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'औरतें कॉमेडी करती हैं तो लोगों को हंसने में डाउट होता है'

बीते दिनों कॉमेडियन और स्टैंड अप आर्टिस्ट जैमी लीवर से फोन पर लंबी बातचीत हुई. वही जैमी जो जॉनी लीवर जैसी दिखती हैं. बेटी जो हैं उनकी. लोग कहते हैं न कि सितारों के बच्चों की एंट्री आसान होती है एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में. लेकिन जब खुद स्टार ही न चाहे कि उनकी बच्ची उनके जैसा काम करे? जब स्टार हो जॉनी लीवर जैसा, तो अपने बच्चों को ठोंक-पीट कर कड़क बना दे. कहे पहले खुद को प्रूव करो. हां ऐसे ही हैं जॉनी लीवर. जैमी बताती हैं कि जॉनी सिग्नल पर पेन बेचा करते थे मिमिक्री कर. खैर, बातें ढेर सारी हैं. जो जैमी ने हमसे कीं. खूब ठहाके लगे. सीरियस बातें भी हुई. पोंछ-पांछ के यहां लगा रहे हैं. आप पढ़ो और मजे लो.


 

प्रतीक्षा: हर आर्टिस्ट के होने के पीछे कुछ परिस्थितियां रहती हैं. कुछ कारण, मोटिवेशन. आपकी शुरूआती लाइफ कैसी रही? कैसे लगा ये काम करना है?
जैमी: मैं और मेरा भाई बचपन से जॉनी लीवर को परदे पर देख रहे थे. बच्चों की तरह. लेकिन कभी दिमाग में नहीं आया कि उसी फील्ड में जाना है जिसमें डैडी हैं. और मैं लड़की हूं तो बिलकुल चांस नहीं लगा. लेकिन घर का माहौल ऐसा था कि मुझे और भाई, दोनों को ह्यूमर से बहुत लगाव था. नेचुरली पिक अप करते थे डैड से. स्कूल से घर आती थी तो मां पूछती स्कूल में क्या हुआ. कभी सीधे-सीधे नहीं बताती मैं. टीचर की नकल उतार कर बताती. मिमिक्री का कीड़ा तो था ही. पेरेंट्स नोटिस भी करते थे. पर शुरू में कभी बढ़ावा नहीं दिया. क्योंकि डैड खुद स्ट्रगल कर चुके थे. 14 साल की उम्र से काम कर रहे थे. अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए थे. इसलिए चाहते थे मैं पढूं. और नॉर्मल लोगों की तरह नौकरी करूं. ऐज अ गर्ल मैं सिक्योर हो जाऊं. इसलिए मैंने खूब पढ़ाई की. लंदन से मार्केटिंग की पढ़ाई की. फिर लंदन में ही नौकरी की दो साल तक. अंदर का आर्टिस्ट उछला करता था. पर दबाए रखा उसे. क्योंकि एक अच्छी बेटी का रोल प्ले कर रही थी.

स्कूल में स्टैंड अप ऐक्ट किया करती थी. प्ले वगैरह करती थी. लेकिन ये ध्यान रखा कि ये सब साइड में चले. पढ़ाई पहले. जब नौकरी करते हुए लगा कि अब नहीं हो पाएगा. तो डैड को कह दिया कि कॉमेडी करना चाहती हूं. कहा कि यही मुझे खुश करती है. लेकिन वो इतनी आसानी से नहीं माने. मेरे टेस्ट लिए कई. तब तय किया कि जॉब क्विट करूंगी.

प्रतीक्षा: लोग ऑफ बीट करियर इसी डर से नहीं चुन पाते कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी खत्म हो जाएगी. किसी जॉब में स्क्रीन के सामने खुद को घिसना लाइफ जीने का आसान तरीका होता है. इतनी पढ़ाई करने के बाद यूं नौकरी छोड़ देने में रिस्क नहीं महसूस हुआ?
जैमी: रिस्क था. लेकिन दोबारा नहीं सोचा. क्योंकि अंदर से खुश नहीं थी. रोज का रोना था. नौकरी जैसे पनिशमेंट थी. डेस्क पर ही सोचती रहती थी कि लाइफ में कैसे ह्यूमर लाऊं. लोगों को नोटिस करती थी. कि बॉस कैसे बात कर रहा है. सबकी मिमिक्री करती थी. कहते है न ट्रेजेडी कॉमेडी से निकलती है. तो ये नौकरी मेरे लिए ट्रेजेडी थी. इसी ट्रेजेडी से मेरे लिए कॉमेडी निकली.

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प्रतीक्षा: फिर फाइनली करियर कब शुरू हुआ?
जैमी: पापा लंदन में टूर कर रहे थे. उनका होने वाला था ‘द जॉनी लीवर शो’. उसी दौरान मैंने उनसे कहा कि नौकरी क्विट कर स्टैंड अप करना चाहती हूं. डैड ने थोड़ी देर सोचा. फिर कहा, “ठीक है. मेरा एक हफ्ते में शो है. उसमें 10 मिनट का समय दूंगा. तुम तैयारी करो. उसके पहले मेरे सामने ऑडिशन करोगी. क्योंकि लोग मुझे देखने आएंगे. तुम्हें नहीं. तुम्हें ज्यादा समय दे कर लोगों के साथ फरेब नहीं करना चाहता.” मुझे लगा यही एक मौका है. तैयारी शुरू कर दी. डैड ने मदद की. टेक्निकल बातें बताई. उन्होंने ही पहला ब्रेक दिया. फिर जब मैंने जॉनी लीवर शो में परफॉर्म किया तो लोगों ने खूब तारीफ की. कुछ ने स्टैंडिंग ओवेशन दिया. कुछ ने डैड से कहा आपकी बेटी आपके भी आगे निकलेगी. इससे मुझे तो कॉन्फिडेंस मिला ही. डैड को भी मिला. कि मैं कॉमेडी कर सकती हूं. डैड जिद करने से कभी नहीं मानते. खुद को प्रूव ही इकलौता तरीका था.

फिर जब बॉम्बे आई तो पापा ने पूछा कैसे करोगी. फिर लगा यहां खूब स्ट्रगल है. तो यहां वहां कॉल किया. बॉम्बे में एक नया कॉमेडी क्लब खुला था. वहां 2012 में 7 मिनट का टाइम स्लॉट मिला. और फिर सिलसिला चल पड़ा. क्लब्स में कॉल कर के ही कॉमेडी करती रही काफी समय तक. फिर एक दिन कॉमेडी सर्कस का ऑडिशन दिया. उन्होंने तब कुछ नहीं कहा. घर वापस आ गई. फिर एक फोन आया कॉमेडी सर्कस से. और उन्होंने कहा, पूरे साल कि डेट्स ब्लाक कर लो.

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प्रतीक्षा: क्या लगता है आपको, कॉमेडी को विरासत में पाया या देख कर सीखा?
जैमी: मुझे लगता है नैचुरल है. स्कूल और कॉलेज के जो दोस्त हैं, सब कहते थे कि मुझे कॉमेडी ही करना चाहिए. स्कूल में जब ड्रामों में भाग लेती थी, कभी रियलआइज नहीं किया कि मैं नैचुरली फनी हूं. लोगों ने बताया मुझे. तब पता चला कॉमेडी मुझसे आसानी से निकलती है. आई वाज मेड फॉर दिस. आखिर खून का रिश्ता है कॉमेडी से. खुद को देखती हूं तो आई डोंट फील कि मैंने डैड की है कॉपी की है. कॉमेडी सब नहीं कर पाते. ये टैलेंट बहुत स्पेशल है. आई फील ब्लेस्ड.

प्रतीक्षा: देश के सबसे बड़े कॉमेडियन कि बेटी होना कैसा होता है? घर का माहौल कैसा रहा?
जैमी: चूंकि डैड कॉमेडियन थे, क्रिटिक्स घर में ही मौजूद थे. डैड वाइज भी रीयलिस्टिक हैं. परफेक्शनिस्ट रहे हैं. जैसा कि मैंने बताया मेरा ऑडिशन खुद ही लिया था उन्होंने. जरा सी भी भूल-चूक हो, वो एक्सेप्ट ही नहीं करते. वो आज भी मुझे हर दिन इस बात का एहसास दिलाते हैं कि कॉमेडी करना बहुत सीरियस काम है. आसान नहीं है. वो ये नहीं चाहते बाहर वाले क्रिटीसाइज करें. इसलिए पहला क्रिटीसिज्म घर से आता है. मेरी मां को देखोगे न आप. शोज में आती हैं तो हंसती ही नहीं हैं. हार्ड टू प्लीज हैं. बुरा लगता है तो तो बोल देती हैं. चाहे डैडी हों या मैं, मां हम दोनों की ट्रू क्रिटिक रही हैं. बस यही घर का माहौल है.

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प्रतीक्षा: घर में कैसे इन्सान हैं आप दोनों? रिलेशनशिप ऑफ स्टेज कैसा है?
जैमी: स्टेज पर मैं अकेले परफॉर्म करती हूं पहले. फिर वो अपना करते हैं. साथ में काम करते हैं पर ऐक्ट अलग-अलग. समझ में नहीं अत पापा कब डैड से बॉस बन जाते हैं. और कब बॉस से डैड. पर्सनल और प्रोफेशनल मिक्स होता रहता है. बचकानी हरकतें करती हूं तो लेक्चर मिल जाता है. अपसेट हो जाऊं तो फिर से सॉफ्ट वाले डैडी बन जाते हैं. मुझे उनके रियेक्शन लो लेकर कन्फ्यूजन रहता है हमेशा. लेकिन हर दिन उनसे कुछ नया सीखती हूं, पर्सनल हो या प्रोफेशनल.

प्रतीक्षा: सीरियस सवाल भी हैं कुछ. पर उसके पहले चाहूंगी कि डैड से जुड़ा हुआ कोई मजेदार किस्सा सुनाएं.
जैमी: मैं बचती थी जॉनी लीवर की बेटी कहलाने से. एक्स्ट्रा अटेंशन अच्छा नहीं लगता था. इसलिए छिपती थी डैड के बारे में बातें करने से. मैं कॉलेज में थी. एक दिन दोस्त अपने डैड्स के बारे में बात कर रहे थे. किसी ने बोला उसके डैड बिजनेसमैन हैं. किसी ने कुछ और बताया. मेरी बारी आई. तो मैंने कहा मेरे डैड एंटरटेनमेंट बिजनेस में हैं. लोगों ने कहा लेकिन करते क्या हैं. मैंने कहा उनका नाम जॉनी लीवर है. सबकी शक्लें देखने लायक थी. एक ने शॉक में कहा: हैं! जॉनी लीवर कि शादी हो गयी? उसके बच्चे हो गए? मैंने कहां हां. तो उसने कहा, चल जोक सुना के प्रूव कर. बस, फिर मैंने जोक सुनाए. और सिलसिला चलता रहा.

एक और क़िस्सा है. हमारा असल सरनेम जनुमाला है. मैं लंदन में अपना नाम जैमी जनुमाला लिखा करती थी ऑफिस में. एक बंदा साथ में काम करता था. गुजराती था. एक दिन बोला, “तेरे को मालूम है जोनी लीवर का भी सरनेम जनुमाला है? तेरा कक्का लगता है क्या वो? तेरे को बी कॉमेडी करने का है न? तो अपने कक्का को बोल तेरे को काम दे.” एक दो बार बोला उसने. तो मैंने बड़े आराम से जवाब दिया, “वो मेरा काका नहीं. मेरा बाप है.” वो ऐसा डर कि गया एक हफ्ते तक बात नहीं की. उसे विश्वास ही नहीं हुआ. फिर बॉम्बे में सीक्रेटली कॉमेडी सर्कस के सेट्स पर आया. और मेरी शूटिंग देखी तब यकीन किया. कॉमेडी सर्कस के सेट पर उसने मुझे सॉरी बोला.

डैड ये सारे किस्से बड़े मजे लेकर सुनते हैं. और प्राउड फील करते हैं.

प्रतीक्षा: प्रोफेशनल बातों पर आते हैं. आजकल तो खूब कॉमेडी शो होते हैं टीवी पर. तो कपिल शर्मा, कृष्णा, सुदेश और सभी पॉपुलर नामों में बेस्ट कॉमेडियन कौन लगता है आपको?
जैमी: सुदेश को बहुत एन्जॉय करती हूं मैं. उनकी टाइमिंग की फैन हूं. उनका पंजाबी लहजा बहुत फनी है. कॉमिक टाइमिंग अमेजिंग है. छोटी छोटी चीजों को मरोड़ कर कॉमेडी निकालते हैं वो. उनके शो मुझे बहुत अच्छे लगते हैं. फिर एक अमेरिकी महिला स्टैंडअप आर्टिस्ट हैं. कैरल बर्नेट. 1950s में खुद के शो होते थे. उनकी बहुत बड़ी फैन हूं. फिर उमर शरीफ हैं पाकिस्तान में. क्या प्रेजेंस ऑफ़ माइंड है. ब्रिटिश कॉमेडियन हैं ली एवंस. उनका पेर्मोर्फामांस का स्टाइल बेहतरीन है. और अब कपिल नया ट्रेंड लाये हैं. मैं खूब स्टडी कर रही हूं.

प्रतीक्षा: स्टैंड अप की बात करें तो औरतों के नाम बहुत कम मिलते हैं. टीवी पर देखें तो आप, सुगंधा, भारती हैं जिन्होंने नाम कमाया है.
जैमी: कॉमेडी मेल डॉमिनेटेड इंडस्ट्री रही है. फीमेल परफॉर्म करती हैं तो लोगों को डाउट रहता है. क्या ये फनी होगी. उनके चहरे पर हंसी आने में दो मिनट लग जाते हैं. अरे, इतने सालों से मर्द को देख रहे हैं. फीमेल क्या करेगी? हां ये सही है कि बस हम तीन ही हैं. लेकिन अच्छी बात ये है कि लोगों ने अब शुरू किया है महिला स्टैंड अप को अपनाना. लोग जल्दी बोर होते हैं. उन्हें फ्रेशनेस और ब्रेक चाहिए. जो औरतें लेकर आती हैं. औरतों की डिमांड बढ़ी है. क्वीन नीरजा जैसी फिल्मों को ही ले लो. लोगों को सच में ब्रेक चाहिए. औरतों में भी कॉन्फिडेंस आया है. औरतें एक नई सेंसिबिलिटी लेकर आती हैं. क्योंकि उनकी ऑब्जरवेशन अलग हैं. जसी अदिति मित्तल. उन्होंने औरतों के सेनेटरी नैपिक को लेकर कॉमेडी की. और लोगों ने एक्सेप्ट किया. क्योंकि हमारी ऑडियंस नै है. अब एक लड़की को ले लो. हम बैग में हजारों चीजें कैरी करती हैं. क्यों? ये हम ही समझा सकते हैं. ब्यूटी पार्लर में हमारी क्या समस्या होती है. हम गाड़ी को कैसे क्यों चलाते हैं. चाइल्ड बिर्थ में हमारी क्या तकलीफें होती हैं. ये सब औरतें ही जानती हैं. इस पर वो ही असली कॉमेडी कर सकती हैं. डैड हमेशा कहते हैं. मां असली आर्टिस्ट होती है. हजारों रोल्स प्ले करती है मां. इसलिए औरतों का थॉट प्रोसेस फ्रेश है.

प्रतीक्षा: पिछले दिनों कीकू शारदा को अरेस्ट किया गया. एक कोमेडियन के तौर पर टॉलरेंस के बारे में क्या कहना है आपको?
जैमी: डिफिकल्ट है इंडिया में कॉमेडी करना. यहां बहुत कल्चर हैं. फ्रीडम ऑफ़ स्पीच है. लेकिन सेंटिमेंट का ख्याल करना पड़ता है. इन्हीं से हमारा देश बना है. ओफ्फेंसिव की भी एक ऑडियंस है. AIB को ले लीजिए. हर चीज की ऑडियंस अलग-अलग है. लेकिन हम सिंपल कॉमेडी करते हैं. घरेलू. फंडा है कि प्यार से ताना दो. कभी-कभी बिना सोचे गलती हो जाती है. पर हम हार्श टॉपिक अवॉइड करते हैं. मैं सीख रही हूं. ओफ्फेंसिव लिखने पर मासेज एक्सेप्ट नहीं करते. हमें सबका ध्यान रखना पड़ता है. लेकिन हमारे पब्लिक फिगर्स को भी ध्यान रखना चाहिए. कि वो पॉपुलर हैं तो लोग उनके बारे में बातें करेंगे ही. करेंगे तो चुटकुले बनेंगे. मैं आशा भोसले की मिमिक्री करती हूं. पर ध्यान रखती हूं कि उनको हर्ट न हो. दोनों को थोड़ा-थोड़ा समझना होगा.

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प्रतीक्षा: इंडिया में बॉलीवुड के जरिये ही लोग कॉमेडी को जान पाते हैं. बॉलीवुड के होते देश में स्टैंड अप कि क्या जगह है?
जैमी: अभी जैसे शो हम कर रहे हैं. मैं और डैड. जब हम शो करते हैं. लोगों को समझ में नहीं आता कि हम क्या करेंगे. लोग सोचते हैं कि बाप-बेटी मिल कर कोई स्किट करेंगे. शायद फिल्मों के डायलॉग बोलेंगे. फिल्मों के बाहर वो सोच नहीं पाते. जब वो देखते हैं कि ऑब्जरवेशन से ह्यूमर निकाल रहा है, तब उन्हें पता चला है ये कुछ और ही है. इंग्लिश स्टैंड अप सुनकर, छोटे क्लब देख कर अब लोगों में नॉलेज आ रहा है. एक क्लास में नॉलेज आ रहा है. यही समझाने के लिए डैड ये शो ले कर आए हैं. हांलांकि मासेज के लिए अब भी बॉलीवुड में ही कॉमेडी है. लेकिन वीर दास जैसे लोग भी हैं जो ट्रेंड बदल रहे हैं. कॉमेडी फेस्टिवल कर रहे हैं, पजामा फेस्टिवल नाम का. But there is a long way to it. टीवी में भी नया ट्रेंड आ रहा है. कॉमेडी नाइट्स अगर आपने कभी फॉलो किया हो तो पाएंगे कि कपिल स्टैंड अप के बाद ही अपना शो शुरू करते हैं.

प्रतीक्षा: आपने कहा सुदेश का पंजाबी लहजा उनकी कॉमेडी को बढ़ा देता है. आपको कितनी भाषाएं आती हैं? क्या वर्नैकुलर आने से कॉमेडी को एज मिलता है?
जैमी:  वर्नैकुलर का एज होता है. बिलकुल होता है. मैं कोशिश करती हूं जहां भी परफॉर्म करूं, अब्रॉड भी जाऊं या साउथ में जाऊं, उनके लिए उनकी भाषा में कुछ खास कर सकूं. उसी भाषा में गाऊँ. फोक गाऊं. क्योंकि स्टैंड अप इस अबाउट कनेक्शन. दिल जीतने पड़ने हैं. इंडिया में वैरायटी है. और इसी वैरायटी से कॉमेडी बनती है. ज्यादा से ज्यादा भाषा इन्क्लूड करने कि कोशिश करती हूं. एज तो रहता है पर मैंने कभी बैरियर नहीं फील किया.

प्रतीक्षा: तो आगे का क्या प्लान है?
जैमी: बस बहुत सारे शोज करने हैं. किस-किस को प्यार करूं का एक्सपीरियंस अच्छा था. और फिल्में करना चाहूंगी. फीमेल कॉमेडियन के तौर पर खुद को प्रूव करना चाहती हूं. खुद का शो करना चाहती हूं. थैंक्स ऑडियंस को कि डैड को प्यार दिया है. मुझे भी दिया है. एक्सेप्ट किया है. ताली बजाते हैं. बहुत थैंकफुल हूं. जब नार्मल लोगों से हम मिलते हैं तो वो हमें देख कर मुस्कुराते हैं. बस एंटरटेन करना चाहती हूं. एक ही बिजनेस को आगे बढ़ाना है.

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प्रतीक्षा: कुछ अजीब सवाल हैं. रैंडम से.

फोन कौन सा यूज करती हैं?
मुझे आइ-फ़ोन से प्रॉब्लम है. एप्पल बड़ा सेल्फिश है. सब आई-ट्यून से करो. जो होगा एप्पल-टू-एप्पल होगा. ये क्या बात हुई! इसलिए एंड्राइड फ़ोन यूज करती हूं. एचटीसी. एप्पल का क्या है. एक एप्पल आज लूंगी कल नया आ जाएगा. आज किडनी बेचो कल कुछ और बेचना पड़ेगा.

कौन सा डिओडोरेंट?
विक्टोरिया सीक्रेट. लेकिन इसके बारे में कुछ भी सीक्रेट नहीं है.

शॉपिंग कहां करती हैं?
हर जगह करना चाहती हूं. बड़े ब्रांड की ड्रेस लूंगी. फिर लोखंडवाला मार्किट के टीशर्ट ले लेती हूं. कोई फिक्स जगह नहीं है. कभी जनपथ से. कभी सरोजनी से.

खाने में सबसे ज्यादा क्या पसंद है?
मीठा. चिकेन बिरयानी. मीठा में कुछ भी. गुलाब जामुन.

कर्ली बाल पसंद हैं या स्ट्रेट?
नैचुरली कर्ली बाल हैं मेरे. यही बर्थ मार्क है. डैडी के भी कर्ली हैं इसलिए उन्हें लगाव है. स्ट्रेट करने नहीं देते. कर्ली बाल देख लोगों को बिलीव होता है उन्हीं की बेटी हूं. स्ट्रेट करती हूं तो तुरंत धोने पड़ते हैं. क्योंकि डैड बुरे चेहरे बनाते हैं

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