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अपने फोन की सेटिंग में कोविड-19 लिखा देखकर घबराइए मत, ये कोरोना से लड़ने का जाबड़ फीचर है

कोरोना की रोकथाम के लिए दुनियाभर में ऐप बन रहे हैं. भारत ने भी आरोग्य सेतु ऐप बनाया. अब टेक्नॉलजी की दो बड़ी कम्पनियों गूगल और ऐपल ने मिलकर एक API विकसित किया है. दावा है कि इस API से कोरोना की कांटैक्ट ट्रेसिंग यानी संक्रमितों की पहचान करना ज़्यादा आसान हो जाएगा, और प्राइवेसी को लेकर उठने वाले सवाल भी हल हो जाएंगे. इसे बहुत सारे देशों ने तो अपना लिया, लेकिन भारत आनाकानी कर रहा है.

तो क्या है ये API? कैसे बना? काम कैसे करेगा? और समस्या क्या है इससे? सब जानिए. आसान भाषा में.

सबसे पहले जानिए कि API क्या होता है?

API यानी ऐप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस. वो पुल जिसके ज़रिए दो सॉफ़्टवेयर या ऐप एक दूसरे से बात करते हैं. अब इसको आसान भाषा में जानिए. आप जाते हैं किसी होटल या रेस्तरां में खाना खाने. तो आपसे वेटर आपका ऑर्डर लेने आता है. आपका ऑर्डर लेकर वो किचन में जाता है. किचन से तैयार खाना लेकर आपकी टेबल पर आता है. तो ये जो वेटर है, वो आपका API है. वो आपके और किचन के बीच का सम्पर्क है. कंप्यूटर या मोबाइल की दुनिया में भी API यही काम करता है. संदेश और जानकारियां इधर से उधर ले जाने का. ये कोई ऐप नहीं होता, बल्कि दो ऐप्स या ऐप्स और सर्वर के बीच का पुल होता है. Google-Apple का ये API भी यही काम करेगा. 

गूगल के android प्लैट्फ़ॉर्म के सबसे ज़्यादा फ़ोन यूज़र हैं. ताज़ा अपडेट के बाद ये API कई सारे फ़ोन में दिखने लगा, जिसके बाद इस ऐप की बात शुरू हुई.
गूगल के android प्लैट्फ़ॉर्म के सबसे ज़्यादा फ़ोन यूज़र हैं. ताज़ा अपडेट के बाद ये API कई सारे फ़ोन में दिखने लगा, जिसके बाद इस ऐप की बात शुरू हुई.

अप्रैल में हुआ था API का ऐलान?

जिस समय देश दुनिया में लॉकडाउन की प्रक्रिया चल रही थी, उस समय यानी अप्रैल में गूगल और ऐपल ने मिलकर घोषणा की कि वो कांटैक्ट ट्रेसिंग को सुगम और सहज बनाने के लिए API बनाएंगे, जो सभी देशों के कोरोना से लड़ने के लिए बनाए गए ऐप से जुड़ सकेगा. और इससे कोरोना से जुड़े केसों को खोजने और रोकने में बहुत मदद मिलेगी. 

कैसे काम करता है?

ये API आपके फ़ोन के ब्लूटूथ का इस्तेमाल करता है. भारत सरकार के आरोग्य सेतु ऐप (जिसमें ये API अभी उपलब्ध नहीं है) के उदाहरण से समझिए. आपको हमेशा आरोग्य सेतु ऐप ऑन रखना पड़ता है. लेकिन इस API के लागू हो जाने के बाद आपको आरोग्य सेतु ऐप को लगातार ऑन नहीं रखना पड़ेगा. अब दो व्यक्ति एक दूसरे के संपर्क में 5 मिनट से ज़्यादा देर के लिए आते हैं, और दोनों ही व्यक्तियों के फ़ोन में ऐप है और API से लिंक है, तो API इस मीटिंग के डाटा को दोनों ही व्यक्तियों के फ़ोन में रखेगा. अब इन दोनों दोनों में से कोई भी अगर आने वाले दिनों में अगर कोरोना पॉज़िटिव हो जाता है, तो दूसरे व्यक्ति को ख़ुद ब ख़ुद ये ऐप एक नोटिफ़िकेशन दे देगा कि आप एक्सपोज़ हुए हैं. जिसके बाद जांच और क्वारंटीन जैसी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है. 

इस API से प्राइवेसी को ख़तरा है?

इसको बनाने वाली कम्पनियों की मानें तो, नहीं. नहीं है ख़तरा. कैसे? कुछ ख़ास बातें जानिए.

# इस API की ख़ास बात ये है कि ये यूज़र की लोकेशन और फ़ोन नम्बर जैसे डाटा स्टोर नहीं करता है, न ही इसे इस्तेमाल करने वाले ऐप को करने देता है. 

# जिस भी फ़ोन में ये API काम कर रहा है, ये उस यूज़र की एक यूनीक आईडी यानी पहचान हर 10 से 20 मिनट में बनाता है. इससे यूज़र कौन है, इसका पता लगा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है. यूज़र की प्राइवेसी पर कोई रिस्क नहीं. 

# ये API यूज़र का सारा डेटा यूज़र के फ़ोन में ही रखता है, उसे किसी सर्वर पर अपलोड नहीं करता है. ज़रूरत पड़ने पर ही और यूज़र के परमिशन के बाद ही ये सारा डेटा सर्वर पर अपलोड किया जाता है. वरना नहीं.

किन देशों ने अपनाया?

जिन देशों ने अपने यहां के कांटैक्ट ट्रेसिंग ऐप में इस API को जगह दी, उनमें ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, ब्राज़ील, कनाडा, क्रोएशिया, डेनमार्क, जर्मनी, घाना, पोलैंड, आयरलैंड, इटली, जापान, केन्या, लातविया, फ़िलिपींस, सउदी अरब, स्विट्ज़रलैंड, उरुग्वे और यूनाइटेड किंगडम के नाम शामिल हैं.

इस लिस्ट में भारत क्यों नहीं है?

भारत में जो ऐपल और एंड्रॉइड के फ़ोन हैं, उनमें नए अपडेट के बाद ये फ़ीचर दिखने तो लगा है, लेकिन काम नहीं कर रहा है. क्योंकि अभी तक API को आरोग्य सेतु ऐप में जगह नहीं मिली है. ये API बनाने वाली कंपनियों ने भारत सरकार से सम्पर्क किया है कि वो अपने आरोग्य सेतु ऐप में इसको जगह दे. इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस ने इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से बातचीत की. प्रवक्ता का जवाब आया कि API को लेकर अभी हमने कोई निर्णय नहीं लिया है. हम देखेंगे कि ऐप को लेकर API की क्या ज़रूरतें हैं, और उस हिसाब से हम निर्णय लेंगे कि हम इसमें शामिल होंगे या नहीं. 

भारत सरकार के आरोग्य सेतु ऐप पर अभी ये फ़ीचर नहीं आ सका है. और जैसा लग रहा है, आएगा भी नहीं.
भारत सरकार के आरोग्य सेतु ऐप पर अभी ये फ़ीचर नहीं आ सका है. और जैसा अभी लग रहा है, आएगा भी नहीं.

लेकिन वहीं टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपने सूत्रों के हवाले से लिखी गयी ख़बर में बताया है कि सम्भव है कि इस API को आरोग्य सेतु के साथ नहीं लगाया जाएगा. क्यों? कहना है कि आरोग्य सेतु में ख़ुद का API है, इसलिए इसकी ज़रूरत नहीं है.

भारत क्यों नहीं शामिल होना चाह रहा है?

इसका पक्का जवाब तो सरकार देगी. लेकिन इस बारे में छपी इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट कहती हैं कि ये API दरअसल फ़ोन के यूज़र को ये छूट देता है कि वो अपना कितना डाटा शेयर करता है. और वहीं आरोग्य सेतु जैसे तमाम सरकारी ऐप यूज़र का पर्सनल डाटा कलेक्ट करने और सर्वर पर भेजने के पहले यूज़र की परमिशन नहीं लेते हैं. और इसी वजह से इस API को आरोग्य सेतु से जोड़ने में सरकार को हिचकिचाहट हो रही है. 


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