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नरेंद्र मोदी के वो पांच भाषण जिन्हें अब वो खुद नहीं सुनना चाहेंगे

नरेंद्र मोदी का आज हैप्पी बड्डे है. खबरों की मानें तो 70 साल के हो गए हैं. तितली उड़ा रहे हैं. जन्मदिन मना रहे हैं. ट्विटर पर दुनिया भर की बधाई आ रही है. मतलब कि चहुंओर गर्दा.

लेकिन मोदी जी का बड्डे बहुत तरीकों के मनाया जा सकता है. तो ऐसे में एक और तरीका है, याद करने का. हम मोदी के ऐसे पांच बयान गिन रहे हैं, जिनको शायद मोदी कभी दुबारा नहीं बोलेंगे. सोचना तो ये भी है कि ये बयान देने के कुछ देर बाद मोदी चक्कर में पड़ गए होंगे कि ये क्या बोल दिया. हांय!

क्या हैं पांच बयान, जो मोदी खुद नहीं सुनना चाहेंगे?

बयान नंबर 1 –  बादल है – रडार है… तो चल पड़े

पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना ने हमला किया था. पुलवामा हमलों का बयान लेने की कार्रवाई बतायी जा रही थी. इस बारे में सवाल पूछे जा रहे थे कि हमला कैसे हुआ? क्या तैयारी थी? नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू हुआ. पूछा गया. जवाब आया कि जिस दिन वायुसेना के जहाज हमला करने के लिए तैयार हो रहे थे, उस दिन मौसम खराब था.

सब चिंतित थे कि कैसे किया जाएगा. मोदी ने दिया अपना मारक स्टेटमेंट,

“लेकिन मैंने कहा इतना बादल है, बारिश हो रही है तो एक बेनिफिट है. कि हम राडार से बच सकते हैं. कच्ची सोच थी लेकिन बादलों की मदद से राडार से बच सकते है…उलझन में थे क्या करें? मैंने कहा कि ठीक है. तो चल पड़े.”

जान तो आप भी रहे ही होंगे कि बादल राडार से नहीं बचा पाते हैं. नहीं तो इतने महंगे-महंगे प्लेन नहीं बनाए जा रहे होते जो राडार से बचा सकें.

बयान नंबर 2 – क्लाइमेट नहीं बदल रहा है, हम बदल गए हैं 

2014. शिक्षक दिवस का दिन यानी 5 सितम्बर. मोदी स्कूली बच्चों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग कर रहे थे. असम से बच्चों ने पूछा कि वे बहुत चिंतित हैं Climate Change को लेकर. यानी पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों को लेकर. बच्चों ने पूछा कि पर्यावरण को बचाने के लिए वे क्या कर सकते हैं. बारी थी नरेंद्र मोदी की. कहा कि देखिए कैसे छोटे-छोटे बच्चे क्लाइमेट चेंज और एन्वायरमेंट चेंज की चर्चा कर रहे हैं.

ये तो मैंने ऐसे ही बोल दिया था!
ये तो मैंने ऐसे ही बोल दिया था!

फिर आया मोदी का वो मारक स्टेटमेंट, फिर से,

“70, 80, 85, 90 साल के लोग. सर्दियों में अक्सर कहते हैं कि इस बार पिछली बार से ज्यादा ठंड पड़ रही है. कहते हैं न? एक्चुली सर्दी ज्यादा नहीं है. उनकी उमर बढ़ने के कारण उनकी सहने की शक्ति कम हो गयी है. वैसे ही… ये क्लाइमेट चेंज नहीं हुआ है, हम चेंज हो गए हैं.”

और ऐसे पर्यावरण पर काम कर रहे सारे वैज्ञानिकों की मेहनत डांड़.

बयान नंबर 3 – नाले की गैस पर चाय बना दी

बायो फ्यूल डे. 10 अगस्त. मोदी का एक और भाषण. प्राकृतिक गैस पर बात हो रही थी. मोदी ने अपना एक निजी वाकया सुनाना शुरू कर दिया. कहा.

“मैंने एक अखबार में पढ़ा था. किसी छोटे-से शहर में नाले के पास एक चाय वाला था. वो अपना चाय बनाकर बेचता था….. वहीं पर गन्दी नाली बहती थी. अब उसके दिमाग में कोई विचार आया होगा. उस नाली से गैस आती थी, दुर्गन्ध आती थी. उसने एक छोटे-से बर्तन को उलटा करके उसमें पाइप डाल दिया. जो गटर से गैस निकलता था, उसे निकालकर उसने अपने चाय के ठेले में ले लिया. और चाय बनाने के लिए उसी गैस का उपयोग करता था.”

इसके बाद तो इंटरनेट पागल-सा हो गया. लोग खेलने लगे. कई लोगों तो सच्ची जाकर नाले का गैस निकालकर दिखाने लगे कि देखो साहब, ये क्या बोल रहे हैं मोदी जी? कुछ नहीं हुआ और मोदी जी ने एक और सबक ले लिया.

बयान नंबर 4 – ओस से धुलाई कर दी

मैन वर्सेज वाइल्ड शो. बेयर ग्रिल्स के साथ मोदी. शो का प्रसारण हुआ 12 अगस्त की रात. मोदी अपने गरीबी और अपनी मेहनत के किस्से बहुत सुनाते रहते हैं. फिर से सवाल उठा. मोदी जी शुरू,

इतनी गरीबी थी कि मेरे घर में कपड़े धोने और नहाने के लिए साबुन खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे. जब ओस की बूंदें ज़मीन पर गिरती थीं, तो उनमें नमक जैसा जम जाता था. उसे ही हम घर लेकर आते थे और गरम पानी में मिलाकर उसी से कपड़े धोते थे और नहाते थे.”

बस बवाल उठ गया. ट्विटर पर मज़ाक शुरू हुआ. लोग ओस जमा करने का नाटक करने लगे. कुछ नहीं हुआ. लोगों ने बोला कि ओस से इतना नमक भी नहीं निकला कि चाट सकें, घोलेंगे क्या?

बयान नंबर 5 – बीजगणित पर खेल गए

नरेंद्र मोदी कनाडा में. भारी भीड़ को संबोधित कर रहे थे. भारत-कनाडा के संबंधों पर बात कर रहे थे. बीजगणित लेकर आए. एकदम नए तरीके का बीजगणित और क्या, खुद समझिए और हमको भी समझा दीजिए.

“हम ए स्क्कायर प्लस बी स्क्वायर करें, तो रिज़ल्ट क्या आता है? लेकिन मान लीजिए. ए प्लस बी इनटू ब्रैकेट स्क्वायर करें तो, रिज़ल्ट आता है ए स्क्वायर प्लस टू एबी प्लस बी स्क्वायर. ये एक एक्स्ट्रा टू एबी मिलता है या नहीं मिलता है? ये एक्स्ट्रा टू एबी कहां से आया? जब भारत और कनाडा जब मिलता है तो एक्स्ट्रा टू एबी निकलता है.”

कनाडा को ऐतिहासिक मुलाक़ात
कनाडा को ऐतिहासिक मुलाक़ात

बस इसके बाद क्या? गणितज्ञ परेशान. समझने लगे कि क्या हुआ? मोदी ने क्या कहा? किसी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था. और लेखक-कॉमेडियन वरुण ग्रोवर ने बताया,

“नासा के उस आवाज़-ॐ की ध्वनि पकड़ने वाले यंत्र ने मोदी जी के एक्स्ट्रा टू एबी वाला बयान सूनी दुनिया की एक और आवाज़ पकड़ी थी. आवाज़ थी – हैं!!”

चलिए, पुदुच्चेरी को वणक्कम.


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