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BHU का छात्र पुलिस स्टेशन से लापता हो गया, पिता छह महीने से नंगे पांव घूमकर गुहार लगा रहे

छह महीने से यहीं बनारस में हूं. घाट पर रहता हूं. प्रण लिया है कि सालभर तक ऐसे ही रहूंगा. जब तक बेटा नहीं मिल जाता, नंगे पैर ही. मुझे न्यायालय में पूरा भरोसा है. जज साहब ने भी जांच को कहा है. देखिए क्या होता है

ये कहना है प्रदीप त्रिवेदी का. प्रदीप, मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के रहने वाले हैं. बेटा शिव कुमार त्रिवेदी, बीएचयू में बी.एससी. (मैथ्स) का स्टूडेंट था और 12 फरवरी 2020 से लापता है. प्रदीप अपने बेटे को खोजने के लिए 16 फरवरी को बनारस आये. तब से यहीं है. ‘दी लल्लनटॉप’ से बातचीत करते हुए काफी भावुक हो गए. कहने लगे कि या तो मेरा बेटा मर गया, या थाने में इतना टॉर्चर किया गया कि मानसिक संतुलन खो बैठा.

क्या है पूरा मामला

पिता ने बताया कि शिव कुमार ने सालभर आईआईटी, कानपुर में भी पढ़ाई की थी. लेकिन फिर वहां एग्जाम से ठीक पहले बीमार पड़ गया. इसके बाद बीएचयू का इंट्रेंस दिया. यहां एडमिशन मिला और सालभर हॉस्टल में रहा. फिर कैंपस से सटे छित्तूपुर के ‘पंजाबी लॉज’ में कमरा ले लिया. 12 फरवरी, 2020 को अपने पिता से आखिरी बातचीत के बाद शिव का फोन नहीं उठा. 14 फरवरी तक लगातार बातचीत न हो पाने के बाद पिता ने मकान मालिक को फोन किया. पता चला कि शिव के कमरे का ताला खुला है और वो दो दिनों से कमरे पर ही नहीं आया.

पिता 16 फरवरी को बनारस आये और बीएचयू के प्रॉक्टर ऑफिस गए. वहां से लेटर फॉरवर्ड कराया और लंका थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाई. पुलिस ने रिपोर्ट लिखी और पता लगाने का आश्वासन दिया. मामला सोशल मीडिया पर पहुंचा और फिर प्रदीप त्रिवेदी को 19 फरवरी को एक फोन आया. यह फोन था बीएचयू के ही छात्र अर्जुन का. प्रदीप त्रिवेदी ने बताया-

अर्जुन सिंह ने 19 फरवरी को फोन किया और बताया कि आपके बेटे को तो पुलिस लंका थाने ले गई थी. यह भी कहा कि उन्होंने खुद डायल 112 पर फोन करके PRV बुलाई थी. इसके बाद मैंने अर्जुन से सारी जानकारी ली. और दोबारा लंका थाने गया. वहां कहा गया कि चेतगंज थाने जाओ. चेतगंज से मुझे सीर गेट पुलिस चौकी भेज दिया और फिर सीर गेट पुलिस चौकी पर कहा कि कंट्रोल रूम जाओ. जब कंट्रोल रूम से भी कुछ पता नहीं चल सका, तो मैं सारी जानकारी लेकर एसएसपी प्रभाकर चौधरी के पास गया. उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और 112 नंबर के ड्राइवर को बुलाया. पूछताछ करने पर ड्राइवर ने ही बताया कि शिव कुमार को 13 फरवरी की रात साढ़े आठ बजे लंका पुलिस चौकी में छोड़ा गया था.

पीली टीशर्ट में अपने छोटे भाई के साथ शिव
पीली टीशर्ट में अपने छोटे भाई के साथ शिव.

हमने बीएचयू के छात्र अर्जुन से बात की. अर्जुन ने हमें बताया कि उन्होंने 12 फरवरी को शिव को एम्फिथियेटर ग्राउंड के पास देखा. वह नाले में पैर डाले बैठा था. वो उसके पास गए. बात करने की कोशिश की, मगर वह कुछ बोल नहीं पा रहा था. अर्जुन ने बताया-

लगातार बात करने की कोशिश के बाद जब वह नहीं बोला, तो हमने तय किया कि पुलिस को बता देना चाहिए. मैंने डायल 112 पर कॉल किया और पुलिस 10 मिनट में उसे ले गई. लेकिन फिर 19 फरवरी को मैंने फेसबुक पर इस लड़के की तस्वीर देखी. मेरे जानने वाले तस्वीर शेयर कर रहे थे और बता रहे थे कि यह कैंपस से लापता हो गया है. फिर मैंने किसी माध्यम से शिव के पिताजी से संपर्क किया और उन्हें बताया. मैंने उस दिन का मैसेज भी उन्हें दिखाया, जो 112 नंबर पर कॉल करने के बाद मेरे पास आया था.

इस पूरे मामले पर हमने पुलिस से बात की. लंका थाने के वर्तमान प्रभारी महेश पांडेय ने हमसे बातचीत में कहा कि जांच चल रही है. उन्होंने कहा-

वह अभी मिला नहीं है. 16 फरवरी को गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखी गई है. मैंने देखा है. तब से तलाश हो रही है. मैं यहां जुलाई में आया हूं.

हमने क्षेत्राधिकारी भेलूपुर अमरेश सिंह बघेल से बात की. उन्होंने कहा,

मेरी पोस्टिंग जुलाई में हुई. मामला फरवरी का है. पुलिस ने टीवी में, मीडिया में, वॉट्सऐप, फेसबुक आदि में प्रसारण करवाया. पम्फलेट छपवाकर बंटवाया गया है. उसके फेसबुक एकाउंट को भी ट्रैक करने की कोशिश की गई है. लेकिन अभी पता नहीं चल पाया है.

तो क्या शिव मानसिक रूप से बीमार था?

बीएचयू के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर 22 फरवरी को एक ट्वीट किया गया.

ये ट्वीट देखिए-

ट्वीट में कहा गया कि लापता छात्र के परिजनों के अनुसार, उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है. इस बाबत शिव के पिता का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं कहा कि उनका बेटा मानसिक रूप से बीमार है.

अपने पिता(बाएं) के साथ सफेद टीशर्ट में शिव
अपने पिता (बाएं) के साथ सफेद टीशर्ट में शिव.

शिव के पिता के अनुसार, पुलिस उनके लड़के को मानसिक रूप से बीमार बता रही है. हमसे बातचीत में उन्होंने कहा कि 22 फरवरी, 2020 को एसएसपी के कहने के बाद जब वह लंका थाने पर आए, तो यहां के तत्कालीन इंचार्ज भरत भूषण तिवारी मिले. उन्होंने बताया कि लड़का रातभर थाने में था और जब हमने सुबह इसे निकाला, तो उसने कपड़े में पेशाब कर दिया था. वह कुछ बोलता नहीं था, तो हमने उसको छोड़ दिया. उन्होंने आगे कहा-

मेरे लड़के ने 12वीं में रहते हुए आईआईटी की परीक्षा पास कर ली थी. वह बीएचयू में पढ़ता था. अगर वह मानसिक रूप से ठीक नहीं होता, तो क्या वह बीएचयू में पढ़ता? 

अब मामला हाईकोर्ट में है

लापता छात्र के पिता के लगातार संघर्षों के बाद मामला तूल पकड़ने लगा. फिर बीएचयू के छात्रों ने सोशल मीडिया पर मुहिम चलाई. मामले में बीएचयू के ही पूर्व छात्र और इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकील, सौरभ तिवारी ने जनहित याचिका के रूप में हाईकोर्ट से इस पर सुनवाई का अनुरोध किया. हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए 25 अगस्त, 2020 को सुनवाई की.

उच्चन्यायालय के समक्ष डाला गया लेटर पेटीशन
उच्च न्यायालय के समक्ष डाला गया लेटर पिटीशन

25 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और सौमित्र दयाल सिंह कि संयुक्त खंडपीठ ने मामले में सौरभ तिवारी का पक्ष सुना. हमसे बातचीत में सौरभ ने बताया,

मामला हमारे पक्ष में है. माननीय उच्च न्यायालय ने बड़े तल्ख लहजे में सरकारी वकील को डांटा. यह भी कहा कि जरूरत पड़ी, तो जांच सीबीआई को दी जाएगी. दरअसल अदालत की तरफ से वाराणसी के डीएम सहित एसएसपी और लंका थाना प्रभारी से जवाब मांगा गया था, लेकिन बस सीओ की तरफ से पक्ष रखा गया. कोर्ट ने इस बात से नाराज़गी ज़ाहिर की और इसके बाद एसएसपी वाराणसी को व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ पेश होने को कहा है. अगली सुनवाई 3 सितंबर को होनी है.

सौरभ ने हमसे बातचीत में आगे कहा,

मुझे शिव कुमार त्रिवेदी के बारे में बीएचयू के छात्रों ने बताया था. मेरे कुछ जानने वाले बीएचयू के छात्र शिव के पिता के साथ मुझसे मिलने आये. उनकी आर्थिक स्थिति बहुत ठीक नहीं है. मैंने उनकी स्थिति देखी, तो उनका मुकदमा लड़ने का फैसला लिया. इसके बाद मैंने याचिका दायर की. फिलहाल कोर्ट ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है. जब तक इंसाफ नहीं मिल जाता, तब तक हम लड़ते रहेंगे.

तीन सितंबर को क्या हुआ? 

तीन सितंबर की सुनवाई में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शासकीय वकील से कहा कि या तो उस लड़के को ढूंढ कर लाइये या सीबीआई की जांच के लिए तैयार रहिए. न्यायमूर्ति एस. के. गुप्ता और न्यायमूर्ति शमीम अहमद कि संयुक्त खंडपीठ ने इस मामले को सुना. सुनवाई के दौरान एस एस पी वाराणसी अमित पाठक भी मौजूद थे. कोर्ट ने एस एस पी की तरफ से पेश किए गए पर्सनल एफिडेविट पर भी नाराज़गी जाहिर की है. अब इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 22 सितंबर तय की गई है.

‘दी लल्लनटॉप’ इस पूरे मामले में अपनी नज़र बनाए हुए है. किसी भी तरह की जरूरी अपडेट से हम आपको अवगत कराएंगे.


रंगरूट. दी लल्लनटॉप की एक नई पहल. जहां पर बात होगी नौजवानों की. उनकी पढ़ाई-लिखाई और कॉलेज-यूनिवर्सिटी कैंपस से जुड़े मुद्दों की. हम बात करेंगे नौकरियों, प्लेसमेंट और करियर की. अगर आपके पास भी ऐसा कोई मुद्दा है तो उसे भेजिए हमारे पास. हमारा पता है  YUVA.LALLANTOP@GMAIL.COM


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