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कोरोना काल में पुणे के इन ऑटो ड्राइवर्स की ''जुगाड़ एंबुलेंस'' कमाल कर रही है

“उम्मीद पर ही दुनिया क़ायम है.” कितनी क्लिशे कितनी घिसी पिटी बात लगती है न ये?

अंग्रेज़ी में E सबसे ज़्यादा यूज़ होने वाला अक्षर (letter) है. ज़रा अपने कंप्यूटर के की बोर्ड पर नज़र डालिए, E वाली key सबसे ज़्यादा घिसी हुई मिलेगी आपको. शायद उस key के ऊपर लिखा अक्षर भी ग़ायब हो चुका हो. लेकिन फिर भी वो key, हमेशा की तरह E ही टाइप करेगी. तो, कोई भी चीज़, तभी घिसती है, तभी क्लिशे होती है, जब उसे बार-बार इस्तेमाल किया गया हो, बोला गया हो, लिखा गया हो. जब हर बार वो उतनी ही सच हो, जितनी पहली बार थी. जब घिस जाने के बावज़ूद भी उसका वही अर्थ निकले. जैसे E वाली key.

सोचिए न, इस दुनिया में कितनी पीड़ाएँ, कितने बिछोह, कितने दुःख और कितनी ही आपदाएं हैं. लेकिन फिर भी यदि किसी शै के चलते ये दुनिया रहने लायक़ है, तो वो है उम्मीद. और इसलिए ही हमें बार-बार दोहराना चाहिए कि “उम्मीद पर ही दुनिया क़ायम है.” ये हैशटैग रोज़ सुबह ट्रेंड होना चाहिए. ये एक जाप हो जाना चाहिए 108 बार लगातार उच्चरित किए जाने के वास्ते. मोबाइल की कॉलर ट्यून और सुबह पौने छह बजे का अलार्म हो जाना चाहिए ये. हर सुखांत कथा का उनवान और हर कविता का क्षेपक होना चाहिए ये. आज से कोई सेलिब्रिटी अगर ऑटोग्राफ़ दे तो नीचे लिखा करे: उम्मीद पर ही दुनिया क़ायम है.

और इस भीषण महामारी में भी हमारी आपकी दुनिया अगर पूरी तरह बियाबां न हुई, तो ‘कईयों’ के द्वारा अपने कार्यों के माध्यम से इसे दोहराते रहने के चलते. ‘कईयों’… जो कोलाज है, लोगों, संगठनों, संस्थाओं की और मुहीमों का. हमेशा की तरह आज की ‘उम्मीद की बात’ में भी हम इसी कोलाज के सात रंग लेकर आए हैं. चलिए शुरू किया जाए.

# उम्मीद की बात # 1

पहली ख़बर हरियाणा से. जहां ऑक्सीजन सिलेंडर रिफ़िलिंग की होम डिलीवरी की जा रही है. और ये सुविधा हरियाणा के किसी शहर का इलाक़े में नहीं, पूरे राज्य में चालू है. इसके लिए मरीज़ या उसके तीमारदारों को पहले oxygenhry.in (ऑक्सीजन एच आर वाय डॉट इन) पर जाकर ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए अप्लाई करना होगा. जैसे ही जरूरतमंद मरीज इस पोर्टल पर ऑक्सीजन सिलेंडर रिफ़िलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन करेंगे, उनकी एप्लिकेशन संबंधित NGO और रेड क्रॉस सोसाइटी को दिखाई देने लगेगी. यदि रेड क्रॉस सोसाइटी या NGO में से कोई भी आवेदक के अनुरोध को स्वीकार करता है, तो आवेदक के दिए गए मोबाइल नंबर पर SMS के माध्यम से जानकारी पहुंच जाएगी. इस मुहीम के लिए दो हेल्पलाइन नम्बर भी ज़ारी किए गए हैं. जहां पर कॉल करके आप इस मुहिम के बारे में पूरी जानकरी प्राप्त कर सकते हैं.

# उम्मीद की बात # 2

दूसरी उम्मीद की ख़बर राजस्थान से. भेजी है टीवी टुडे नेटवर्क के संवाददाता भारत भूषण जोशी ने. यहां के पाली शहर के बांगड़ हॉस्पिटल में तायरा बानो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी लगी हुई हैं. तायरा अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में मरीजों की ट्रॉली लाती-ले जातीं नजर आती हैं. रमज़ान के दौरान तायरा ने रोज़े भी रखे हुए थे. तायरा के अनुसार उन्होंने पिछले दो महीनों में अस्पताल से जितनी मौतें देखी हैं उतनी पूरे जीवन में नहीं देखीं. कई बार रात की शिफ्ट में ड्यूटी आई तो उन्हें अस्पताल में ही सेहरी करनी पड़ी. तायरा बानो के लिए मरीजों की सेवा करना ख़ुदा खुदा की इबादत करने जैसा है.

Ummed Ki baat

# उम्मीद की बात # 3

तीसरी उम्मीद की बात बिहार के कैमूर जिले से. यहाँ के भभुआ और मोहनिया इलाक़े में प्रशासन द्वारा सामुदायिक किचन की स्थापना की गई है. इस किचन का उद्देश्य गरीब मज़दूरों को दो टाइम खाना खिलाना है. सामुदायिक किचन का लाभ लेने वालों को खाने का क्वालिटी अच्छी लगी साथ ही यहाँ पर कितने लोगों को भोजन दिया जाएगा, इसकी कोई लिमिट नहीं है. संबंधित अधिकारी भी इन दोनों सामुदायिक रसोईयों को लगातार मॉनिटर करते रहते हैं.

# उम्मीद की बात # 4

चौथी उम्मीद की बात बैंगलुरु से. यहां के BMTC (बैंगलुरु मेट्रोपोलिटेन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन) ने ‘आक्सीज़न ऑन व्हील’ मुहिम के लिए कई NGOs के साथ हाथ मिलाया है. मुहिम के अंतर्गत BMTC ने अपनी एक बस को एक ‘आक्सीज़न बैंक’ के तौर पर मॉडिफ़ाई किया गया है. बस में 2 आक्सीज़न कंसंट्रेटर और 4 सिलेंडर्स लगे हैं. ये बस एक बार में 6 मरीज़ों को एकोमोडेट कर सकती है. बस सुबह साढ़े दस बजे से शाम के छः बजे तक यहाँ के विक्टोरिया हॉस्पिटल में पार्क रहा करेगी और इसमें मिलने वाली सारी सुविधाएँ मुफ़्त होंगी. हालांकि ‘आक्सीज़न ऑन व्हील’ की सुविधा पाने के लिए रोगी के परिजनों को हेल्पलाइन नम्बर (9731007191) पर कॉल करके रोगी को रजिस्टर करना होगा और ये सुविधा ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर मिला करेगी.

Banglore

BMTC ज़ल्द ही कुछ और बसों को भी मॉडिफ़ाई करके अपनी इस मुहीम में शामिल करने जा रही है. ‘आक्सीज़न ऑन व्हील’ सरीखी सेवाएँ इससे पहले चेन्नई और हरियाणा में भी लॉन्च की जा चुकी हैं और मरीज़ों के लिए बहुत बड़ी उम्मीद की बात साबित हो रही हैं.

# उम्मीद की बात # 5

पुणे के कुछ ऑटो ड्राइवर्स के इनिशिएटिव का नाम है “जुगाड़ एंबुलेंस”. काफ़ी कुछ तो आपको नाम से समझ में आ गया होगा, कि ये इनिशिएटिव क्या होगा. दरअसल इस मुहिम से जुड़े ऑटो ड्राइवर्स ने अपने ऑटो में ऑक्सीजन सिलेंडर फ़िट करवाया हुआ है और ये कोरोना रोगियों को अस्पतालों में ले जाने की सेवाएं दे रहे हैं. इस सुविधा के लिए ये चालक मरीजों से अतिरिक्त किराया नहीं लेते हैं. बेशक ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए 100 रुपये प्रति घंटे का छोटा सा अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है. लेकिन ऐसे मामलों में, जहां रोगी या उनके रिश्तेदार गरीब हैं, ये ऑटो चालक सवारियों से वो भी नहीं लेते. साथ ही आने जाने का किराया भी छोड़ देते हैं. कुछ ऐसी ही सुविधा की जानकरी हमें उत्तराखंड पुलिस के वेरिफ़ाइड FB पेज से भी मिली. जिसके अनुसार, देहरादून में पुलिस ने ’मिशन हौसला’ के तहत ऑटो एंबुलेंस सेवा शुरू की है. यहां भी पुणे की तरह ही ऑटो में ऑक्सीजन सिलिंडर व अन्य उपकरण लगाए गए हैं. साथ ही किसी इमरजेंसी से निपटने के लिए ऑटो चालकों को विशेषज्ञ डॉक्टरों ने प्रशिक्षण भी दिया है. पहले ही दिन देहरादून पुलिस ने कुल 03 व्यक्तियों को ऑटो एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया है. फ़िलहाल ’मिशन हौसला’ मुहिम में दो ऑटो हैं लेकिन जल्द ही इसे अन्य थाना क्षेत्रों में भी शुरू किए जाने की प्लानिंग है.

# उम्मीद की बात # 6

छठी ख़बर विदेश से. विदेशों में रहने भारतीय छात्र कोविड मामलों में वृद्धि के चलते भारत में रहने वाले अपने परिवार और दोस्तों के लिए काफ़ी चिंतित हैं. उनका कहना है कि इस समय वे खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैं. लेकिन फिर भी अपनी तरफ़ से जितना हो रहा है ये छात्र करने का प्रयास कर रहे हैं. अमेरिका से भारतीय छात्रों के एक समूह ने 2,000 से अधिक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और अन्य चिकित्सा आपूर्ति भारत में भेजी हैं.

Cororna

# उम्मीद की बात # 7

आज की आख़िरी उम्मीद की बात हमें मिली इंडियन एक्सप्रेस से. ओडिशा के रंजन साहू कोलकाता की एक एक गारमेंट फ़ैक्ट्री में काम करते थे. पिछले साल के लॉकडाउन के चलते वो फ़ैक्ट्री बंद हुई तो रंजन की भी नौकरी चली गई. क्लास टेंथ में ड्रॉपआउट रंजन को तब तक गारमेंट सेक्टर का 22 साल का अनुभव हो चुका था. अपने इसी अनुभव के दम पर केन्द्रापड़ा, ओडिशा में अपनी एक गारमेंट यूनिट लगा ली. नाम रखा ‘रॉयल ग्रीन गारमेंट कंपनी’. आज उनकी इस कंपनी में आसपास के 70 ऐसे युवा जॉब करते हैं, जिनकी जॉब भी रंजन की तरह ही लॉकडाउन के चलते चली गई थी. परसों की उम्मीद की बात में हमने आपको कश्मीर की निलोफ़र मंज़ूर के बारे में बताया था. जिन्होंने घर में सेनेटाइज़र और हैंड वॉश का कुटीर उद्योग खोलकर 20 लड़कियों को रोज़गार दिया था.

इन दिनों सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में चल रही हैं स्वास्थ्य सुविधाएं और रोज़गार. इन दोनों में क्या कॉमन है? यही कि ये दोनों सरकार को सुनिश्चित करनी थीं. सोचिए अगर वो नहीं कर पाए तो फिर भारत-भाग्य-विधाता कौन हुआ? उम्मीद की बात किसने की?

# उम्मीद का संदेश-

‘उम्मीद के संदेश’ में आज सुनते हैं गौरव राजपूत को. ‘बिग ओ हेल्थ’ के को फ़ाउंडर हैं. ये ‘बिग ओ हेल्थ’ एक ऐप है. जिसे आसानी से प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है. इसे डाउनलोड करने के बाद इसके कोविड हेल्पलाइन में जाकर आप मुफ्त में डॉक्टर की परामर्श ले सकते हैं. इस ऐप पर करीब 150 डॉक्टर्स मुफ्त में मरीज़ों को परामर्श देते हैं.

# अंत-

ईद… महीने भर के कठिन रोज़ों के बाद आया ईद का त्योहार. कई बार ये इंतज़ार कुछ लम्हे और बढ़ जाता है. चांद की ख़ातिर. यूं उम्मीद की जीत ही दरअसल ‘ईद’ है. और ‘ईद के चाँद’ सा सुंदर संयोग देखिए कि उम्मीद शब्द में अंत में भी एक ‘ईद’ है. आप सभी को ईद की बहुत-बहुत मुबारकबाद, कि ‘चांद की उम्मीद’ पर ही ईद क़ायम है. (ये वाली बात शायद क्लिशे नहीं थी. चाहे उम्मीद और ईद दोनों में ही अंग्रेज़ी का घिसा हुआ लैटर E क्यूं न आया हो.) अलविदा!


वीडियो: उम्मीद की बात: फ्री कोचिंग सेंटर चलाने वाले लड़के अब लोगों को ऑक्सीजन भी उपलब्ध करा रहे

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