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दिल्ली की ज़हरीली हवा और पराली जलाने का पूरा गुणा गणित समझ लीजिए

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दिल्ली की हवा में ज़हर घुला हुआ है. मेडिकल इमर्जेंसी घोषित हो चुकी है. AQI माने Air Quality Index लगातार बिगड़ता जा रहा है. दिल्ली सरकार स्कूलों में मास्क बांट रही है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार दिल्ली की ज़हरीली हवा के लिए पड़ोसियों यानी हरियाणा और पंजाब को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं.

केजरीवाल का कहना है कि हरियाणा और पंजाब में किसान लगातार पराली जला रहे हैं जिसका असर दिल्ली वालों को  भुगतना पड़ रहा है. हरियाणा और पंजाब भी केजरीवाल को जवाब दे रहे हैं. हर बार की तरह. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने केजरीवाल पर उल्टा निशाना साधा है. दोनों का कहना है कि केजरीवाल साल भर के प्रदूषण के लिए कुछ दिनों की पराली को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं, प्रदूषण का राजनीतिकरण हो रहा है.

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने सोमवार 4 नवंबर को एक तस्वीर ट्वीट की. तस्वीर ख़ूब वायरल हुई. ये तस्वीर एक सैटलाइट इमेज है. Haryana Space Applications Centre (HARSAC) ने ये तस्वीर ली है. HARSAC हरियाणा की नोडल एजेंसी है जो रिमोट सेंसिंग का काम करती है.

खट्टर ने ये तस्वीर ट्वीट करके कहा ये पिछले दो दिनों की तस्वीर है
खट्टर ने ये तस्वीर ट्वीट करके कहा ये पिछले दो दिनों की तस्वीर है

खट्टर का कहना है कि हरियाणा के किसानों और हरियाणा सरकार ने अपना काम कर दिया. पिछले 48 घंटों के इस डाटा से खट्टर कहना चाहते थे कि सारी पराली जलाई जा रही है पंजाब में. हरियाणा में तो ना के बराबर जल रही है पराली.

# क्या हरियाणा बिल्कुल बेगुनाह है?

अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA के फायर इन्फॉर्मेशन फॉर रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम. (FIRMS) की सैटलाइट तस्वीरें और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़े खट्टर साहब की कहानी से इतर हैं. आंकड़ों से ये जाहिर होता है कि दिवाली से पहले 20 अक्तूबर से 25 अक्तूबर  2019 के बीच पंजाब और हरियाणा के खेतों में जमकर पराली जलाई गई है.

ये दिवाली से दो दिन पहले की तस्वीर है हरियाणा भी लाल रंगा हुआ दिखाई दे रहा है. माने उस टाइम हरियाणा में भी पराली जलाई जा रही थी
ये दिवाली से दो दिन पहले की तस्वीर है .हरियाणा भी लाल रंगा हुआ दिखाई दे रहा है. माने उस टाइम हरियाणा में भी पराली जलाई जा रही थी

नासा के सैटलाइट इमेज में पंजाब के अमृतसर जिले में तरण-तारण ताल और मरी मेघा गांव के पास व फिरोजपुर जिले में जबरदस्त पराली जलाई गई. इसी तरह से कपूरथला जिले में डुमियान गांव के पास पराली जलाई गई. अंबाला में भी बड़े पैमाने पर पराली जलाई जा रही है. जबकि हरियाणा में कैथल और कुरुक्षेत्र में सबसे ज़्यादा पराली जलाई गई.

हरियाणा में सिरसा, जींद, हिसार, कैथल और कुरुक्षेत्र में 20 अक्तूबर से 25 अक्तूबर तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) एयर क्वालिटी इंडेक्स ‘मध्य से खराब’ श्रेणी के बीच झूलता रहा. क्योंकि दिवाली से पहले तक हरियाणा में भी पराली जलाई जा रही थी.

# तो ये वायरल तस्वीर का क्या मसला है?

खट्टर ने जो तस्वीर ट्वीट की वो आई 3 से 4 नवम्बर को. तब तक हरियाणा अपनी पराली जलाकर फ़ुर्सत हो चुका था. पंजाब अब भी मन से जुटा हुआ है. ये तस्वीर दिखाकर खट्टर पराली जलाने के आरोपों से हाथ झाड़ना चाहते हैं. लेकिन हमें दो बातों का ध्यान देना होगा. एक तो ये कि सैटलाइट थर्मल इमेज बिल्कुल अभी की है. चार दिन पुरानी भी नहीं हुई. ये थर्मल इमेज हर 24 घंटे में बदल जाती है. खट्टर ने जो थर्मल तस्वीर ट्वीट की है उसमें जो हिस्से लाल दिख रहे हैं वो हैं ‘active fire locations’ माने जहां अभी आग लगी हुई है. ये तस्वीर बंटी है 24 घंटे में एक बार, जब सैटेलाइट गुज़रता है तब. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि पराली जली ही नहीं. थर्मल इमेज में वही तस्वीर आएगी जहां आग जलती रहेगी. 24 घंटे से ज़्यादा चलने वाली आग ही इस तस्वीर में आएगी. पंजाब में किसान बड़े काश्तकार हैं. खेत बड़े हैं तो आग लंबी चलती है. हरियाणा में किसान छोटे काश्तकार हैं. कम ही किसानों के पास उतनी ज़मीन है जहां आग 24 घंटे से ज़्यादा चल सके.

ये वो तस्वीर है जो अभी की है और इसमें एक्टिव फ़ायर ज़ोन हरियाणा में नहीं दिखाई दे रहे हैं
ये वो तस्वीर है जो अभी की है और इसमें एक्टिव फ़ायर ज़ोन हरियाणा में नहीं दिखाई दे रहे हैं

दूसरी चीज़ हरियाणा और पंजाब दोनों जगह पराली जलाने पर सज़ा का प्रावधान है. कोर्ट और NGT का आदेश है. लेकिन जब पराली जलाने का सटीक समय था तब हरियाणा का ध्यान चुनावों पर था. किसान अपना काम किए जा रहे थे. लेकिन पंजाब सरकार का कहना है कि पंजाब में पराली के ख़िलाफ़ ताबड़तोड़ अभियान चलाया गया है. अब नए लेकिन वही पुराने मुख्यमंत्री खट्टर ने कहा है कि चंडीगढ़ में उनके आवास से विधान सभा तक लगभग 2 किलोमीटर का रास्ता पर्यावरण जागरूकता के लिए मार्च करते हुए कवर करेंगे. उनके हाथ में स्लोगन होगा ‘पर्यावरण बचाओ-भविष्य बनाओ.’

नए-नए उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि पीएम मोदी को चिट्ठी लिख रहे हैं कि पर्यावरण को बचाने के लिए कुछ करें. पराली का पर्मानेंट उपाय निकालें.

# क्या कहता है पंजाब?

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि ‘प्रदूषण के लिए अकेले पंजाब को दोष नहीं दिया जा सकता. हवा का बहाव और पराली से प्रदूषण हो रहा है. लेकिन पंजाब इसके लिए पूरी तरह ज़िम्मेदार नहीं है.’ 3 नवंबर को अमरिंदर सिंह ने कहा कि ‘पराली जलाने वाले किसानों के ख़िलाफ़ सख्त कार्यवाही की जा रही है.’

1 नवंबर तक 20 हज़ार 7 सौ 29 केस पराली जलाने के सामने आए और 3 हज़ार किसानों पर ऐक्शन लिया भी गया. अमरिंदर सिंह के हिसाब से पंजाब सरकार के इसी ऐक्शन की वजह से पराली जलाने की घटनाओं में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई है. पिछले साल पराली जलाने के 49 हज़ार केस सामने आए थे. पंजाब सरकार कह रही है कि पराली जलाए जाने के ख़िलाफ़ बेहद सख्त है. किसानों पर पंजाब सरकार जुर्माना लगा रही है. अब तक 11 हज़ार 2 सौ 86 जगहों पर छापा मारा गया है. किसानों के डेढ़ हज़ार से ज़्यादा मामलों में जुर्माने के तौर पर पंजाब सरकार ने 41 लाख रूपए वसूले हैं. साथ ही पराली जलाए जाते अगर किसान पकड़ा गया तो उसके खसरा माने ज़मीन के काग़ज़ पर लाल निशान लगा दिया जा रहा है. इससे किसान को सरकारी योजनाओं का कोई फ़ायदा नहीं मिलेगा. पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने भी किसानों से 62 लाख रूपए का जुर्माना वसूला है.

अमरिंदर सिंह ने कहा कि ‘पंजाब से सटे हुए पाकिस्तान के इलाकों में भी पराली जमकर जलाई गई है. वहां से भी राख उड़कर इस तरफ़ आ ही रही है.’

पराली जलाने से हरियाणा और पंजाब में भी हवा इतनी ज़हरीली हो गई है कि अब सरकारें बैठकर तमाशा
पराली जलाने से हरियाणा और पंजाब में भी हवा इतनी ज़हरीली हो गई है कि अब सरकारें बैठकर तमाशा देख रही हैं और लोगों का दम घुट रहा है.

# समस्या भारी है ये पराली

इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (IARI) ने 2012 में अनुमान लगाया था कि प्रतिवर्ष 50 से 55 करोड़ टन फसल अवशेष देश में निकलता है. इनमें धान की फसल से निकलने वाले अवशेष की हिस्सेदारी 36 पर्सेंट और गेहूं की 26 फीसदी है.  2016 कानपुर आईआईटी की रिपोर्ट बताती है कि प्रतिवर्ष देश में कुल 9 करोड़ टन फसल अवशेष जलाया जाता है. जबकि पंजाब और हरियाणा में करीब 80 फीसदी धान से निकला फसल अवशेष खुले खेत में जलाया जाता है.

# तो हल क्या है?

लम्बे समय से पर्यावरण पत्रकारिता कर रहे विवेक मिश्रा की एक रिपोर्ट है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में 2013 में विक्रांत तोंगड़ ने एक याचिका दाखिल की थी. याची का आरोप था कि 2014 में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने पंजाब, यूपी, हरियाणा के मुख्य सचिवों को चिट्ठी लिखकर अपने यहां फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाने के लिए कहा था. इसके बाद संबंधित राज्यों ने अधिूसचना जारी कर फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाई थी. इन आदेशों पर अमल नहीं हो रहा. इस याचिका पर लंबी सुनवाई के बाद 5 नवंबर  2015 को एनजीटी ने किसानों पर जुर्माना लगाने और जागरुकता फैलाने का आदेश दिया था. 10 दिसंबर 2015 को एनजीटी ने याचिका पर फैसला सुनाया. फैसले में NGT ने पराली रोकने के लिए कई उपाय सुझाए.

एनजीटी ने संबंधित सरकारों को 2 एकड़ से कम खेत वाले किसानों को पराली निस्तारण के लिये मुफ्त में मशीन मुहैया कराने का आदेश दिया था.  2 एकड़ से 5 एकड़ तक खेत रखने वाले किसानों को 5000 रुपये में मशीन मुहैया कराने और 5 एकड़ से ज्यादा जमीन रखने वाले किसानों को 15,000 रुपये में मशीन मुहैया कराने के आदेश दिए गए थे. अभी तक इन आदेशों पर अमल नहीं हो पाया है.  किसानों का कहना है कि किसान पराली को उर्वरक में बदलने वाली ‘हैप्पी सीडर मशीन’ खरीदने की स्थिति में नहीं है. हैप्पी सीडर मशीन 70 हजार रुपए की लागत में तैयार हो जाती है. यही मशीन 1 लाख 75 हजार रुपए में किसानों को बेची जाती है. अगर सरकार किसानों को 25-30 प्रतिशत सब्सिडी देती भी है तो भी गरीब किसान उसे नहीं खरीद सकता. और नतीजा ये है कि पराली पहले भी जल रही थी, पराली अब भी जल रही है और अगर किसानों को मशीनें नहीं मिलीं तो पराली आगे भी जलती ही रहेगी.


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