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नोलन की अगली फिल्म, जिसके बजट में इतने ज़ीरो हैं कि संबित पात्रा भी गिन नहीं पाएंगे

अच्छे सिनेमा तक जाने का क्या रास्ता है? समकालीन से क्लासिक की ओर. आज के समय के उन फिल्ममेकर्स को एक्सप्लोर करना जो लगातार सेट रुल्स को पीछे धकेलते रहते हैं. जो मानते हैं कि सिनेमा एक लगातार ईवॉल्व होता मीडियम है. इसलिए कभी उनका काम पुराना नहीं लगता. जिनका काम इंस्पायर करता है. हैरान करता है. आज के समय में अपने सिनेमा से दर्शकों को सम्मोहित करने वाले फिल्ममेकर्स में से एक हैं क्रिस्टोफर नोलन.

वो क्रिस्टोफर नोलन जिनकी फिल्मों में समय खुद एक किरदार बना दिखाई देता है. वो क्रिस्टोफर नोलन जो सुपरहीरो फिल्म बनाने पर आएं, तो ऐसी बनाएं कि बच्चों से ज्यादा वो बड़ों के लिए रेलवेंट हो. हमेशा नोलन की फिल्म आने के बाद ये एंटीसिपेशन बढ़ जाती है कि अब ये आगे क्या करने वाले हैं. कहां जाकर रुकेंगे. उनकी आखिरी फिल्म थी ‘टेनेट’. जो टाइम इंवरज़न पर बेस्ड थी. समय को उलटा चलाने के बाद देखने लायक था कि नोलन का अगला प्रोजेक्ट क्या होगा. अब उसका भी जवाब मिल गया है. हाल ही में नोलन की अगली फिल्म से जुड़े कुछ अपडेट्स सामने आए हैं. जो किसी को भी उनकी नई फिल्म के लिए एक्साइटेड करने के लिए काफी होंगे. जानते हैं उनके नए प्रोजेक्ट में ऐसा क्या है जिसे हर सिनेप्रेमी बिना मिस किए देखेगा.

Spotlight (1)


# वो हिस्ट्री, जो स्कूलों में नहीं पढ़ाई गई

सबहेड सुनकर ये मत सोचिएगा कि यहां मुग़ल और गैर मुग़ल हिस्ट्री की बात हो रही है. ये नोलन की फिल्म है. कोई ट्विटर डिबेट नहीं. खैर, अपने नए प्रोजेक्ट से पहले भी नोलन हिस्ट्री पढ़ा चुके हैं. 2017 में आई फिल्म ‘डनकर्क’ के ज़रिए. क्या कमाल की एडिटिंग और साउंड डिज़ाइन थी फिल्म की. ‘डनकर्क’ सेकंड वर्ल्ड वॉर के इवेंट्स पर आधारित थी. उनकी नई फिल्म सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद से टेक ऑफ करती है. ऐसे नरसंहार की ओर, जिसने मानवता को डराया भी और शर्मसार भी किया.

फिल्म पर बात करने से पहले एक शख्स के बारे में जानना ज़रूरी है. जूलियस रॉबर्ट ओपनहाइमर. जिनका नाम गूगल करने पर सबसे पहले उनका कहा भगवद गीता वाला कोट सामने आता है,

Now I am become death, the destroyer of worlds.

16 जुलाई, 1945 का दिन था. अमेरिकी वैज्ञानिकों का एक ग्रुप न्यू मैक्सिको में एक टेस्ट करने जा रहा था. दुनिया के पहले सफल अटॉमिक बॉम्ब एक्सप्लोज़न का टेस्ट. इसे गुप्त रूप से किया जा रहा था. प्रोजेक्ट की डिटेल बाहर न लीक हो जाएं, इसलिए इसे ‘Manhattan Project’ के नाम से चलाया जा रहा था. इस पूरी इक्वेशन में ओपनहाइमर फिट हुए टेस्टिंग से ठीक तीन साल पहले. ओपनहाइमर एक अमेरिकी थ्योरेटिकल फिज़िसिस्ट थे. जिन्हें अमेरिकी सरकार ने 1942 में कॉन्टैक्ट किया. अपने सीक्रेट प्रोजेक्ट के लिए. जो आगे चलकर ‘Manhattan Project’ कहलाया. अपने इस सीक्रेट प्रोजेक्ट के ज़रिए अमेरिकी सरकार अटॉमिक बॉम्ब डिवेलप करना चाहती थी. ताकि अगर दूसरे विश्व युद्ध में उनकी स्थिति डगमगाने लगे, तो उनके पास एक छुपा इक्का हो.

प्रोजेक्ट के अंतर्गत अमेरिका के विभिन्न स्टेट्स में सीक्रेट लैब्स बनाई गई. इन्हीं में से एक लैब थी न्यू मैक्सिको की लॉस अलमॉस लैबोरेट्री. जिसकी पूरी ज़िम्मेदारी ओपनहाइमर के सुपुर्द कर दी गई. ओपनहाइमर ने फिज़िक्स की फील्ड के बेहतरीन दिमागों को एक छत के नीचे इकट्ठा किया. और अटॉमिक बॉम्ब डिवेलप करने पर काम करना शुरू कर दिया. लॉस अलमॉस लैब अपने प्रयोग में सफल रही. ये भी एक वजह है कि ओपनहाइमर को ‘फादर ऑफ द अटॉमिक बॉम्ब’ की संज्ञा दी जाती है.

nolan
‘Manhattan Project’ से जुड़े वैज्ञानिक.

अब फिर से लौटते हैं 16 जुलाई, 1945 की तारीख पर. दूसरा विश्व युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ था. हालांकि, एलाइड फोर्सेस ने यूरोप में अपनी जीत घोषित कर दी थी. लेकिन जापान ने अभी भी उनके सामने घुटने नहीं टिकाए थे. जैसा अमेरिका चाहता था, वैसा भी हुआ. जापान ने घुटने टिका दिए. लेकिन पहली अटॉमिक बॉम्ब टेस्टिंग के करीब डेढ़ महीने बाद. और एक बड़ी कीमत चुकाने के बाद. जब रॉबर्ट ओपनहाइमर ने पहली बार लॉस अलमॉस लैब के अंदर से आसमान में दूसरा सूरज फटता देखा तो वो समझ गए. कि दुनिया अब पहले जैसी नहीं रहने वाली. टेस्टिंग के अनुभव को याद कर उन्होंने आगे बताया कि उनके कुछ साथी सफल परीक्षण देख खुश हुए. कुछ रोने लगे. ज्यादातर के चेहरों पर खामोशी पसरी थी. उसी दौरान ओपनहाइमर को भगवद गीता की वो लाइन याद आई थी.

ओपनहाइमर का कथन सत्य साबित हुआ. कि 16 जुलाई, 1945 के बाद दुनिया पहले जैसी नहीं रहने वाली. इसका नमूना दुनिया ने उसी 06 अगस्त को देख लिया. जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर अटॉमिक बॉम्ब ड्रॉप किया. जिसकी बदौलत 90 प्रतिशत शहर का सफाया हो गया. करीब 80,000 से ज्यादा लोग मारे गए. लेकिन अमेरिका सिर्फ यहीं नहीं रुका. हिरोशिमा पर बॉम्ब गिराने के तीन बाद ही ठीक वैसा ही हमला जापान के दूसरे शहर नागासाकी पर भी किया गया. जहां 40,000 लोग मारे गए. और आगे चलकर लाखों अटॉमिक बॉम्ब की रेडिएशन का शिकार होकर मारे गए. इतनी भारी क्षति झेल चुके जापान ने समर्पण कर दिया. अमेरिका विजयी रहा. लेकिन किस कीमत पर.

ओपनहाइमर 4
क्या ओपनहाइमर को परमाणु बम बनाने वाला राक्षस समझा जाए या वो इंसान जो अपनी भूल सुधारना चाहता था?

जब जापान पर हुई भयावह त्रासदी की खबर ‘Manhattan Project’ के वैज्ञानिकों के पास पहुंची, तो वे खुद से सवाल करने लगे. कि उन्होंने कैसे राक्षस को जन्म दे दिया. ऐसे ही सवाल लेकर ओपनहाइमर तब के अमेरिकी राष्ट्रपति रहे हैरी एस ट्रूमन के पास पहुंचे. वो चाहते थे कि परमाणु हथियारों को अंतरराष्ट्रीय कंट्रोल के तहत लाया जाए. ऑस्ट्रेलियन लेखक और इतिहासकार पॉल हैम अपनी किताब ‘Hiroshima Nagasaki: The Real Story of the Atomic Bombings and Their Aftermath’ में बताते हैं कि ट्रूमन ने ओपनहाइमर की बात मानने से साफ इनकार कर दिया. ओपनहाइमर ने कहा कि वो इसके बारे में कुछ करना चाहते हैं. क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके हाथ लाखों लोगों के खून से सने हैं. इसपर ट्रूमन ने जवाब दिया कि खून मेरे हाथों पर है. मुझे उसकी चिंता करने दो. इतना कहकर उन्होंने ओपनहाइमर को धक्के मारकर अपने ऑफिस से बाहर निकाल दिया.

बताया जाता है कि ओपनहाइमर को भविष्य के गर्भ में पल रही संभावना का डर था. वो संभावना जहां परमाणु हथियारों से जंग लड़ी जाएगी. ओपनहाइमर सुनिश्चित करना चाहते थे कि ऐसा भविष्य कभी न आए. इसलिए जब 1949 में यूएस अटॉमिक एनर्जी कमिशन हाइड्रोजन बॉम्ब विकसित करने की कोशिश कर रहा था, तो ओपनहाइमर ने उन्हें अप्रोच किया. दरख्वास्त की कि कमिशन ऐसा कदम न उठाए. यहां बता दें कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद परमाणु हथियारों का सारा ज़िम्मा ‘Manhattan Project’ की जगह यूएस अटॉमिक एनर्जी कमिशन के हाथों में आ चुका था. कमिशन ने ओपनहाइमर की बात नहीं मानी. हाइड्रोजन बॉम्ब बनाया भी. और उसे 1952 में टेस्ट भी किया. इस दौरान ओपनहाइमर लगातार सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे थे.

काल या प्रांत कोई भी हो, सरकार के खिलाफ किए विरोध की कीमत चुकानी ही पड़ती है. ओपनहाइमर ने भी चुकाई. उस समय में अमेरिकी सरकार कम्युनिस्ट विचारधारा को कुचलने पर तुली थी. इसलिए जिस भी इंसान का किसी कम्युनिस्ट विचारधारा रखने वाले इंसान या संस्था से कोई लिंक मिल जाता, फिर उसका जीना दुश्वार कर देती. मतलब उस समय किसी की ज़िंदगी बर्बाद करने का सबसे आसान तरीका था कि उसे कम्युनिस्ट डिक्लेयर कर दो. ओपनहाइमर के साथ भी सरकार ने यही किया. उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया. सरकार के इस लांछन का बोझ ओपनहाइमर अपनी मृत्यु के समय तक उठाते रहे. जब लोग उनकी मृत्यु के बाद तक उन्हें सोवियत संघ का जासूस समझते थे.

Communist
ओपनहाइमर को कम्युनिस्ट बताकर उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया.

क्या ओपनहाइमर वो शैतान थे जिसने इतने विनाशकारी राक्षस को जन्म दिया. या फिर वो इंसान थे, जो समझ चुका था कि उसकी रचना इस दुनिया का क्या कर सकती है. नोलन अपनी नई फिल्म में ओपनहाइमर की कहानी सामने लाने जा रहे हैं. फिल्म ओपनहाइमर के ‘Manhattan Project’ वाले दिनों से शुरू होगी. और दिखाएगी कि कैसे उन्होंने दुनिया का पहला अटॉमिक बॉम्ब बनाया. नोलन ने खुद ही फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखा है. बताया जा रहा है कि फिल्म की शूटिंग 2022 के शुरुआती महीनों में शुरू की जा सकती है.

नोलन ओपनहाइमर को कैसे पोर्ट्रे करेंगे, ये देखने लायक होगा. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि नोलन ने किलीयन मर्फी को फिल्म में एक मेजर रोल ऑफर किया है. जो लोग नोलन की फिल्में क्लोज़ली फॉलो नहीं करते, वो किलीयन को ‘पीकी ब्लाइंडर्स’ के थॉमस शैलबी के तौर पर पहचानते हैं. बाकी नोलन की फिल्में देखने वाले किलीयन को ‘बैटमैन बिगिंस’, ‘द डार्क नाइट राइज़ेस’, ‘इंसेप्शन’ और ‘डनकर्क’ जैसी फिल्मों में देख चुके हैं.

नोलन की ये फिल्म आने से पहले ही इतनी भयंकर चर्चा में क्यों है, अब उसकी दूसरी वजह बताते हैं.


# क्या हुआ तेरा वादा, वो कसम वो इरादा

2002 में नोलन की फिल्म आई थी. ‘इनसोमनिया’. उसके बाद आई उनकी फिल्मों में एक चीज़ कॉमन तौर पर देखने को मिलेगी. कि उनकी फिल्मों का डिस्ट्रिब्यूटर वॉर्नर ब्रदर्स पिक्चर्स था. 2020 में आई उनकी आखिरी फिल्म ‘टेनेट’ को भी वॉर्नर ब्रदर्स ने ही डिस्ट्रिब्यूट किया. वॉर्नर ब्रदर्स ने नोलन की ‘प्रेस्टीज़’, ‘इंसेप्शन’ से लेकर ‘बैटमैन सीरीज़’ भी डिस्ट्रिब्यूट की थी. वो ‘बैटमैन’ सीरीज़ जिसे निर्विवाद रूप से बेस्ट लाइव एक्शन सुपरहीरो फिल्मों में गिना जाता है. वॉर्नर ब्रदर्स और नोलन के बीच कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं था. फिर भी ये पार्टनरशिप मजबूती से चलती रही. लेकिन अब नोलन फैन्स के लिए शॉकिंग न्यूज़ है. क्योंकि नोलन और वॉर्नर ब्रदर्स अलग हो रहे हैं. 19 साल लंबी चली साझेदारी तोड़ रहे हैं.

Nolan Movies
‘द डार्क नाइट’ के सेट पर एक्टर्स को सीन समझाते नोलन. इस फिल्म को वॉर्नर ब्रदर्स ने ही डिस्ट्रिब्यूट किया था.

ओपनहाइमर पर बनी फिल्म को यूनिवर्सल पिक्चर्स डिस्ट्रिब्यूट करेगा. नोलन की सारी शर्तों से यूनिवर्सल को कोई आपत्ति नहीं. वो चाहते हैं कि फिल्म का क्रिएटिव कंट्रोल उनके हाथ में रहे, यूनिवर्सल मान गया. वो 100 मिलियन डॉलर्स के बजट के साथ ओपनहाइमर की कहानी दिखाना चाहते हैं. यानी करीब 730 करोड़ रुपए. यूनिवर्सल को खुल्ला खर्चा करने से भी कोई दिक्कत नहीं. इसके बाद आती है नोलन की सबसे ज़रूरी शर्त. वो चाहते हैं कि फिल्म को एक्सक्लूसिव तौर पर थिएटर्स पर ही रिलीज़ किया जाए. वो भी 45 दिनों की विंडो के साथ. यानी रिलीज़ के 45 दिनों के अंदर स्टूडियो फिल्म को थिएटर से नहीं हटवा सकता. ये शर्त रखने की वजह थी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स. पैंडेमिक में नुकसान से बचने के लिए स्टूडियोज़ कुछ दिनों में ही अपनी फिल्म को थिएटर से समेट देते हैं. जिसके बाद उसे तुरंत स्ट्रीमिंग सर्विस पर रिलीज़ कर दिया जाता है. नोलन नहीं चाहते कि उनकी फिल्म के साथ ऐसा हो. इसलिए वो अपनी फिल्म को सबसे पहले स्क्रीन करने का अधिकार थिएटर्स को ही देना चाहते हैं. डेडलाइन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार यूनिवर्सल ने उनकी ये शर्त भी मान ली है.

ऐसा नहीं था कि वॉर्नर ब्रदर्स से अलग होने के बाद नोलन ने सीधा यूनिवर्सल का रुख कर लिया. बताया जा रहा है कि नोलन की टीम सोनी, एमजीएम और पैरामाउंट जैसे बड़े स्टूडियोज़ के साथ भी बातचीत कर रही थी. स्टूडियो से किसी एग्ज़ीक्यूटिव को नोलन के ऑफिस बुलाकर स्क्रिप्ट पढ़ाई जाती. ताकि कहानी लीक होने का रिस्क न हो. ज्यादातर स्टूडियोज़ को लगा कि ओपनहाइमर की कहानी कमर्शियल स्केल पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाएगी. इसलिए उन्होंने प्रोजेक्ट को बैक करने से मना कर दिया. लेकिन फैन्स को एक सवाल अब तक तंग कर रहा है. कि नोलन आखिर वॉर्नर ब्रदर्स से अलग क्यों हुए. उस स्टूडियो से, जिसने उनकी इतनी बड़ी और कामयाब फिल्मों को बैक किया.

नोलन की फिल्में 1
नोलन मानते हैं कि उनकी फिल्मों का असली मज़ा थिएटर्स में ही है.

नोलन और वॉर्नर ब्रदर्स के रिश्ते में पड़ी खींचतान की दो वजहें बताई जा रही हैं. पहली थी ‘टेनेट’. नोलन चाहते थे कि ‘टेनेट’ को सितंबर में रिलीज़ किया जाए. स्टूडियो ये मानने को तैयार नहीं हुआ. स्टूडियो का मानना था कि उस वक्त तक अमेरिका में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे थे. और वैक्सीनेशन प्रक्रिया भी तेजी से काम नहीं कर रही थी. नोलन और वॉर्नर ब्रदर्स में ‘टेनेट’ की रिलीज़ डेट तय करने पर खींचतान चलती रही. जिसके बाद वॉर्नर ब्रदर्स ने फिल्म को 04 दिसम्बर को अमेरिका के थिएटर्स में उतारा. फिल्म का बिज़नेस सही रहा. फिर भी इसे नोलन की सफल फिल्मों में नहीं गिना जाता. कारण था कि फिल्म की रिलीज़ के बाद वॉर्नर ब्रदर्स को करीब 50 मिलियन डॉलर्स का नुकसान उठाना पड़ा.

कोरोना पैंडेमिक की सीरियसनेस भांपते हुए वॉर्नर ब्रदर्स ने बड़ी फिल्मों से दूरी बनाना बेहतर समझा. अपना ध्यान अपनी स्ट्रीमिंग सर्विस HBO Max की ओर करने का सोचा. और अनाउंस कर डाला कि वो 2021 की अपनी फिल्में स्टूडियो के साथ-साथ HBO Max पर भी रिलीज़ करेंगे. स्टूडियो के इस फैसले पर आए नोलन के बयान ने इस बात को पुख्ता कर दिया कि वो ज्यादा दिन वॉर्नर ब्रदर्स के साथ नहीं रहने वाले. नोलन ने कहा,

हमारी इंडस्ट्री के कुछ सबसे बड़े फिल्ममेकर्स और सबसे अहम स्टार्स रात को सोने जाते हैं. ये सोचकर कि वो सबसे महानतम मूवी स्टूडियो के लिए काम कर रहे हैं. लेकिन उठने पर पता चलता है कि वो सबसे घटिया स्ट्रीमिंग सर्विस के लिए काम कर रहे थे.

नोलन इकलौते फिल्ममेकर नहीं जिन्होंने वॉर्नर ब्रदर्स के अपनी फिल्मों को डायरेक्ट स्ट्रीमिंग सर्विस पर रिलीज़ करने के फैसले पर नाराज़गी जताई हो. डेनि विलनूव की फिल्म ‘डयून’ को वॉर्नर ब्रदर्स ही डिस्ट्रिब्यूट करने जा रहा है. जब डेनि को पता चला कि उनकी फिल्म थिएटर्स के साथ-साथ HBO Max पर भी रिलीज़ होगी, तो वो भड़क उठे. उन्होंने वैराइटी के लिए लिखे कॉलम में HBO Max के लॉन्च को एक फेल्यर बताया. और कहा कि वॉर्नर ब्रदर्स बस किसी भी तरह ऑडियंस का ध्यान अपनी स्ट्रीमिंग सर्विस की ओर खींचना चाहता है.

Dune
‘डयून’, जो अमेरिका के सिनेमाघरों और HBO Max पर एक साथ ही रिलीज़ होगी.

नोलन की फिल्में रिच सिनेमैटिक एक्सपीरियेंस से लबरेज़ रहती हैं. उनकी फिल्मों को देखने का असली मज़ा थिएटर्स पर ही है. सब कुछ सही रहा तो ओपनहाइमर पर बनने वाली उनकी फिल्म की शूटिंग अगले साल के शुरुआती महीनों में शुरू हो जाएगी. जिसके बाद बताया जा रहा है कि फिल्म को 2023 के एंड तक या 2024 के शुरुआत में रिलीज़ करने का प्लान है. नोलन के इस नए प्रोजेक्ट से जुड़े जो भी अहम अपडेट्स आएंगे, हम आप तक पहुंचाते रहेंगे.


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