Submit your post

Follow Us

मां के पास मेरी हर चीज का हिसाब था, बचपन का भी

503
शेयर्स

शिवेंद्र कहानी नहीं कहते हैं, जादू करते हैं. यकीन न हो तो ‘चॉकलेट फ्रेंडस’ नाम से आई कहानियों की एक किताब पढ़ कर देख लीजिए. शिवेंद्र का आज जन्मदिन है. बनारस में पले-बढ़े और मुंबई में जीने के लिए फिल्म और टीवी के लिए लिखने वाले शिवेंद्र की एक लंबी कहानी छापते हुए एक संपादक ने कहा कि ऐसी कहानी तो ईश्वर ही लिख सकता है. वह कहानी बहुत लंबी है, इसलिए आज एक कहानी रोज़ में उन्हें शुभकामनाएं देते हुए हम उसे नहीं इस जादुई कहानी को पढ़ा रहे है. पढ़िए…  


ये बारिश वाले दिन थे और साइकिल वाले भी. चुक्कड़ की खारी चाय (आंसुओं की वजह से) पीते हुए और उस जादू के बारे में सोचते हुए जो मेरे, तुम्हारे और बारिश के दरमियान घट सकता था. मैं उस गली में खड़ा था जहां से हर रोज भोर के अंधेरे में एक शायर गुजरता था.

यह सोनारपुरा मुहल्ले की आखिरी गली थी और इस गली के बाद किसी सम्मोहन की तरह गंगा की सीढ़ियां शुरू हो जाती थीं. बोर्ड के एक्जाम के साथ ही अठारह की उम्र शुरू हो चुकी थी. अब हमने भगवान से डरना बंद कर दिया था और मां के लिए पत्थरों से दुआएं मांगना भी. अब सोने के सिक्कों से भरे हुए घड़े आधी रात को तालाब में नहीं उतराते थे और न ही सुनसान दुपहरी में वह औरत कुएं पर आती जिसकी पायलों की आवाज भर लोगों को सुनाई देती थी.


 

ये बारिश वाले दिन नहीं थे और न ही साइकिल वाले. ये वे दिन थे जब दुनिया से जादू खत्म हो रहे थे. जादू जो बचपन से हमारे साथ रहते आए थे. तितली के पंखों से नाजुक, जुगनू से और अंधेरे बाथरूम में बिल्ली की आंखों से चमकते हुए.
“तू सारी रात रोता रहा हुटुक-हुटुक कर…” मेरे घुटने मां के पेट पर लगे थे, जोर से. बस इतना ही मुझे याद है, फिर मैं तीन-चार महीने का बच्चा बन गया था.
एक अजीब जादू था यह. बोर्ड के एक्जाम से भी अधिक डरावना! मैं दुपहर तक सुबह होने का इंतजार करता रहा था.

“सुबह हो गई…’’ मां बार-बार मुझे जगाने की कोशिश करती रही थी.
‘‘अभी कहां?’’
‘‘अरे बारह बज रहे है!’’
‘‘हां, तो दुपहर हो गई होगी पर सुबह नहीं हुई.’’
मां हंसने लगी.
‘‘मां’’ मैं जोर से चिल्लाया.
मां पर आप चिल्ला सकते हो, यह घरेलू हिंसा के अंतर्गत नहीं आता.

दूर कहीं स्कूल की घंटियां बज रही थीं, छुट्टियों-सी. मैं स्कूल लौटना चाहता था, पर अब मेरे पास हॉफ पैंट नहीं बचे थे, न ही वह करधन जिसके धागे से बटन टूट जाने के बाद पैंट को संभाला जाता है.
‘‘तुझे ऐसा क्या दुःख है. इतना तो तू कभी नहीं रोया, बचपन में भी नहीं!’’ मां के पास मेरी हर चीज का हिसाब था – बचपन का भी.


 

ये वे दिन नहीं थे जब दुनिया से जादू खत्म हो रहे थे, ये वे दिन थे जब जादू को बचाए जाने की जरूरत थी.
उस दिन जो तुम्हारी खिड़की बंद थी तो बंद ही रही. न खुली, न झिझकी, न हंसी, न शरमाई. मैं भागता रहा था घाट-घाट, गली-गली और मुहल्ले-मुहल्ले पर ऐसा लग रहा था कि पूरे बनारस का जादू खत्म हो चुका था. एक दिन पहले हमने सब तय कर लिया था और तुमने गंगा की लहरों को एक दिया अर्पित किया था.
लेकिन अब मैं दुनिया के सारे अस्पतालों को मिटा देना चाहता था.
हरे पत्ते के दोने में रखा हुआ दिया लहरों के साथ बहता चला जा रहा था. हम मुरझाए फूल की तरह लौटे थे. मुझे बाद में पता चला था कि जब हम लौटते हैं तो अकेले होते हैं, न जाने कब तुमने वैतरणी पार कर ली थी. कुछ देर बाद एक तैराक कूदा था, “अरे! दौड़ा हो… कोई लड़की डूबी…”
उस रोज बारिश इतनी हुई थी कि समुंदर बनारस में किराए का मकान खोज रहा था. मैं उस गली में खड़ा था जो थी ही नहीं.
सांसें अटक रही थीं.
चाय खत्म होते ही कुल्हड़ निर्जीव हो गया था.

यह एक हल्का-सा स्ट्रोक था – इस दुनिया को अलविदा कहने का एक तरीका.
मां रो नहीं रही थी वह सदमे में थी. उसका चेहरा बिल्ली के पंजे से घायल हुई चिड़िया-सा लग रहा था. कोमल, सर्द, भयभीत, भीगा हुआ. मेरे मुंह में गंगा जल डाला गया. पर भय अब तक मेरे भीतर कांप रहा था. पेट और पसलियों के बीच कहीं – बिछुड़ने का भय.
‘‘आज से ठीक तीसरे दिन मरे हुए लोग जिंदा हो जाएंगे…’’

ईशु ने कहा, “परमपिता उन्हें जिंदगी सौपेंगे ताकि वे अपनी आखिरी इच्छा पूरी कर सकें.”
बेसब्र तीन दिन. मंदिर के अहाते में सांसें गिनता और साइकिल की पीठ पर खानाबदोश की तरह भटकता हुआ.

पहली, आखिरी और एकमात्र इच्छा तुम.
तुम्हारा मिलना एक प्राकृतिक षड्यंत्र था.

मंदिर का दरवाजा. सामने किशन-कन्हैया धोती पहन रहे थे. एक पंडित उनकी बांसुरी धो रहा था. सुबह समय से पहले अंगड़ाई ले रही थी. दरवाजे का हल्का-सा झरोखा. अंत में फुसफुसाती हवा, ‘‘वह आ गई.’’
मै झट तुम्हारी ओर बढ़ा – अलसाई पलकें, सपनों से भरी आंखें और जागती सांसें, बंद मुट्ठी की तरह ताला लगे होंठ, गालों पर ठहरा हुआ हैरान गुलाबी रंग, गंभीरता के तल में नींद-सी उचटी हुई अल्हड़ता, “क्या लाए हो?”
“पोखर किनारे की सोंधी मिट्टी और आम के बौर…” मैंने अपनी दोनों मुट्ठियां खोल दीं.
यह वह जादू था जो मैं तुम्हें जीवित रहते देना चाहता था – अस्पताल के पते की जगह. पर मैं शायद भूल गया था या मेरी उम्र इतनी नहीं थी कि संविधान मेरा साथ देता.

किशोर कल्पनाओं से सजा हुआ बचपन और जवानी को अलगाता और उन्हें जोड़ता मोड़. बचपन सी सुकुंवार हंसी, “अगले जन्म में इसे याद रखना. इस मंदिर को और इस मोड़ को भी जहां जिंदगी और कहानी ने आज मुहब्बत का फूल काढ़ा है. इस समय को भी मत भूलना जो इस मोड़ पर एक पल के लिए ठहर गया है. सिर्फ और सिर्फ मेरे और तुम्हारे लिए.”
रात के चुंबन से संवलाए तुम्हारे होंठ उस दिन कांपे थे और बारिश के बावजूद इंद्रधनुष एक उम्मीद की तरह ठीक हमारे ऊपर निकल आया था. कि यह वह दिन था जब दुनिया में जादू लौट रहे थे.


खुशी में आप गाना सुनकर नाचते हैं और दु:ख में उसके बोल समझ आने लगते हैं

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

कौन हो तुम

इन नौ सवालों का जवाब दे दिया, तब मानेंगे आप ऐश्वर्या के सच्चे फैन हैं

कुछ ऐसी बातें, जो शायद आप नहीं जानते होंगे.

अमिताभ बच्चन तो ठीक हैं, दादा साहेब फाल्के के बारे में कितना जानते हो?

खुद पर है विश्वास तो आ जाओ मैदान में.

‘ताई तो कहती है, ऐसी लंबी-लंबी अंगुलियां चुडै़ल की होती हैं’

एक कहानी रोज़ में आज पढ़िए शिवानी की चन्नी.

मोदी जी का बड्डे मना लिया? अब क्विज़ खेलकर देखो कितना जानते हो उनको

मितरों! अच्छे नंबर चइये कि नइ चइये?

कॉन्ट्रोवर्सियल पेंटर एमएफ हुसैन के बारे में कितना जानते हैं आप, ये क्विज खेलकर बताइये

एमएफ हुसैन की पेंटिंग और विवाद के बारे में तो गूगल करके आपने खूब जान लिया. अब ज़रा यहां कलाकारी दिखाइए.

इस क्विज़ में परफेक्ट हो गए, तो कभी चालान नहीं कटेगा

बस 15 सवाल हैं मित्रों!

क्विज़: खून में दौड़ती है देशभक्ति? तो जलियांवाला बाग के 10 सवालों के जवाब दो

इंग्लैंड के सबसे बड़े पादरी ने कहा वो शर्मिंदा हैं. जलियांवाला बाग कांड के बारे में अपनी जानकारी आप भी चेक कर लीजिए.

KBC क्विज़: इन 15 सवालों का जवाब देकर बना था पहला करोड़पति, तुम भी खेलकर देखो

आज से KBC ग्यारहवां सीज़न शुरू हो रहा है. अगर इन सारे सवालों के जवाब सही दिए तो खुद को करोड़पति मान सकते हो बिंदास!

क्विज: अरविंद केजरीवाल के बारे में कितना जानते हैं आप?

अरविंद केजरीवाल के बारे में जानते हो, तो ये क्विज खेलो.

क्विज: कौन था वह इकलौता पाकिस्तानी जिसे भारत रत्न मिला?

प्रणब मुखर्जी को मिला भारत रत्न, ये क्विज जीत गए तो आपके क्विज रत्न बन जाने की गारंटी है.