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'परमाणु संपन्न' पाकिस्तान जाने पर एक भारतीय पत्रकार के साथ ऐसा सलूक हुआ था

11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में तीन बमों के सफल परीक्षण के साथ भारत न्यूक्लियर स्टेट बन गया. ये देश के लिए गर्व का पल था. इसके 20 साल बाद 25 मई 2018 को पोखरण की कहानी बयां करने वाली हिंदी फिल्म 'परमाणु: दि स्टोरी ऑफ पोखरण' रिलीज़ हुई. इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं भारत के परमाणु परीक्षण से जुड़े कुछ छोटे-बड़े किस्से. पेश है इसका एक हिस्सा, जो बताता है कि पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण के बाद वहां जाने वाली एक भारतीय पत्रकार के साथ कैसा सलूक हुआ.

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पाकिस्तान के बलूचिस्तान में चगाई पहाड़ियां देश के सबसे पिछड़े इलाकों में गिनी जाती हैं. 11 मई 1998 को जब भारत ने पोखरण में तीन परमाणु विस्फोट किए, तो उसके बाद से सुनसान रहने वाली ये पहाड़ियां तीव्र गतिविधियों का केंद्र बन गईं. महज़ 17 दिनों बाद 28 मई को पाकिस्तान ने इन्हीं पहाड़ियों में पांच परमाणु विस्फोट करके ‘भारत की बराबरी कर ली’. चूंकि उसे भारत से आगे भी निकलना था, तो 30 मई को उसने एक और परीक्षण कर डाला.

पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण की एक तस्वीर
पाकिस्तान के परमाणु परीक्षण की एक तस्वीर

परमाणु बम के जनक रॉबर्ट ओपनहीमर ने जब पहला परमाणु परीक्षण किया था, तब उन्होंने कहा था, ‘अब दुनिया पहले जैसी नहीं रह जाएगी.’ रॉबर्ट सही थे. परमाणु परीक्षण करने के बाद भारत और पाकिस्तान भी पहले जैसे नहीं रह गए.

पत्रकार हरिंदर बवेजा ‘परमाणु संपन्न’ पाकिस्तान का दौरा करके जब भारत लौटीं, तो उन्होंने इंडिया टुडे के लिए एक लेख लिखा था, जिसका शीर्षक था ‘एक बार और बंटवारा’. इस लेख में हरिंदर ने बताया कि एक वक्त था जब इस्लामाबाद पहुंचने पर उनकी खासी आवभगत की जाती थी, लेकिन परमाणु परीक्षणों के बाद पाकिस्तान जाकर उन्होंने कुछ और ही महसूस किया.

हरिंदर बताती हैं कि पाकिस्तान के परीक्षण के बाद उनसे पाकिस्तान में ‘आप किस मज़हब की हैं’, ‘आप हिंदू हैं या मुसलमान’ जैसे सवाल पूछे गए. कई बार बहसों से बचने के लिए उन्हें अपने धर्म का इस्तेमाल करना पड़ा. उन्हें बताना पड़ा कि वो सिख हैं, जबकि पहले सिर्फ ‘भारतीय’ कह देने से काम चल जाता था. एयरपोर्ट पर उनका पासपोर्ट देखकर एक अधिकारी ने उनसे कहा, ‘सो, अब हम बराबर हो गए हैं. हमने आप लोगों को माकूल जवाब दिया.’ पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के एक कर्मचारी ने कहा, ‘सो, आखिरकार आपको कश्मीर छोड़ना ही पड़ेगा.’

हरिंदर बवेजा
हरिंदर बवेजा

ये तो फिर भी किसी एक शख्स के साथ हुए बर्ताव की बानगी है. परमाणु परीक्षण पर भारत-पाक के रिएक्शंस दोनों मुल्कों की तासीर बताते हैं. भारत में परीक्षण के बाद प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बहुत ही कम शब्दों में खबर दी थी. उधर पाकिस्तान में परीक्षण के कुछ घंटों बाद प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने नेशनल टीवी पर उर्दू में बेहद भावुक तकरीर में देशभर के सामने इस परीक्षण का औचित्य रखा. उन्होंने बताया कि सीधे ‘अल्लाह से हुक्म मिलने पर’ ही उन्होंने वैज्ञानिकों को परीक्षण की इजाज़त दी. भारत में जश्न मना रहे लोगों ने पटाखे छुड़ाए, वहीं पाकिस्तान में सरेआम गोलियां दागी गईं.

पाकिस्तान के परमाणु संपन्न राष्ट्र बनने पर मनाया जा रहा जश्न
पाकिस्तान के परमाणु संपन्न राष्ट्र बनने पर मनाया जा रहा जश्न

हरिंदर एक और किस्सा बताती हैं. खाने के जिस काउंटर पर बैरा हमेशा उनसे कहता था, ‘आपके पास पाकिस्तानी रुपया नहीं है, तो क्या हुआ! आप पंजाबी बोलती हैं, चाय तो हम पिलाएंगे.’ जबकि इस बार उसने कहा, ‘ठीक है, आप मुझे हिंदुस्तानी रुपए ही दे दीजिए.’ एक टैक्सी ड्राइवर ने उन्हें बड़ी खुश-मिजाज़ी से बताया कि परीक्षण के बाद कैसे भारतीय झंडे जलाए गए थे. वो बोला, ‘1947 फिर से लौट आया हो जैसे.’

उस दौरे पर हरिंदर को खुशगवार मौके बहुत कम मिले. हर किसी की बात में ताने का पुट था. कोई कहता, ‘आप लोगों ने ही शुरू किया है ये सब, आप लोग हमलावर हैं.’ तो कोई बीच में पूछ लेता, ‘क्या ये सच नहीं है कि भारत दादागीरी का इरादा रखता है. क्या ये सच नहीं है कि भारत आज़ाद कश्मीर में घुसने के मंसूबे बना रहा है.’ फर्क बस लोगों की सोच में था. कोई तल्खी से बातें कहता था, तो कोई नरमी से कहता था.

पाकिस्तान की परमाणु सफलता पर दुआ मांगते बच्चे
पाकिस्तान की परमाणु सफलता पर दुआ मांगते बच्चे

भारत और पाकिस्तान के परमाणु परीक्षणों को 20 साल बीत चुके हैं. भारत में इस अध्याय पर फिल्म भी बन गई है. कश्मीर, बलूचिस्तान, मुंबई हमला, सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दे रह-रहकर दोनों तरफ के लोगों की नस दबाते रहते हैं. नेताओं की भूमिका बरसों से संदेहास्पद रही है, जिसके दशकों तक ऐसा ही रहने की आशंका है. ऐसे में समझना लोगों को ही होगा.


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