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राधिका आप्टे: औरतों के यौन मसलों से पीरियड्स तक, सबसे बहादुर रोल करने वाली एक्ट्रेस

एक अंतरराष्ट्रीय फिल्म है. नाम है ‘मैडली’. इसमें छह कहानियां शामिल हैं. हरेक का निर्देशन अलग-अलग फिल्ममेकर ने किया है. इनमें एक कहानी है ‘क्लीन शेवन’ जिसका निर्देशन अनुराग कश्यप ने किया है. ये एक युवा गृहिणी के बारे में है जिसका शादीशुदा जीवन उबाऊ चल रहा है. पति पुराने ख़यालों का है. घर की चारदीवारी में ही रखना चाहता है. संबंधों में ऊष्मा लाने के लिए वह बहुत कोशिशें करती है लेकिन कुछ नहीं होता. ऐसे में वो ख़ुद से काफी कम उम्र के एक पड़ोसी लड़के से दोस्ती बढ़ाती है. वहां उसे खुशी मिलती है. आत्म-सम्मान मिलता है. लेकिन उसका पति उसके दिल और शरीर को अपने काबू में रखे रहता है. फिर आगे कुछ और होता है.

राधिका ने इसमें गृहिणी का केंद्रीय रोल किया है. ‘क्लीन शेवन’ नाम शरीर के एक अंग की शेविंग का संकेत है जो संभवत: गृहिणी पति के साथ यौन संबंधों में ऊष्मा लाने के लिए करती है.

फिल्म में ऐसे ही एक दृश्य में राधिका ने फ्रंटल न्यूड सीन किया है जो भारत की किसी भी अभिनेत्री ने इससे पहले नहीं किया है.

राधिका संबंधित दृश्य में.
राधिका संबंधित दृश्य में.

न्यूडिटी अपने आप में किसी बहादुरी का पैमाना नहीं है. हर कोई अपनी रुचि, मजबूरी या कमर्शियल फायदे के लिए ऐसा करता है. इस फिल्म के साथ ऐसा नहीं है. ये किसी ऐसे दृश्य से दर्शक जुटाने की कोशिश नहीं करती. ये जिस किस्म की कहानी है वो बहुत महत्वपूर्ण है. दूसरा ये कलात्मक आज़ादी की भी बात है क्योंकि आमतौर पर भारत में किस्म-किस्म के संस्थान बताते रहते हैं कि कपड़ों में कैसे रहा जाए. कैसे दृश्य गंदे हैं, कैसे अच्छे हैं. फिल्मों में क्या बोलना चाहिए, क्या सोचना चाहिए. लेकिन ऐसी संस्थानिक सोच से आज़ादी किसी भी कुंठा मुक्त, प्रगतिशील और सुलझे हुए समाज के लिए बहुत जरूरी है.

राधिका ऐसी कई फिल्मों का हिस्सा रही हैं.

‘क्लीन शेवन’ में जब उन्होंने फ्रंटल न्यूड सीन करने का फैसला लिया तो उनके पास पाने को बहुत कुछ नहीं था, उनके पास सिर्फ एक कलात्मक संतोष था. कोई कमर्शियल फायदा नहीं. उनके यूं सोचने का तरीका और बतौर अभिनेत्री ऐसे फैसले उन्हें सबसे महत्वपूर्ण अभिनेत्रियों में शामिल करते हैं.

इससे पहले राधिका ने श्रीराम राघवन द्वारा निर्देशित फिल्म ‘बदलापुर’ में एक छोटा सा रोल कुबूल किया. उन्होंने सिर्फ छह दिन फिल्म की शूटिंग की लेकिन उनका काम बहुत यादगार रहा. वो सीन जहां वरुण धवन का पात्र रघु अपनी पत्नी और बेटी की मौत का बदला लेने के लिए दोषी हरमन (विनय पाठक) तक पहुंच जाता है. उसकी गर्लफ्रेंड कोको (राधिका) को वो बेइज्जत करता है. उस सीन में वो एक-एक करके उसके कपड़े उतरवाता है.

अंतर्वस्त्रों में राधिका वो सीन पूरा करती हैं. उस सीन को देखते हुए भारी तनाव मिश्रित भय का संचार होता है. समझा जा सकता है कि इसे करते हुए उन्हें किस दिमाग़ी मजबूती की जरूरत रही होगी. राधिका के फिल्मी जीवन के सबसे महत्वपूर्ण यादगार दृश्यों में एक ये है.

2015 में ही उन्होंने एडल्ट कॉमेडी ‘हंटर’ में काम किया. आमतौर पर कोई भी महत्वाकांक्षी अभिनेत्री इस जॉनर की फिल्म नहीं करती लेकिन राधिका ने की. निर्देशक हर्षवर्धन कुलकर्णी की ये फिल्म इस श्रेणी की अन्य फिल्मों में बहुत विशेष साबित हुई. राधिका का काम इसमें भी प्रभावी था.

‘दैट डे आफ्टर एवरीडे’

अनुराग कश्यप की शॉर्ट फिल्म ‘दैट डे आफ्टर एवरीडे’ भी उन्होंने की. ये महिलाओं से छेड़छाड़ के विषय पर आधारित थी. लीना यादव की फिल्म ‘पार्च्ड’ में उन्होंने ग्रामीण राजस्थानी महिला का रोल किया है. ये ऐसी कहानी है जिसमें ग्रामीण महिलाएं अपनी आज़ादी की खोज करती हैं. फिल्म में आदिल हुसैन के साथ उनके प्रणय दृश्य की खूब चर्चा हुई.

पुणे के जाने-माने न्यूरोसर्जन की बेटी राधिका अर्थशास्त्र और गणित में ग्रेजुएट हैं. कथक नृत्यांगना रोहिणी भाटे से उन्होंने नृत्य की शिक्षा ली. लंदन के ट्रिनिटी म्यूजिक और डांस स्कूल से समकालीन नृत्य की शिक्षा ली.

थियेटर करने के बाद 2005 में फिल्म ‘वाह लाइफ हो तो ऐसी’ में मामूली भूमिका से उन्होंने काम शुरू किया. उनकी पहली प्रमुख भूमिका चार साल बाद बंगाली फिल्म ‘अंतहीन’ में आई जिसमें वे राहुल बोस के साथ लीड रोल में थीं. इसे अनिरुद्ध रॉय चौधरी ने डायरेक्ट किया था जिन्होंने अमिताभ-तापसी पन्नू अभिनीत ‘पिंक’ बनाई. राधिका ने इस फिल्म में एक तेज-तर्रार जर्नलिस्ट का रोल किया था.

पिछले सात-आठ साल में राधिका ने हिंदी, बंगाली, मराठी, मलयालम, तेलुगु और अंग्रेजी में इतनी फिल्में की हैं कि उनका प्रोफाइल अच्छा खासा हो चुका है. लेकिन उनके किसी काम में ये नहीं दिखता कि वे किसी भी छवि में कैद हैं.

काबाली में राधिका और रजनीकांत.
काबाली में राधिका और रजनीकांत.

जैसे उन्होंने राम गोपाल वर्मा की ‘रक्त चरित्र’ से लेकर ओनीर की ‘आई एम’, कृष्णा-डीके की ‘शोर इन दि सिटी’, निशिकांत कामत की मराठी ब्लॉकबस्टर ‘लई भारी’, केतन मेहता की ‘मांझी – द माउंटेन मैन’ और रजनीकांत के साथ ‘काबाली’ में काम किया है.

2018 में राधिका पैडमैन में नज़र आईं, अक्षय कुमार के साथ. मेंस्ट्रुअल हाईजीन पर बनी इस फिल्म को काफी पसंद किया गया और राधिका के किरदार को भी. इसके बाद वह लस्ट स्टोरीज़ में नज़र आईं. एक कॉलेज प्रोफेसर के रोल में जो अपने स्टूडेंट के साथ संबंध बनाती है. इसी रोल के लिए इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में राधिका को बेस्ट एक्ट्रेस कैटेगिरी में नॉमिनेट किया गया है. इसके बाद आई अंधाधुन और बाज़ार. इन फिल्मों में राधिका के किरदार एक-दूसरे से एकदम अलग हैं और बेहद पॉवरफुल.

राधिका के फिल्मी जीवन की हाइलाइट इन सबमें कुछ है तो उनकी मूल्य व्यवस्था. कि वे अभिनय से क्या समझती हैं? वे फिल्म आर्ट को समृद्ध करने में कितना योगदान दे रही हैं? मसलन, ‘क्लीन शेवन’ को ले सकते हैं. वे अपने उस किरदार के लिए जिस हद तक गई हैं उसमें कंगना रनोट, दीपिका पादुकोण, कटरीना कैफ या प्रियंका चोपड़ा कोई भी अभिनेत्री हाथ खड़े कर देगी. लेकिन ये दूरदर्शी होने की बात है. ये किसी भी पूर्वाग्रह, प्रतिक्रिया, चलन के प्रभाव में न आने की बात है. ये कला को समझने की बात है. जो राधिका समझती हैं. बाद में तो हर अभिनेत्री समझ जाएगी.


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