Submit your post

Follow Us

'ब्लैकक्लांसमैन': एक फिल्म को देखकर अश्वेतों की हत्याएं की जाने लगीं, फिर क्यों आज भी महान मानी जाती है?

डायरेक्टर स्पाइक ली की BlacKkKlansman.

” हमारा जीने का एक बहुत महान तरीका था. उस मक्कार मार्टिन लूथर और उसकी कम्युनिस्टों की आर्मी ने हमारे पवित्र वाइट प्रोटेस्टेंट मूल्यों पर अपना सिविल राइट्स वाला हमला शुरू किया उससे पहले. क्या आप सब वाकई चाहते हो कि हमारे अनमोल वाइट बच्चे उन नीग्रोज़ के साथ स्कूल जाएं? वो लोग झूठे, गंदे बंदर हैं. वाइट आदमी के साथ समानता हासिल करने के लिए कुछ भी करने को तैयार. रेपिस्ट और हत्यारे. वाइट स्त्रियों की वर्जिन, पवित्र देह के भूखे. वो लोग बहुत बड़े शिकारी हैं. और इन नीग्रो लोगों की धोखे भरी चालों को ऊंचे पदों पर बैठे ख़ून चूसने वाले यहूदियों का संरक्षण है. जो उत्तरी काले राक्षसी आंदोलकारियों की बाहरी सेना का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि परमेश्वर की आज्ञा अनुसार और बाइबल से प्रेरित वाइट/श्वेत नस्ल के शासन को खत्म किया जा सके. ये एक अंतर्राष्ट्रीय यहूदी साजिश है. परमेश्वर हम सब का भला करे. “

– डॉ. कैनेब्रू ब्योरगार्ड, एक वाइट सुप्रीमेसिस्ट आदमी जो फिल्म के शुरू में आकर अश्वेतों और गैर-वाइट नस्लों के लिए ज़हर उलगता है.

2014 के उस वीडियो के बारे में सोचते हुए आज भी सिहरन होती है जिसमें एरिक गार्नर नाम का 43 साल के सीधे-साधे, भारी-भरकम अश्वेत आदमी को न्यू यॉर्क सिटी के पांच वाइट पुलिसवालों ने दबोच रखा है और एक पीछे से चढ़कर उसकी गर्दन में प्रतिबंधित चोकहोल्ड/हाथों का फंदा लगा देता है. फिर सब पुलिसवाले उसके ऊपर बैठ जाते हैं. छह बच्चों का पिता एरिक गिड़गिड़ाता है. वो 11 बार.. शरीर में बची सांस बटोरकर कहता है – I can’t breathe / मैं सांस नहीं ले पा रहा. लेकिन वो पुलिसवाला फंदा ढीला नहीं करता और एरिक की सांसें रुक जाती है. आक्रोशित और दुखी करने वाली इस घटना को हम 25 साल पहले ही एक फिल्म में देख चुके थे.

वो फिल्म थी ‘डू द राइट थिंग’ (1989) और इसे बनाया था राइटर-डायरेक्टर स्पाइक ली ने. इस फिल्म में एरिक जैसा ही एक भारी-भरकम ब्लैक पात्र रेडियो रहीम होता है जिसे वाइट पुलिसवाले चोकहोल्ड लगाकर बीच सड़क मार देते हैं, जिसके बाद अश्वेत समुदाय का आक्रोश फूट पड़ता है.

blackkklansman oscar win review spike lee 2

स्पाइक का पूरा करियर अफ्रीकी-अमेरिकी लोगों के ताकतवर, विशिष्ट और बुद्धिमान चित्रण को समर्पित रहा है. वे कभी भी वाइट हीरोज को लेकर ब्लॉकबस्टर हॉलीवुड फिल्में बनाने के फेर में नहीं पड़े. वे फिल्म के अंदर, और फिल्म के बाहर असल जिदंगी में ब्लैक लोगों की समानता की लड़ाई का हिस्सा रहे हैं, और एक मुखर आवाज हैं. ऐसे में जब 2018 की दूसरी छमाही में उनकी नई पेशकश विदेशी फिल्म महोत्सवों में जाने लगी तो, उनके सिनेमा को फॉलो करने वाले लोगों और फिल्म कम्युनिटी में सामान्य तौर पर एक कौतुहल था. उनसे जैसी उम्मीद थी उन्होंने वैसे ही आपूर्ति भी की. उन्होंने अपनी इस फिल्म का नाम रखा – “ब्लैकक्लांसमैन” और इसकी थीम ये थी कि एक अश्वेत पुलिसकर्मी होता है जो 70 के दशक में वाइट लोगों की सर्वोच्चता की स्थापना के लिए अश्वेत व दूसरी सब नस्लों के खिलाफ हिंसक लड़ाई लड़ने वाले समूह कू क्लक्स क्लान की एक राज्य इकाई में नकली पहचान बनाकर घुसपैठ करता है और जानकारियां इकट्ठी करता है.

असल में रॉन स्टॉलवर्थ नाम का एक ब्लैक पुलिस अधिकारी था जिसने 1979 में कोलोराडो में कू क्लक्स क्लान की गतिविधियों में सेंध मारी थी. ये फिल्म कुछ तब्दीलियों के साथ इसी कहानी पर बनी है. रॉन कोलोराडो पुलिस विभाग में नियुक्त होने वाले पहले ब्लैक आदमी थे. उनका रोल फिल्म में जॉन डेविड वॉशिंगटन ने निभाया है. वे जाने-माने अभिनेता डेंजल वॉशिंगटन के बेटे हैं जिनको लीड रोल में लेकर स्पाइक ‘मैल्कम एक्स’ (1992) और ‘इनसाइड मैन’ (2006) जैसी देखने लायक फिल्में बना चुके हैं.

‘ब्लैकक्लांसमैन’ एक कठोर और ख़ूनी हकीकत पर बनी फनी फिल्म है. बनाते हुए एक मकसद ही ये था कि इसमें वाइट सुप्रीमेसी जैसी मूर्खतापूर्ण अवधारणा के पीछे अपनी और अपनी आने वाली पीढ़ियों का मन दूषित करने वाले पुरुषों-स्त्रियों को मूर्खों की तरह ही दिखाया जाए. ब्लैक लोगों को लेकर जो स्टीरियोटाइप रहे हैं, उन्हें भी स्क्रिप्ट में यूं रखा गया है कि जगह-जगह हंसी आती है. इस फिल्म के हीरो ब्लैक लोग हैं. वे कहानी में मौजूद वाइट लोगों से ज्यादा बुद्धिमान, गंभीर और मैच्योर हैं. अपनी फिल्मों में ब्लैक पात्रों को इस बोल्ड ब्रश के साथ चलाना स्पाइक की स्टोरीटेलिंग की एक खास पहचान है. इस नई फिल्म के साथ विशेष ये भी रहा कि इसे प्रोड्यूस करने वालों में एक नाम जॉर्डन पील का भी है जिन्होंने पिछले ऑस्कर सीजन की आक्रामक, विषैली फिल्म ‘गेट आउट’ डायरेक्ट की थी जिसमें वाइट लोगों को पागल, हत्यारों की तरह दिखाया गया था जिसके कई अमूर्त निहितार्थ भी थे जो वास्तिक जीवन की सामाजिक-राजनीतिक हकीकत के संदर्भ में ही समझे जा सकते हैं. पहले जॉर्डन पील ही ‘ब्लैकक्लांसमैन’ डायरेक्ट करने वाले थे लेकिन ‘गेट आउट’ बनाने में बिजी होने के कारण उन्होंने स्पाइक ली से बात की और वे इसे डायरेक्ट करने को मान गए.

केकेके की शाखा में घुसपैठ करने के मिशन में रॉन (जॉन डेविड वॉशिंगटन) का साथ ऑफिसर फ्लिप (एडम ड्राइवर) भी देता है जो यहूदी/jew है, वो नस्ल जो अफ्रीकियों की तरह वाइट सुप्रीमेसिस्टों के निशाने पर रही है. (फोटोः फोकस पिक्चर्स)
केकेके की शाखा में घुसपैठ करने के मिशन में रॉन (जॉन डेविड वॉशिंगटन) का साथ ऑफिसर फ्लिप (एडम ड्राइवर) भी देता है जो यहूदी/jew है, वो नस्ल जो अफ्रीकियों की तरह वाइट सुप्रीमेसिस्टों के निशाने पर रही है. (फोटोः फोकस पिक्चर्स)

फिल्म के शुरू में जब वाइट सुप्रीमेसिस्ट डॉ. कैनेब्रू ब्योरगार्ड दूसरी नस्लों के बारे में जहरीली सोच दिखा रहे होते हैं तब उनके चेहरे पर दो फिल्मों की रील प्रतिबिंबित होती हैं – 1915 में आई डायरेक्टर डब्ल्यू. डी. ग्रिफिथ की ‘द बर्थ ऑफ अ नेशन’ और 1940 में दस ऑस्कर अवॉर्ड जीतने वाली ‘गॉन विद द विंड.’ हमारे सिनेमा इतिहास के लिहाज से दोनों ही महान फिल्में हैं. ग्रिफिथ को तो सिनेमा की दुनिया का पितामह कहा जाता है. महान से महान फिल्मकारों ने उन्हें अपनी प्रेरणा माना है. उनकी ये फिल्म टेक्नीक और स्टोरीटेलिंग के सिनेमाई मुहावरे गढ़ने के मामले में पहली थी. इसने वैसी सिनेमाई भाषा सिखाई जो बाद में दुनिया भर के सिनेमा में ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाने में इस्तेमाल की गई. लेकिन दिक्कत ये है कि ये दोनों ही फिल्में ब्लैक लोगों का चित्रण बहुत बुरा करती हैं. खासकर ग्रिफिथ की फिल्म.

उनकी फिल्म में कू क्लक्स क्लान के हत्यारे सदस्यों को हीरोज़ की तरह पेश किया गया. इसमें ब्लैक लोगों को जानवर, वहशी, स्त्रियों के प्रति आक्रामक होने वाली प्रजाति की तरह चित्रित किया गया. यही कारण था कि वाइट अमेरिका में इस फिल्म ने भयंकर कमाई की. खूब चली. हालांकि उस विपरीत दौर में भी कुछ साहसी जर्नलिस्ट, आलोचक थे जिन्होंने फिल्म में अश्वेतों के इस चित्रण की निंदा की.

विश्व सिनेमा की महान फिल्मों में शुमार ग्रिफिथ की 'द बर्थ ऑफ अ नेशन' में एक अश्वेत को लिंच करके कू क्लक्स क्लान के लोग.
विश्व सिनेमा की महान फिल्मों में शुमार ग्रिफिथ की ‘द बर्थ ऑफ अ नेशन’ में एक अश्वेत को लिंच करते कू क्लक्स क्लान के लोग.

‘अ बर्थ ऑफ अ नेशन’ बहुत ही खतरनाक फिल्म थी. इतनी खतरनाक कि जो कू क्लक्स क्लान 1915 में आते-आते मंद पड़ चुका था वो नए सिरे से फिर जिंदा हो गया. इस फिल्म को देखने के बाद अमेरिका में ब्लैक लोगों के प्रति जगह-जगह हिंसा होने लगी. स्पाइक की फिल्म में एक सीन है जिसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति बैठे हैं और कोलोराडो कॉलेज के अश्वेत छात्र संघ के युवाओं को 1916 में की गई जेसी वॉशिंगटन की सरेआम लिंचिंग की अति-बर्बर, विचलित करने वाली घटना बता रहे हैं –

“वो बसंत ऋतु का अच्छा सा दिन था. टैक्सस का वैको क्षेत्र. 15 मई, 1916. जेसी वॉशिंगटन मेरा दोस्त था. वो 17 बरस का था. मैं 18 का. हम जेसी को ‘धीमा’ कहकर पुकारते थे. आज आप उसे मंदबुद्धि/mentally retarded कहोगे. उन लोगों (वाइट लोगों की हत्यारी भीड़) का दावा था कि जेसी ने एक वाइट महिला का रेप और मर्डर किया. उस महिला का नाम था लूसी फ्रायर. जेसी की ट्रायल चालू हुई. ज्यूरी में सब वाइट लोग थे. उन्होंने उसे दोषी करार दिया, सिर्फ 4 मिनट विचार-मनन करने के बाद. मैं सड़क के पार जूते पॉलिश करने वाले पार्लर में काम कर रहा था. अदालत का फैसला आने के बाद एक भीड़ ने जेसी को पकड़ लिया. उसके गले में सांकळ (चेन) बांधी. उसे कोर्ट से बाहर घसीटकर ले गए. मुझे पता था कि मुझे कहीं छुपना होगा. पार्लर की अटारी में एक खिड़की थी जिसमें से मैं भीड़ को देख रहा था. उन्होंने गलियों में जेसी का जुलूस निकाला. उसे चाकू मारे, पीटा. वो ख़ून के ढेर में तब्दील हो गया था. उन्होंने उसे नीचे गिरा दिया, और.. उसके अंडकोष काट दिए. पुलिस और सिटी के अधिकारी लोग वहीं थे. उसे देख रहे थे. उन लोगों ने उसकी अंगुलियां काट दीं. उसके पूरे शरीर पर कोयले (कैरोसीन) का तेल छिड़क दिया. एक आग जलाई गई. इसकी लपटों में वो जेसी को नीचे और ऊपर करते रहे. एक बार, दो बार, बार-बार, बार-बार. फ्रेड गिल्डरस्लीव नाम का एक फोटोग्राफर था, वो आया और उसने इस पूरी घटना की फोटो खींची. इन फोटोज़ को बाद में पोस्टकार्ड्स के रूप में बेचा गया. उन्होंने जेसी के जले हुए शरीर को एक बैग में डाला. शहर में से उसे घसीटते हुए ले गए. उन लोगों ने उसके शरीर के हिस्सों को यादगार निशानी के तौर पर बेचा. बहुत से भले वाइट लोग वहां ऐसे खड़े रहे जैसे 4 जुलाई की परेड में खड़े हों. यहां तक कि उन्होंने अपने बच्चों की भी लंच आवर में छुट्टी करवा ली. मैं देखने के सिवा कुछ नहीं कर पा रहा था और प्रार्थना कर रहा था कि वो लोग मुझे न देख लें.”

जेसी वॉशिंगटन का शव. 15 हजार लोगों की भीड़ ये देखने आई थी. लिंचिंग के दौरान लोग सेलिब्रेट कर रहे थे. बाद में इस शव को टेलीफोन की ओर पोल पर टांगा गया ताकि अश्वेत लोग देखें कि उनका अंजाम क्या होगा. इस हत्या के जो पोस्टकार्ड बेचे गए उनमें से एक को एक वाइट आदमी ने अपने पेरेंट्स को भेजा और उसके पीछे लिखा - "कल हमने ये बार्बेक्यू (मांस या कच्चे भोजन को आग पर पकाना) किया था. मैं बाईं ओर खड़ा हूं क्रॉस पहने हुए. आपका बेटा - जो."
जेसी वॉशिंगटन का शव. 15 हजार लोगों की भीड़ ये देखने आई थी. लिंचिंग के दौरान लोग सेलिब्रेट कर रहे थे. बाद में इस शव को टेलीफोन की एक पोल पर टांगा गया ताकि अश्वेत लोग देखें कि उनका अंजाम क्या होगा. इस हत्या के जो पोस्टकार्ड बेचे गए उनमें से एक को एक वाइट आदमी ने अपने पेरेंट्स को भेजा और उसके पीछे लिखा – “कल हमने ये बार्बेक्यू (मांस या कच्चे भोजन को आग पर पकाना) किया था. मैं बाईं ओर खड़ा हूं क्रॉस पहने हुए. आपका बेटा – जो.”

वे बुजुर्ग आगे कहते हैं – “उन्होंने जेसी के साथ जो किया उसकी एक वजह थी – ‘बर्थ ऑफ अ नेशन’ नाम की मूवी जो एक साल पहले आई थी. वो इतनी पावरफुल थी कि उसने कू क्लक्स क्लान को पुनर्जन्म दे दिया. आज हम उस तरह की फिल्म को ब्लॉकबस्टर कहकर पुकारते हैं. हर किसी ने वो फिल्म देखी. यहां तक कि अमेरिका के राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने इसे वाइट हाउस में प्रदर्शित किया. कहा – ये सफेद बिजली के साथ लिखा गया इतिहास है.”

इसके बाद ग्रिफिथ की फिल्म के वो सीन दिखाए जाते हैं जहां एक ब्लैक आदमी की वैसे ही ट्रायल और हत्या होती है जैसी एक साल बाद जेसी वॉशिंगटन की.

‘ब्लैकक्लांसमैन’ 2018-19 में भी पूरी तरह रेलेवेंट है. क्योंकि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद वो कट्टर वाइट सुप्रीमेसिस्ट और कू क्लक्स क्लान के लोग खुलकर सामने आ गए हैं जो पहले समाज में खारिज थे. स्पाइक इस फिल्म के अंत में 2017 में हुए शार्लोट्जविल के हमले की फुटेज बताते हैं जिसमें कट्टरपंथी राइट-विंग की रैली का शांतिपूर्ण विरोध कर रहे लोगों की भीड़ पर एक युवक ने कार चढ़ा दी थी. इसमें एक युवती हेदर की मौत हो गई. रैली में वाइट लोग हिटलर के नाज़ी झंडे लहराकर चल रहे थे, कू क्लक्स क्लान के लोग भी थे. यहूदियों और दूसरी नस्लों के खिलाफ नारे लगाए जा रहे थे. उन्होंने विरोध में रैली कर रहे लोगों को मारा-पीटा, औरतों को भी. इस फिल्म ने सिर्फ अमेरिका की समस्या को ही संबोधित नहीं किया है बल्कि पूरी दुनिया को भी. भारत को भी. क्योंकि अब वो समय है जब देश का संविधान लिखने वाले की मूर्तियों को तोड़ा जा रहा है, मूर्तियों की रक्षा के लिए जालियां लगाई जा रही हैं. ये वो समय है जब देश का पिता जिसे कहा जाता है, जिसने पूरी दुनिया के कमजोर लोगों को अपने अधिकारों के लिए अहिंसक होकर लड़ने की प्रेरणा दी, उसके पुतले पर चार गोलियां कुछ लोग दागकर वीडियो बनाते हैं और पीछे लगी थैली में से निकलकर जब ख़ून बहता है तो वो कहते हैं – “इसका तो खून भी काला निकला है… गंदा खून था इसका.”

ऑस्कर 2019 में ‘ब्लैकक्लांसमैन’:
छह नामांकन मिले.

बेस्ट पिक्चर – शॉन मैककिट्रिक, जेसन ब्लम, रेमंड मैन्सफील्ड, जॉर्डन पील और स्पाइक ली
बेस्ट डायरेक्टर – स्पाइक ली
बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर – एडम ड्राइवर
एडेप्टेड स्क्रीनप्ले – चार्ली वाचटेल और डेविड रेबिनोविट्ज़, कैविन विलमॉट और स्पाइक ली (जीते)
ओरिजिनल स्कोर – टैरेंस ब्लैंचर्ड
फिल्म एडिटिंग – बैरी एलेग्जेंडर ब्राउन


Story first published on Feb 26, 2019

सीरीज़ की अन्य फिल्मों के बारे में पढ़ें:
Green Book – ऑस्कर 2019 की सबसे मनोरंजक और पॉजिटिव कर देने वाली फिल्म
Roma – ये सिंपल सी आर्ट फिल्म क्यों 2018-19 के अवॉर्ड सीज़न में हर जगह जीतती चली गई?
The Favourite – क्या होता है जब एक रानी के 17 बच्चे मारे जाते हैं!
A Star Is Born – इसे देखकर एक सुपरहिट हिंदी फिल्म याद आती है
Bohemian Rhapsody – उस रॉकस्टार की कहानी जो एड्स से मरा और लोग रात भर रोए
Black Panther – बच्चों के सुपरहीरो पर बनी ये फिल्म कट्टर आलोचकों को भी क्यों पसंद आई?
Vice – एक ख़ौफनाक पोलिटिकल फिल्म जो हर वोटर को देखनी चाहिए 

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

10 साल पहले भी शाहरुख़ का समीर वानखेड़े से सामना हुआ था, समीर ने ठोका था तगड़ा जुर्माना

जगह थी मुंबई एयरपोर्ट. अब दस साल बाद फिर से दोनों का नाम एक साथ सुर्ख़ियों में है.

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

'स्क्विड गेम' के प्लेयर नंबर 199 'अली' की कहानी, जिनके इंडियन होने ने सीरीज़ में एक्स्ट्रा मज़ा दिया

अली का रोल करने वाले इंडियन एक्टर अनुपम त्रिपाठी का सलमान-शाहरुख़ कनेक्शन क्या है?

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

IPL का कित्ता ज्ञान है, ये क़्विज़ खेलकर चेक कल्लो!

ईमानदारी से स्कोर भी बताते जाना. हम इंतज़ार करेंगे.

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

'मनी हाइस्ट' वाले प्रोफेसर की पूरी कहानी, जिनकी पत्नी ने कहा था, 'कभी फेमस नहीं हो पाओगे'

अलवारो मोर्टे ने वेटर तक का काम किया हुआ है. और एक वक्त तो ऐसा था कि बकौल उनके कैंसर से जान जाने वाली थी.

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

एक्टर शरत सक्सेना की कहानी, जिन्होंने 71 साल की उम्र में ज़बरदस्त बॉडी बनाकर सबको चौंका दिया

हीरो बनने आए शरत सक्सेना कैसे गुंडे का चमचा बनने पर मजबूर हुए?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

'भीगे होंठ तेरे' वाले कुणाल गांजावाला आजकल कहाँ हैं?

एक वक़्त इंडस्ट्री में टॉप पर थे कुणाल और उनके गाने पार्टियों की जान हुआ करते थे.

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

राज कुंद्रा की पूरी कहानी, 18 की उम्र में शॉल बेचने से शुरुआत करने वाले राज यहां तक कैसे पहुंचे?

IPL स्कैंडल, मॉडल्स के आरोप, अंडरवर्ल्ड कनेक्शंस के आरोप, एक्स वाइफ के इल्ज़ाम सब हैं इस कहानी में.

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रैनसन: जिन्होंने पहले अंतरिक्ष के दर्शन करके जेफ बेजोस का मजा खराब कर दिया

रिचर्ड ब्रेन्सन की कहानी, जहां भी गए तहलका मचा दिया.

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

'सिंघम' IPS से तमिलनाडु BJP के सबसे युवा अध्यक्ष बने अन्नामलाई की कहानी

पहला चुनाव हार गए थे, बीजेपी ने राज्य की जिम्मेदारी सौंपी है.

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

'तड़प-तड़प के' जैसा प्रेमियों का ब्रेकअप एंथम देने वाले सिंगर के के आजकल कहां हैं?

उनके गाए 'पल' गाने के बगैर आज भी किसी कॉलेज का फेयरवेल पूरा नहीं होता.