुत सम्मानित लोकल पादरी जो जब उसे समझाने आता है कि बिलबोर्ड उतार लो तो वो चर्च में नाबालिग़ लड़कों से रेप करने का इतना करारा वाक्य उसे सुनाती है कि वो शॉक की अवस्था से बाहर नहीं आ पाता; या फिर बेटे की स्कूल में उसकी कार पर कोल्ड ड्रिंक फेंकने वाला लड़का जिसका टांगों के बीच वो खींचकर लात मारती है – जो भी मिल्ड्रेड से बद्तमीजी करता है या रास्ते में आता है वो उसे तहस नहस कर देती है.

तो उसे अपनी बेटी के लिए न्याय चाहिए.

ये एक मज़ेदार और याद रह जाने वाली फिल्म है.

इसमें कई चीजें खास हैं.

जैसे एक मां का अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए टाउन के बाहर बड़े-बड़े विज्ञापन लगा देना. इस आइडिया का इस्तेमाल कथित तौर पर असल में भी अभी कई जगह हो रहा है. अन्याय के खिलाफ बोलने का ये दौर है, चाहे न्याय कितना ही असंभव क्यों न लगे. क्योंकि आपको न्याय मिले न मिले, आप दूसरों के साथ अन्याय होने की संभावनाओं को खत्म करते हो और कुल मिलाकर समाज बेहतर हो जाता है.

कहानी में शैरिफ का किरदार है जो अनूठा है. वो बहुत भला आदमी है. उसे कैंसर है लेकिन फिर भी वो मिल्ड्रेड से गुस्सा नहीं होता. बल्कि जब वो मरने से पहले उसे एक लेटर लिखकर जाता है और जब मिल्ड्रेड उसे पढ़ रही होती है तो कहीं से हमारे भी एक-दो आंसू निकल आते हैं.

फिर इसमें डिक्सन (सैम रॉकवेल) का कैरेक्टर है जो कहीं न कहीं अपनी अज्ञानता की वजह से racist यानी नस्लभेदी है. ‘थ्री बिलबोड्र्स आउटसाइड एबिंग मिज़ोरी’ इस बार ऑस्कर की प्रमुख फिल्म रही है, हालांकि कुछ आलोचकों का मानना था कि अमेरिका में ब्लैक समुदाय के अनुभव को ये फिल्म हल्का करती है और नस्लवाद करने वाले पात्र को अंत में हीरो बनाती है.

फिल्म का वो सीन जिसमें मिल्ड्रेड और डिक्सन (दाएं) पुलिस द्वारा अश्वेतों की पिटाई की बात करते हैं जिसमें वो एन वर्ड यूज़ करते हैं. बाद में सीन में शैरिफ विलबी (वूडी हैरलसन) की एंट्री होती है. फिल्म में नस्लवाद के संदर्भ को जैसे बरता गया है उसकी आलोचना भी हुई है.
फिल्म का वो सीन जिसमें मिल्ड्रेड और डिक्सन (दाएं) पुलिस द्वारा अश्वेतों की पिटाई की बात करते हैं जिसमें वो एन वर्ड यूज़ करते हैं. बाद में सीन में शैरिफ विलबी (वूडी हैरलसन) की एंट्री होती है. फिल्म में नस्लवाद के संदर्भ को जैसे बरता गया है उसकी आलोचना भी हुई है.

होता ये है कि कहानी में डिक्सन का किरदार एक जर्नी से गुजरता है जहां वो पूरी तरह परिवर्तित होता है और समझदारी विकसित करता है. वो समझदारी, जिसके बाद वो माफी मांगना शुरू करता है, जहां उसे महसूस होता है कि उसका हिंसक बर्ताव कितना गलत था और वो दूसरों की मदद में जुट जाता है. यहां तक कि अंत में जब मिल्ड्रेड और वो, गन लेकर, एक रेपिस्ट के पीछे एबिंग से आइडाहो जाने को रवाना होते हैं तो वो पूछती है, “डिक्सन, क्या तुम इस बारे में श्योर हो? इस आदमी को मारने के बारे में?” तो शुरू में इतने हिंसक बर्ताव वाला डिक्सन कहता है, “नहीं.” उसके बाद मिल्ड्रेड कहती है कि उसे लगता है वो भी उसे मारने के पक्ष में नहीं है.

हालांकि बाद में वो ये भी कहती है कि आखिरी फैसला रास्ते में करेंगे.

फिल्म को देखकर खुशी ये होती है कि आज के टाइम में जब हम एक-दूसरे को लेकर इतने जजमेंटल होते जा रहे हैं. कम्युनिटीज़ बन रही है तो जाति और धर्म के आधार पर. विचित्रता अगर आप में है तो लोगों के लिए उसे स्वीकार करना कम हो रहा है. मज़ाक पचाने को लेकर या एक-दूसरे के लड़ाई-झगड़ों को भुलाकर साथ मिलकर आगे बढ़ने को लेकर लोगों में सहनशीलता नहीं दिखती. पार्किंग को लेकर शहरों में लोग एक-दूसरे का सिर फोड़ रहे हैं, सोसायटीज़ में पिल्लों को बिस्किट खिला देने पर ईवनिंग वॉक पर निकले भद्रजन मां-बेटी को पीट देते हैं. अनेक-अनेक विचलित करने वाले ऑब्जर्वेशन हमारे समाज के हैं. ऐसे में एबिंग एक-दूसरे को बर्दाश्त करने और अपने-अपने विकारों को पीछे छोड़कर शांति और प्रेम प्राप्त करने की सीख देता है.

ये स्क्रिप्ट मार्टिन मैकडॉना ने अभिनेत्री फ्रांसेस मैकडॉरमेंड को ध्यान में रखकर ही लिखी थी. उनको तीन दशक से ज्यादा का अनुभव हॉलीवुड में एक्टिंग का है. वो जब स्टेज पर जाती हैं तो हरेक फिल्मी दिग्गज, यंग एक्टर या एक्ट्रेस गुदगुदा रहे होते हैं और उन्हें ध्यान से सुन रहे होते हैं. ‘थ्री बिलबोड्र्स..’ की मिल्ड्रेड की तरह ही फ्रांसेस भी बुलंद व्यक्तित्व वाली हैं. वे नर्वस दिखती हैं, लेकिन असल में उनके सामने प्रस्तुत लोग नर्वस हो जाते हैं. वे अपने समय की पॉलिटिक्स पर भी अधिकार से बात करती हैं.

मिल्ड्रेड और उसके प्रति आकृष्ट बौना पुरुष जेम्स (गेम ऑफ थ्रोन्स फेम पीटर डिंकलेज) बैठे हैं. जेम्स उससे आत्मानुभूति करता है, उसका साथ देता है,
मिल्ड्रेड और उसके प्रति आकृष्ट बौना पुरुष जेम्स (गेम ऑफ थ्रोन्स फेम पीटर डिंकलेज) बैठे हैं. जेम्स उससे आत्मानुभूति करता है, उसका साथ देता है,

इस फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड मिला तो उन्होंने स्टेज से बहुत अच्छी बात कही, “हमारी फिल्म इंडस्ट्री (हॉलीवुड) के पावर स्ट्रक्चर में जो ऐतिहासिक बदलाव हो रहा है उसका हिस्सा होकर मैं बहुत खुश हूं. मेरा भरोसा करिएगा, इस कमरे में जितनी महिलाएं दिख रही हैं वो सब यहां खाना खाने नहीं आई हैं. हम यहां पर अपने काम (उपलब्धियों) की वजह से हैं.”

हाल ही में उन्होंने बेस्ट एक्ट्रेस का बाफ्टा भी जीता और अवॉर्ड लेते हुए कहा, “जैसे मार्टिन ने कहा, आज्ञापालन करने या नियमसम्मत चलने को लेकर मुझे थोड़ी दिक्कत हमेशा रही है (बाफ्टा में #टाइम्ज़अप कैंपेन के तहत औरतों के शोषण के खिलाफ विरोध के लिए सब महिलाएं ब्लैक कलर पहनकर आईं लेकिन फ्रांसेस नहीं पहनकर आईं.) लेकिन मैं चाहती हूं आप सब जान लो कि मैं ब्लैक ड्रेसेज़ में आई अपनी इन सब बहनों के साथ पूरी एकता में खड़ी हूं. बहुत अच्छे से आयोजित सविनय अवज्ञा के किसी भी एक्ट की मैं बहुत तारीफ करती हूं. मैं रोमांचित हूं कि पूरी दुनिया में एक्टिविस्टों ने ‘थ्री बिलबोर्ड्स..’ के सेट डेकोरेशन से प्रेरणा ली है औऱ सड़कों पर उतरे हैं और लोगों के बीच इसे लेकर एक सकारात्मक विमर्श बन रहा है. मैं उन स्टूडियोज़ का शुक्रिया अदा करना चाहूंगी जिन्होंने मार्टिन और गुएर्मो (द शेप ऑफ वॉटर) की फिल्मों को सावधानी से आगे बढ़ाया क्योंकि न सिर्फ वे फिल्में मनोरंजक हैं बल्कि वे एक दीर्घकालिक और वृहद सांस्कृतिक विमर्श को प्रोत्साहित करती हैं. Power to the people.


2018 के ऑस्कर्स में ‘थ्री बिलबोर्ड्स आउटसाइड एबिंग मिज़ोरी’:
7 नामांकन मिले, 2 में विजेता रही. 

बेस्ट पिक्चर – मार्टिन मैकडॉना
बेस्ट एक्ट्रेस – फ्रांसेस मैकडॉरमेंड  (विजेता) 
सपोर्टिंग एक्टर – वूडी हैरलसन
सपोर्टिंग एक्टर – सैम रॉकवेल (विजेता) 
फिल्म एडिटिंग – जोन ग्रैगरी
ओरिजिनल सॉन्ग (म्यूजिक) – कार्टर बरवेल
ओरिजिनल स्क्रीनप्ले – मार्टिन मैकडॉना

फ्रांसेस ने 1996 में अपनी फिल्म ‘फार्गो’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का ऑस्कर जीता था, इस बार भी शुरू से सबसे प्रबल दावेदार वे ही थीं.

सीरीज़ की अन्य फिल्मों के बारे में पढ़ें:
Call My By Your Name – वो आनंदभरा स्थान जहां दो पुरुषों के प्रेम में कोई बाधा नहीं
The Shape Of Water – क्यों 2018 के Oscars की ये सबसे बड़ी फिल्म है
Get Out – शॉकिंग, विषैली और भयानक फिल्म जो बहुत सही समय पर आई है
Dunkirk – वो वॉर मूवी जिसमें आम लोग युद्ध से बचाकर अपने सैनिकों को घर लाते हैं
Lady Bird – क्यों इस अवॉर्ड सीज़न में इस नन्ही सी फिल्म की दीवानगी है?
Darkest Hour – गैरी ओल्डमैन के विशिष्ट अभिनय ने इसे 2018 ऑस्कर में बुलंद फिल्म बनाया
The Post – आज के डरे हुए मीडिया के लिए एक बड़ी urgent फिल्म

(Award tally edited post the Oscar ceremony on March 5, 2018.)
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