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लॉकडाउन में फैक्ट्रियों का काम ठप, फिर भी देना पड़ रहा करोड़ों रुपए का बिजली का बिल

लॉकडाउन का तीसरा चरण 4 मई से चल रहा है. सरकार ने देश को रेड ज़ोन, ऑरेन्ज ज़ोन और ग्रीन ज़ोन में बांटा है. अलग-अलग ज़ोन में कई गतिविधियों को इजाज़त दी गई है. लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग और तमाम प्रोटोकॉल के साथ. इन ज़ोन में कन्टेनमेंट ज़ोन पूरी तरह सील हैं. बाकी इलाकों में कमर्शियल कामों को छूट दी गई है. लेकिन इंडस्ट्रियल सेक्टर लॉकडाउन की वजह से हांफ रहा है. एक तो मज़दूरों के पलायन से फैक्ट्री-प्लांट के काम-धंधे पर असर पड़ा है. कारखानों की मशीनें चुप हैं. मैनपावर नहीं है. जहां मज़दूर हैं, वहां उन्हें देने के लिए पैसे नहीं हैं, क्योंकि प्रोडक्शन ठप है. इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन की दिक्कतें अलग. डिमांड-सप्लाई की चेन टूट गई है. कच्चा माल नहीं मिल रहा. सामान बाज़ार तक पहुंच नहीं पा रहा है. सबसे बुरी मार छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) पर पड़ी है.

इंडस्ट्रियल सेक्टर का हाल जानने के लिए हमने कुछ फैक्ट्री मालिकों से बात की. जानते हैं उनका क्या कहना है?

‘बिजली का बिल लगातार आ रहा है’

नाम- विजय कपूर

जगह- कानपुर, उत्तर प्रदेश

विजय कपूर कोऑपरेटिव इंडस्ट्रियल एरिया के चेयरमैन हैं. उन्होंने ‘दी लल्लनटॉप’ से बातचीत में बताया कि उनके एरिया में साढ़े पांच हजार छोटी इंडस्ट्री हैं. दादानगर और पनकी में. पैकेजिंग यूनिट से लेकर इलेक्ट्रिकल पार्ट्स, प्लास्टिक, होज़िरी का सामान बनता है. 1960 से ये इंडस्ट्रियल एरिया है. फैक्ट्रियां दिक्कत में हैं. सरकार की तरफ से राहत पैकेज का ऐलान नहीं हुआ है. फैक्ट्री बंद हो तो भी उनके कई खर्चे रुक नहीं रहे.

वो कहते हैं,

बिजली का बिल लगातार आ रहा है. उसमें छूट नहीं मिली है. हमने कहा कि मिनिमम बिल मत लीजिए. सरकार ने बात नहीं मानी. हमने किसी तरह मार्च की पेमेंट दी, लेकिन अब अप्रैल की पेमेंट देने में बहुत दिक्कत है, क्योंकि हमारा सारा पहिया रुक गया है. न माल आगे जा रहा है, न आ रहा है. मज़दूरों को भी पेमेंट देने में दिक्कत आ रही है. यहां पलायन की समस्या थोड़ी कम है. कुछ बड़ी इंडस्ट्री सर्वाइव कर पा रही हैं.

कई बड़ी फैक्ट्रियों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ काम शुरू हुआ है लेकिन छोटी इंडस्ट्री में ऐसा मुमकिन नहीं हो पा रहा है. फोटो: India Today
कई बड़ी फैक्ट्रियों में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ काम शुरू हुआ है लेकिन छोटी इंडस्ट्री में ऐसा मुमकिन नहीं हो पा रहा है. फोटो: India Today

‘करोड़ों रुपए बैंक का लोन, दिवाली तक कोई काम नहीं’

नाम- महेंद्र रामोलिया

जगह- सूरत, गुजरात

महेंद्र रामोलिया कपड़ा कारोबारी हैं और उनकी टेक्सटाइल मिल है. वो कहते हैं कि लॉकडाउन में इंडस्ट्री खत्म हो गई है. पहले वर्कर यहां थे. अब वो गांव जा रहे हैं. एक महीने में सूरत खाली हो जाएगा. 17 लाख मज़दूर हैं. रोज़ 10 हज़ार मज़दूर जा रहे हैं. करोड़ों रुपए का बैंक का लोन है. वो आज भी किश्तें काट रहे हैं. सरकार भले कहे लेकिन बैंक इसमें छूट नहीं देते.

उन्होंने बताया,

मैं छोटे-मझोले उद्योग (MSME) में आता हूं, जिसकी हालत खराब है. सूरत रेड ज़ोन में है. फिर ऑरेन्ज में जाएगा. फिर ग्रीन में. कई महीने और लगेंगे. दिवाली तक इंडस्ट्री चालू होने वाली नहीं है. वो भी लेबर अगर लौटे तो. बाज़ार में रीटेल से पहले कपड़े का काम वैल्यू एडिशन के लिए कई जगहों से होकर गुजरता है. बहुत से लोग इनमें घरों से काम करते हैं. लेकिन ट्रांसपोर्ट न होने से सामान पहुंच नहीं पा रहा. क्या होगा, नहीं मालूम?

पिछले कई दिनों में मज़दूरों ने पहले तो पैदल पलायन किया. फिर सरकार ने उनके लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलवाईं. फोटो: PTI
पिछले कई दिनों में मज़दूरों ने पहले तो पैदल पलायन किया. फिर सरकार ने उनके लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलवाईं. फोटो: PTI

‘गाड़ियों के आने की संख्या पहले से बढ़ी है’

नाम- महेंद्र सिंह 

जगह- पाली, राजस्थान

महेंद्र सिंह सीमेंट फैक्ट्री में पैकर ऑपरेटर हैं. उनका कहना है कि उनकी फैक्ट्री में पहले से हालत सुधरी है. वो कहते हैं,

जनता कर्फ़्यू के बाद से फैक्ट्री बंद हो गई. 21 अप्रैल को दोबारा काम शुरू हुआ. कई लोग घर चले गए थे. पहले यहां 171 पैकर ऑपरेटर थे. फिलहाल 125 लोग काम पर लौट आए हैं. लॉकडाउन से पहले 500 टन का उत्पादन होता था. दोबारा शुरू होने पर 200 टन ही काम हुआ. धीरे-धीरे 400 टन तक उत्पादन गया है. कच्चे माल का पहले से स्टॉक था, वही चल रहा है. अब ट्रांसपोर्ट सही हुआ है, तो कच्चा माल भी आने लगा है. पहले बहुत कम गाड़ियां आ रही थीं. लेकिन अब संख्या बढ़ी है.

जिन सामानों को बाज़ार तक पहुंचने से पहले कई चरणों से गुजरना पड़ता है, ट्रांसपोर्टेशन में दिक्कतों के चलते ये भी नहीं हो पा रहा है. फोटो: India Today
जिन सामानों को बाज़ार तक पहुंचने से पहले कई चरणों से गुजरना पड़ता है, ट्रांसपोर्टेशन में दिक्कतों के चलते ये भी नहीं हो पा रहा है. फोटो: India Today

जयपुर में मंगला सरिया फैक्ट्री के मालिक सीताराम अग्रवाल का कहना है कि यहां रोज़ 500 मज़दूरों की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन अभी 100 के आस-पास मज़दूर हैं, जिसकी वजह से फैक्ट्री का काम रुका हुआ है. उन्होंने कहा कि हमने मज़दूरों का खयाल रखा, लेकिन वो घर जाना चाहते हैं.

राजस्थान उद्योग संघ के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल कहते हैं,

पूरे राजस्थान में अब तक 25,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है. अगर इस तरह से राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने श्रमिकों का पलायन को नहीं रोका, तो सारे उद्योग-धंधे ठप हो जाएंगे. सरकार को अगर पलायन रोकना है, तो मज़दूरों को मनरेगा से जोड़ दें. इससे मज़दूरों को भी पैसा मिलेगा और उद्योग-धंधे भी चलते रहेंगे.

‘बिजली के बिल पर सरकार नहीं सुनेगी, तो कोर्ट जाएंगे’

नाम- विनय कुमार

जगह- पटना, बिहार 

विनय कुमार लोहे-स्टील फैक्ट्री के मालिक हैं. उनका कहना है कि सबसे बड़ा बोझ बिजली के बिल का है, क्योंकि एक फिक्स्ड अमाउंट हमें देना ही होता है. बिना फैक्ट्री चलाए वो देना पड़ रहा है. साथ ही मज़दूरों की संख्या भी घटी है. वो कहते हैं,

पहले हमारे यहां ढाई से तीन हजार मज़दूर हुआ करते थे. हमारे यहां लोहे का काम भी होता है. छड़-सरिया बनती है. मज़दूर अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए हैं. अभी 400-500 मज़दूर हैं. बिजली का बिल ही 4 करोड़ के आस-पास आ रहा है, जो बहुत बड़ी मार है. चाहे चलाइए, चाहे न चलाइए. अप्रैल का पेमेंट नहीं हुआ है. सरकार की तरफ से कोई सुनवाई नहीं है. सरकार नहीं सुनेगी, तो कोर्ट जाएंगे. 

दोपहिया, चार पहिया वाहन बनाने वाली बड़ी इंडस्ट्री धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही हैं लेकिन वहां भी मैनपॉवर कम है. फोटो: India Today
दोपहिया, चार पहिया वाहन बनाने वाली बड़ी इंडस्ट्री धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही हैं लेकिन वहां भी मैनपॉवर कम है. फोटो: India Today

केंद्र सरकार क्या कह रही है

फाइनेंशियल एक्सप्रेस  की ख़बर के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि छोटे और मझोले उद्योग (MSME) की स्थिति खराब है और वो बने रहने के लिए जूझ रहे हैं. उन्होंने बड़े उद्योगों से अपील की है कि छोटी कंपनियों की बकाया राशि एक महीने में जारी करें. उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही इन उद्योगों के लिए राहत पैकेज का ऐलान करेगी.

इससे पहले उन्होंने कहा था कि सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ट्रांसपोर्टेशन में छूट दी जाएगी. वहीं, फाइनेंशियल एक्सप्रेस  की ही एक और ख़बर के मुताबिक, सरकार MSME सेक्टर के लोन क्लियर करने के लिए एक लाख करोड़ रुपए का फंड जारी करने पर विचार कर रही है. कुछ दिनों पहले MSME सेक्टर से जुड़ी पीएम मोदी की एक बैठक भी हुई है.


 

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