Submit your post

Follow Us

2020 में सुप्रीम कोर्ट के ये बड़े फैसले आपको टीवी और स्मार्टफ़ोन से चिपका देंगे

कहते-कहते नया साल आ ही गया. 2020. 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मसले पर निर्णय समेत और भी खबरें बटोरने वाले निर्णय दिए. सवाल ये कि सुप्रीम कोर्ट के पेटे में 2020 के लिए क्या है? सुप्रीम कोर्ट कौन से बड़े निर्णय देने वाला है? या कौन-से बड़े केस सुप्रीम कोर्ट में सुने जाने वाले हैं?

अनुच्छेद 370 का निष्प्रभावी होना और जम्मू-कश्मीर का विभाजन

जम्मू-कश्मीर से संबंधित आर्टिकल 370 में संशोधन के बाद राज्य के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया, और राज्य में सेना और फोन-इन्टरनेट पर पाबंदी लगी.
जम्मू-कश्मीर से संबंधित आर्टिकल 370 में संशोधन के बाद राज्य के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया, और राज्य में सेना और फोन-इन्टरनेट पर पाबंदी लगी.

2019 में केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति के विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए जम्मू-कश्मीर में लागू आर्टिकल 370 को निष्प्रभावी कर दिया. साथ ही पार्लियामेंट में जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन का बिल पास हुआ. दो केन्द्रशासित प्रदेश सामने आये. जम्मू-कश्मीर और लद्दाख. ये कदम सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट में कई सारी याचिकाएं दायर की गयीं. कहा जा रहा है कि जनवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संवैधानिक बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी, और आगे आने वाले समय पर याचिकाओं पर अपना निर्णय सामने रखेगी.

नागरिकता संशोधन क़ानून यानी CAA

यूपी में CAA के खिलाफ प्रदर्शन की तस्वीर. (PTI)
यूपी में CAA के खिलाफ प्रदर्शन की तस्वीर. (PTI)

दिसंबर 2019 के शुरुआती दिनों मे संसद ने नागरिकता संशोधन क़ानून पास कर दिया. इसके बाद देश के लगभग हर हिस्से से प्रदर्शन और विरोध की खबरें आ रही हैं. कहा जा रहा है कि ये क़ानून लाकर सरकार ने संविधान का उल्लंघन किया है, जो समानता का अधिकार देता है. इस क़ानून के विरोध में कई सारी पार्टियां तो खड़ी ही हैं, AIMIM, IUML, DMK  और RJD समेत कई संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है. खबर है कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच इस मसले की सुनवाई इस नए साल में करेगी.

चुनावी चंदे के लिए इलेक्टोरल बांड 

Electoral Bond The Hindu
चुनावी बांड (साभार दी हिन्दू)

राजनीतिक पार्टियों को चन्दा देने के लिए इलेक्टोरल बांड यानी चुनावी बांड आये थे. इसे फाइनेंस एक्ट 2017 के तहत 2018 में लाया गया था. इस बांड से राजनीतिक पार्टियां बिना किसी रोकटोक के देशी और विदेशी कंपनियों से जितना मन हो उतना चन्दा ले सकती हैं. और इस बांड के बारे में कहा जा रहा है कि सरकार के अलावा और किसी को भी इस बात की जानकारी नहीं हो सकेगी कि किस पार्टी को कहां से कितना चन्दा मिला? और भाजपा सरकार का कहना है कि इससे चुनावी चंदे और पारदर्शी होंगे. कहा गया कि केंद्र सरकार ने आरबीआई की आपत्तियों को दरकिनार करते हुए सरकारी बैंकों से इलेक्टोरल बांड जारी करवाए. विपक्षियों ने भी आरोप लगाए कि सरकार चंदे की पूरी व्यवस्था को और अपारदर्शी बना रही है. इस मामले में Association for Democratic Reforms ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण की मदद से इस मामले में याचिका दायर की सुप्रीम कोर्ट में. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शरद अरविन्द बोबड़े ने इस याचिका की सुनवाई के लिए जनवरी 2020 का महीना मुक़र्रर किया है.

सबरीमाला रिव्यू

Sabarimala
सबरीमाला मंदिर.

13 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने 3:2 के अंतर से अपने ही 2018 के फैसले को सात सदस्यीय बेंच की ओर रवाना कर दिया. कैसा फैसला? सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुडी याचिका पर फैसला. कोर्ट ने 2018 में निर्णय दिया था कि केरल में भगवान् अयप्पा के सबरीमाला मंदिर में महिलाएं प्रवेश कर सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का पालन तो नहीं ही हो पाया, फैसले के पुनर्विचार के लिए कई संस्थाओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने मामला सात सदस्यीय बेंच को भेज दिया.

तीन तलाक

ऐसे बहुत से केसेस रहें जहां पति ने पत्नी को बिना मिले ही तलाक़ दे डाला. सांकेतिक फोटो.
ऐसे बहुत से केसेस रहें जहां पति ने पत्नी को बिना मिले ही तलाक़ दे डाला. सांकेतिक फोटो.

2019 में केंद्र सरकार ने एक बिल सदन में पेश किया. ट्रिपल तलाक के खात्मे का बिल. बिल तो पास हो गया, लेकिन इसमें तीन बार तलाक बोलकर देने को कानूनी अपराध घोषित कर दिया गया. और ये भी कि इस अपराध में आरोपी की बिना वारंट गिरफ्तारी की जा सकेगी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अगस्त 2019 में याचिका दायर की गयी. याचिका ये कि जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के निर्मय में तलाक देने की प्रथा को निष्प्रभावी घोषित कर दिया, तो केंद्र सरकार किसी निष्प्रभावी चीज़ को कैसे अपराध की श्रेणी में डाल सकती है. आउटलुक की मानें तो ऐसा सुप्रीम कोर्ट के वकील सलमान खुर्शीद ने कोर्ट में कहा भी था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा था. दिसंबर 2019 में तय हुआ कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई जनवरी 2020 में करेगा.


लल्लनटॉप वीडियो : CAA Protest: मेरठ SP का वीडियो वायरल, UP पुलिस ने लोगों को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

संविधान के कितने बड़े जानकार हैं आप?

ये क्विज़ जीत लिया तो आप जीनियस हुए.

क्रिकेट के पक्के वाले फैन हो तो इस क्विज़ को जीतकर बताओ

कित्ता नंबर मिला, सच-सच बताना.

सलमान खान के फैन, इधर आओ क्विज खेल के बताओ

क्विज में सही जवाब देने वाले के लिए एक खास इनाम है.

QUIZ: देश के सबसे महान स्पोर्टसमैन को कितना जानते हैं आप?

आज इस जादूगर की बरसी है.

चाचा शरद पवार ने ये बातें समझी होती तो शायद भतीजे अजित पवार धोखा नहीं देते

शुरुआत 2004 से हुई थी, 2019 आते-आते बात यहां तक पहुंच गई.

रिव्यू पिटीशन क्या होता है? कौन, क्यों, कब दाखिल कर सकता है?

अयोध्या पर फैसले के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड रिव्यू पिटीशन दायर करने जा रहा है.

इन नौ सवालों का जवाब दे दिया, तब मानेंगे आप ऐश्वर्या के सच्चे फैन हैं

कुछ ऐसी बातें, जो शायद आप नहीं जानते होंगे.

अमिताभ बच्चन तो ठीक हैं, दादा साहेब फाल्के के बारे में कितना जानते हो?

खुद पर है विश्वास तो आ जाओ मैदान में.

‘ताई तो कहती है, ऐसी लंबी-लंबी अंगुलियां चुडै़ल की होती हैं’

एक कहानी रोज़ में आज पढ़िए शिवानी की चन्नी.

मोदी जी का बड्डे मना लिया? अब क्विज़ खेलकर देखो कितना जानते हो उनको

मितरों! अच्छे नंबर चइये कि नइ चइये?