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किर्गिस्तान में फंसे हजारों भारतीय स्टूडेंट की क्यों नहीं सुन रही सरकार?

किर्गिस्तान. मेडिकल की पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ा हब. एक अनुमान के मुताबिक, भारत के अलग-अलग राज्यों के करीब 14 हजार छात्र यहां मेडिकल की पढ़ाई करते हैं. कोरोना वायरस की वजह से हुए लॉकडाउन के कारण ये छात्र पिछले कई महीनों से किर्गिज़स्तान में ही फंसे हुए हैं. इन छात्रों का कहना है कि किर्गिस्तान में कोरोना की स्थिति दिन-ब-दिन भयावह होती जा रही है. इसके अलावा निमोनिया भी यहां पर तेजी से फैल रहा है. ऐसे में ये छात्र अपने घर लौटना चाहते हैं, लेकिन लौट नहीं पा रहे हैं. 

क्या एम्बेसी से नहीं मिल रही मदद?

छात्रों का आरोप है कि एम्बेसी उनकी मदद नहीं कर रहा. ‘दी लल्लनटॉप’ से बात करते MBBS फाइनल ईयर के स्टूडेंट अब्दुल ने बताया कि वे खुद राजधानी बिस्केक स्थित भारतीय दूतावास में गए थे. लेकिन वहां उन्हें कोई मदद नहीं मिली. अब्दुल बताते हैं, 

मैं खुद एम्बेसी में गया था. यहां से 700-800 किलोमीटर की दूरी पर है. हमने एम्बेसडर से मिलने के लिए दो घंटे तक इंतजार किया. उनके दो अधिकारी आए, उन्होंने हमसे लिखित में अप्लिकेशन मांगा. हमने लिखित में दिया. लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं आया. मार्च से हमारी क्लासेज वगैरह सारी बंद हो गई थीं. हमने एम्बेसडर से उसी वक्त कहा था कि बीमारी फैलने से पहले-पहले ही हमको घर पहुंचा दिया जाए. लेकिन उन्होंने कहा कि अभी सरकार ने सारी फ्लाइट्स बंद कर दी हैं. अभी आप लोग नहीं जा सकते. सिचुएशेन सही होने का वेट करिए. 

किर्गिस्तान में फंसे स्टू़ेंट्स में ज्यादातर यूपी-बिहार के रहने वाले हैं. ये लगातार सोशल मीडिया पर कैम्पेन चलाकर भारत सरकार और राज्य सरकारों से मदद मांग रहे हैं. मेल कर रहे हैं, ट्वीट कर रहे हैं. लेकिन इन्हें कोई जवाब नहीं मिल रहा है. गोरखपुर के रहने वाले MBBS के थर्ड ईयर स्टूडेंट गौरव वर्मा बताते हैं, 

मेरे साथ यूपी-बिहार के अलावा साउथ के भी हैं. COVID-19 की वजह से यहां की स्थिति काफी खराब है. इसके अलावा निमोनिया की भी वजह से यहां काफी लोग बीमार हैं. यहां पर स्थानीय लोगों के लिए तो ठीक-ठाक व्यवस्था है, लेकिन हमारे लिए उस तरह नहीं है. लोगों में खौफ का माहौल है. हमने विदेश मंत्रालय से लेकर राज्य सरकारों तक से सहायता मांगी. लेकिन हमारे किसी ट्वीट का, मेल का कोई जवाब नहीं आता. न तो एम्बेसी से आता है, न ही भारत सरकार की ओर से. कम से कम उन्हें किसी ट्वीट का तो जवाब देना चाहिए. जो भी स्थिति है, बताना चाहिए. वो आकर यही कह दें कि अभी थोड़ा समय लगेगा, वेट करिए. क्योंकि बच्चे बहुत ज्यादा परेशान हैं.

‘वंदे भारत’ मिशन से भी निराशा

7 मई 2020. इस तारीख को भारत सरकार ने विदेश में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए ‘वंदे भारत’ मिशन शुरू किया. इस मिशन के शुरू होने के बाद किर्गिस्तान में फंसे स्टूडेंट्स को भी निकाला जाने लगा. लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी अब तक यहां से सारे स्टूडेंट्स को नहीं निकाला जा सका है. अब्दुल बताते हैं, 

‘वंदे भारत’ मिशन शुरू होने से पहले ही हमारे एम्बेसडर ने सारी यूनिवर्सिटीज हमसे सारा डिटेल लिया था. जब वंदे भारत शुरू हुआ, तो एम्बेसी ने सही तरीके से काम नहीं किया. उनके पास सारी डिटेल थी, इसके बावजूद उन्होंने केवल 10 फ्लाइट ही मंगाई. इन फ्लाइट्स में भी जिन स्टूडेंट्स को इमरजेंसी थी, उन्हें भी जगह नहीं मिली. 

‘वंदे भारत’ मिशन इस समय अपने चौथे चरण में है. पहला चरण 7 मई से 15 मई तक चला. दूसरा चरण 17 से 22 मई तक था, जिसे बाद में सरकार ने 10 जून तक के लिए बढ़ा दिया था. तीसरा चरण 11 जून से 2 जुलाई तक चला. 4 जुलाई से इस मिशन का चौथा चरण शुरू हुआ. बिहार के रहने वाले आनन्द मिश्रा बताते हैं कि पिछले चरण में किर्गिस्तान से बिहार के लिए एक भी फ्लाइट नहीं थी. ‘दी लल्लनटॉप’ से बात करते हुए आनन्द ने कहा,  

हमारे कॉलेज में यूपी-बिहार से बहुत ज्यादा स्टूडेंट्स हैं. हमें ज्यादा फ्लाइट्स की आवश्यकता थी, लेकिन वो हमें नहीं दी गई. पिछले फेज में यूपी के लिए तो एक फ्लाइट थी, लेकिन बिहार के लिए एक भी फ्लाइट नहीं थी. 

टिकट के दाम दोगुने

‘वंदे भारत’ मिशन के तहत एयर इंडिया स्टूडेंट्स को वापस तो ला रहा है, लेकिन टिकट के दाम लगभग दोगुना कर दिया गया है. स्टूडेंट्स का कहना है कि पहले जितने में वो आने-जाने दोनों का टिकट करा लेते थे, उतने में अब केवल वापसी का टिकट मिल रहा है. हालांकि किसी तरह घर जाने को तैयार इसके लिए भी तैयार हैं, लेकिन उन्हें पर्याप्त फ्लाइट्स ही नहीं मिल रहीं. अब्दुल कहते हैं, 

नॉर्मली हम जब यहां से जाते हैं, तो 25-30 हजार में हमें दोनों तरफ की फ्लाइट मिल जाती है. लेकिन अभी जब एयर इंडिया ने शुरू किया, तो एक तरफ यानी वन-वे किराया था 21 हजार. हम इसके लिए भी तैयार हैं. लेकिन टिकट ही नहीं मिल रहे. हमारे एम्बेसडर साहब ने एक वीडियो जारी कह कहा था कि हमारे पास 50 फ्लाइट हैं. हम 10 जुलाई तक सभी स्टूडेंट्स को वापस भेज देंगे. लेकिन अभी तक हमें पता नहीं चला कि वो 50 फ्लाइट्स कहां गईं? 

प्राइवेट फ्लाइट का कोई भरोसा नहीं 

स्टूडेंट्स का कहना है कि एयर इंडिया की पर्याप्त फ्लाइट उपलब्ध न होने के कारण कुछ प्राइवेट फ्लाइट्स को भी अनुमति दी गई. इन फ्लाइट्स में टिकट की कीमत 36 हजार से 50 हजार तक की है. इसके अलावा 10-15 हजार रुपए क्वारंटीन चार्ज अलग से देना होता है. ऐसे में मिडिल क्लास फैमिली से आने वाले स्टूडेंट्स का कहना है कि हम तो प्राइवेट फ्लाइट से जाने के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं. इसके अलावा प्राइवेट फ्लाइट्स का कोई भरोसा भी नहीं है कि कब उन्हें रद्द कर दिया जाए. बिहार की रहने वाली अंजुम बताती हैं,     

मेरे कई दोस्तों ने प्राइवेट फ्लाइट का टिकट खरीदा था. उनकी फ्लाइट थी 11 तारीख को. एक लखनऊ और एक हैदराबाद की फ्लाइट थी. पूरे दिन बच्चे एयरपोर्ट पर बैठे रह गए. लेकिन फ्लाइट नहीं मिली. वो सारे बच्चे शाम को वापस चले आए. बोला जा रहा है कि पैसा रिटर्न कर देंगे, लेकिन अब तक हुआ नहीं है. हमें नहीं पता कि ये फ्लाइट भारत सरकार की वजह से नहीं गई या फिर एयरपोर्ट अथॉरिटी की वजह से. लेकिन आप सोचिए कि ऐसे महामारी के दौर में पूरे दिन बच्चे एयरपोर्ट पर भीड़ लगाकर भूखे-प्यासे बैठे रहे. 

क्या चाहते हैं स्टूडेंट? 

स्टूडेंट्स की ओर से सोशल मीडिया पर #bringbackindianstudents कैम्पेन चलाया जा रहा है. इस पर हैशटैग के जरिए वे केंद्र की और राज्य की सरकारों से मदद मांग रहे हैं. गौरव वर्मा कहते हैं,

मैंने सबको ट्वीट करके देख लिया. अपने लोकल विधायक-सांसद से लेकर पीएमओ और विदेश मंत्रालय तक का, किसी का भी रिप्लाई नहीं आया. मेरी भारत सरकार से यही रिक्वेस्ट है कि आप हमारे वापस आने का इंतजाम करिए. आपको बस फ्लाइट की संख्या बढ़ानी है और कुछ नहीं करना है. और सरकार चाहे तो ये कर भी सकती है, लेकिन पता नहीं, क्यों वो ये कर नहीं रही है.

सरकारों की ओर से तो नहीं, लेकिन एक्टर सोनू सूद की ओर से इन स्टूडेंट्स को जरूर मदद का आश्वासन मिला है. सोनू सूद लॉकडाउन के दौरान हजारों मजूदरों को घर पहुंचाकर चर्चा में आए थे. उन्होंने स्टूडेंट्स को सुरक्षित घर पहुंचाने के लिए उचित इंतजाम करने की बात कही है.

बिश्केक दूतावास का क्या कहना है? 

26 जून को जारी अपने वीडियो संदेश में भारतीय राजदूत आलोक डिमरी ने 10 जुलाई तक 50 फ्लाइट्स के जरिए लगभग 8,300 लोगों को भारत वापस पहुंचाने की उम्मीद जताई.

हमने बिश्केक दूतावास से बात करने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है. अगर कोई जवाब आता है, तो हम आगे अपडेट कर देंगे.


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किर्गिज़स्तान में फंसे ये हज़ारों भारतीय छात्र सरकार से क्या कहना चाहते हैं?

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