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जब चमगादड़ बन 'चोटी वाले शेर' ने किया था इंग्लैंड का शिकार

साल 2012 . तारीख थी 14 नवंबर लेकिन हम भारत में हैं तो हमारे यहां तारीख हो चुकी थी 15 नवंबर. स्वीडन नामक देश की राजधानी स्टॉकहोम में एक मैच खेला जा रहा था. कहने को तो यह महज फ्रेंडली, यानी कि दोस्ताना मैच था लेकिन ब्रो… दोस्ती-फ्रेंडशिप ये सब पिच/स्टेडियम के बाहर ही छूट जाती है. एक बार पिच पर उतरे तो फिर तो हर हाल में जीतना ही रहता है. हर प्लेयर बस जीतना चाहता है.

इस मैच में स्वीडन के खिलाफ उतरी थी इंग्लैंड की टीम. जिसने उसी साल हुए यूरो कप में स्वीडन को 3-2 से हराया था. इंग्लिश मैनेजर रॉय हडसन को लगा था कि यह मैच भी आसानी से निकल जाएगा. यही सोचकर इंग्लैंड ने इस मैच में छह नए प्लेयर्स उतारे. इंग्लिश कैप्टन स्टीवन जेरार्ड का यह 100वां इंटरनेशनल मैच था. इंग्लिश मीडिया जोश में थी. हुंकार भरते हुए बहुत सारे इंग्लिश फैन्स स्वीडन पहुंच चुके थे. यह मैच हाल ही में बने फ्रेंड्स अरेना नाम के स्टेडियम में होना था.

मैच के 38वें मिनट तक सब वैसा ही हुआ जैसा सोचा गया था. डैनी वेलबेक और डेब्यू कर रहे कॉलकर के गोल्स से इंग्लैंड ने 2-1 की लीड ले रखी थी. साल 1965 से स्वीडन के खिलाफ स्वीडन के मैदान में एक भी मैच न जीती इंग्लिश टीम ने पहला हाफ 2-1 की लीड के साथ खत्म किया. फैंस का जोश सातवें आसमान पर था. इंग्लिश फैंस वैसे भी काफी उजड्ड होते हैं और जब टीम आगे चल रही हो तो जोश का चरम पर पहुंचना लाज़िमी था. तो माहौल गर्म था. सातवें आसमान पर बैठे इंग्लिश फैंस नारेबाजी कर रहे थे.

Zlatan Ibrahimovic Sweden S
Zlatan Ibrahimovic, फाइल फोटो शटरस्टॉक से साभार

उनके निशाने पर थे खुद को ख़ुदा कहने वाले ज़्लाटन इब्राहिमोविच. गालियों का शोर उठता तो स्टेडियम से निकलकर सिटी सेंटर तक जाता. ये कुछ ऐसा ही था कि फिरोज़शाह कोटला का शोर ITO को पार कर जाए. दूसरे हाफ के पहले आधे घंटे से ज्यादा वक्त तक शोर एक जैसा रहा. घरेलू फैंस सन्न थे और मैदान में खेल रहे स्वीडिश प्लेयर्स निराश. लेकिन आमतौर पर काफी जल्दी झल्ला जाने वाले इब्राहिमोविच उस पूरे वक्त तक खामोश थे. इब्राहिमोविच पिच पर ठीक वैसे जमे थे जैसे कोई शेर हमला करने के लिए सही वक्त का इंतजार कर रहा हो. इस बीच फैंस लगातार इब्राहिमोविच के लंबे बालों (चोटी) पर कमेंट्स कर रहे थे. उनकी तुलना एक अंग्रेज फुटबॉलर से कर उनका मजाक बना रहे थे

जल्दी ही इंतजार पूरा हुआ, चोटी वाले शेर ने पैरों से जमीन खुरची… खुद को दो कदम पीछे खींचा और जोर की दहाड़ लगाते हुए इंग्लिश टीम पर टूट पड़ा. मैच का 76वां मिनट. थोड़ी ही देर पहले मैदान पर आए थे अपना पहला मैच खेल रहे शॉक्रॉस. पिच के बीच से बॉल इब्राहिमोविच की तरफ उछाली गई. लगातार उन्हें मार्क (हर वक्त साथ रहकर फ्री मूवमेंट करने से रोकने की कोशिश) कर रहे शॉक्रॉस जब तक कुछ समझ पाते… इब्राहिमोविच उन्हें पार कर बॉल कलेक्ट कर चुके थे.

अब बॉल और गोल के बीच में थे सिर्फ इंग्लिश गोलकीपर जो हार्ट. डिफेंडर गैरी केहिल, इब्राहिमोविच की तरफ लपके और उसी वक्त सामने से आए जो हार्ट लेकिन इन्हें ये करने में लगभग एक पल लगा और तब तक इब्राहिमोविच का बूट अपना काम कर चुका था. बॉल गोली की रफ्तार से गोल में समा चुकी थी. अब स्कोर बराबर था.

अंग्रेज थोड़ा शांत हुए और आया मैच का 84वां मिनट. अब तक लोगों को लगा रहा था कि यह मैच 2-2 से बराबर छूटेगा. लेकिन शेर जब फुल मूड में हो तो शिकार की सोच से उसे कहां मतलब होता है. स्वीडन को फ्री-किक मिली. यह फ्री-किक गोल से काफी दूर थी, इतनी दूर कि कैमरे में बस हार्ट की जर्सी समझ आ रही थी… चेहरा क्या पूरा शरीर भी बमुश्किल ही नजर आ रहा था.

इब्राहिमोविच ने एक गहरी सांस भरी… कुछ वैसी जैसी अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘बुद्ध मुस्कुराए’ सुनकर भरी होगी. एक गहरी सांस जो किसी काम के पूरा होने पर सुकून में भरी जाती है. खुद पर इतना भरोसा करने वाले इस दुनिया में बेहद कम हैं, लेकिन इस बंदे ने तो पैदा होने के बाद से सबसे पहला काम ही यही किया था, खुद पर भरोसा.

इब्राहिमोविच ने फ्री-किक ली. आमतौर पर फ्री किक को हवा में उछालकर गोल में भेजने की कोशिश की जाती है. लेकिन यह नीची फ्री-किक थी. अब अंदाजा लगाने का काम आपका रहेगा कि इसमें उन्होंने कितनी ताकत भरी होगी कि इतनी दूर से नीचा शॉट होने के बाद भी बॉल गोल में चली गई.

अब स्कोर था 3-2 और मैच के निर्धारित 90 मिनट पूरे हो चुके थे. एक्स्ट्रा टाइम चल रहा था. इंग्लैंड ने अटैक किया. स्वीडिश डिफेंस ने मैदान के बाएं कोने से बॉल क्लियर की. और यह बॉल वापस इंग्लैंड के गोल की तरफ आई. हार्ट ने सोचा कि आगे भागकर इसे वापस भेज दूं. वह आगे आए और बॉल को अपने सिर से क्लियर किया. इधर इब्राहिमोविच बॉल पर नजर गड़ाए इंग्लिश गोल की तरफ भाग रहे थे. उन्होंने हार्ट की क्लियरेंस देखी तो तेजी से वापस पलट पड़े. बॉल अब इंग्लिश बॉक्स (गोल एरिया) के बाएं कोने की तरफ आ रही थी. और गोल की तरफ पीठ किए इब्राहिमोविच ऊपर की ओर देखकर भाग रहे थे. बॉल हवा में थी और इब्राहिमोविच की पीठ अब भी गोल की तरफ थी.

उसी पोजिशन में इब्राहिमोविच उछले, दोनों पैर हवा में. जैसे बचपन में हम गद्दे पर लेटकर साइकिल चलाते हैं ठीक उसी तरह. लेकिन फर्क ये था कि यहां इब्राहिमोविच का पूरा शरीर हवा में था. पूरा शरीर हवा में होने के बाद भी इब्रा की आंखें अब भी बॉल पर ही थीं. चमगादड़ की तरह शरीर हवा में उल्टा लटका था और इसी पोजिशन में उन्होंने अपना दायां पैर ऊपर की तरफ पूरा फैला दिया. इस हालत में उनके बूट का एकदम ऊपरी हिस्सा बॉल से टकराया… और क्या ही टकराया. कनेक्शन ऐसा हुआ जैसे जियो का टेलिकॉम से और अयोध्या का राम-नाम से.

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इंग्लैंड के खिलाफ गोल का जश्न मनाते इब्राहिमोविच, फाइल फोटो रॉयटर्स

6 फुट 5 इंच के इब्राहिमोविच के पैर ने जमीन से 8 फीट ऊपर बॉल को किक किया.  इस किक से जो ऊर्जा निकली उसने बॉल को हवा में ही वापस धकेला.  30 यार्ड की दूरी से हवा में पड़ी इस लात के बाद बॉल हवा में 25 फीट की ऊंचाई तक पहुंची और हार्ट तथा इंग्लैंड के बाकी बचे डिफेंडर्स को लांघती हुई गोल की तरफ बढ़ी. शॉक्रॉस उस वक्त गोल के बेहद करीब खड़े थे. बॉल आती देख वह पूरी ताकत से गोल की तरफ पलटे लेकिन वह पूरी कोशिश करने के बावजूद बॉल को रोक नहीं पाए. सिर्फ 1.9 सेकेंड्स में बॉल बिना टप्पा खाए गोल में जा चुकी थी.

मैच की कॉमेंट्री कर रहे पूर्व इंग्लिश फुटबॉलर स्टन कॉलिमोर के मुंह से निकला…

Ohh my god ! that is an insane goal I am just seeing, the most insane goal I have ever seen on a football pitch. Incredible, Incredible ZLATAN IBRAHIMOVIC.

इस मैच में ज़्लाटन ने स्वीडन की तरफ से चारों गोल्स स्कोर किए. जबकि सामने से इंग्लिश टीम बस 2 गोल ही कर पाई. इब्रा के इन चारों गोल्स में से यह एक गोल ऐसा निकला जिसने कैलेंडर में 14/15 नवंबर को खास बना दिया. FIFA द्वारा इस गोल को साल 2012 का बेस्ट गोल चुना गया. और उस दिन से लेकर आज तक और शायद आने वाली कई सदियों तक इस गोल की सालगिरह मनाई जाएगी. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि 2012 के बाद से कोई ऐसा साल नहीं गया जब पूरी दुनिया ने इस गोल को याद न किया हो.

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वह ऐतिहासिक गोल करते (दाएं) और इसके बाद FIFA द्वारा Puscas अवॉर्ड से सम्मानित हुए इब्राहिमोविच (फाइल फोटोज, रॉयटर्स)

 

ज़्लाटन अब 39 साल के हो चुके हैं. इसी हफ्ते उन्होंने अमेरिका की मेजर लीग सॉकर (MLS) से अलग होने की घोषणा की है. लेकिन वह अब भी रिटायर होने के मूड में नहीं हैं. उनका कहना है कि वह अभी यूरोप में और खेलना चाहते हैं. गज़ब ही होगा अगर वह यूरोप में वापस आएं और फिर से ऐसा ही कोई गोल कर जाएं जिसे सालों-साल याद रखा जाए.


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