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क्यों अब फोन पर बतियाने के लिए जेब बहुत ढीली करनी पड़ेगी

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दिसंबर से सस्ती कॉलिंग के दिन लद गए हैं. देश में तीन बड़ी टेलिकॉम कंपनियां हैं. एयरटेल, आइडिया-वोडाफोन और जियो. तीनों कंपनियों ने कॉल टैरिफ को 40-45 फीसदी तक बढ़ा दिया है. यानी अगर आप पहले रिचार्ज के लिए हर महीने 100 रुपये खर्च करते थे, तो अब 140 से 150 रुपये चुकाने होंगे. एयरटेल और वोडाफोन के बढ़े हुए चार्जेस 3 दिसंबर से लागू हो रहे हैं. वहीं जियो 6 दिसंबर से नए रिचार्ज प्लान शुरू कर देगा. फिलहाल ये बदलाव प्री-पेड कस्टमर्स के लिए हुआ है. बाद में पोस्ट-पेड कस्टमर्स के लिए कॉल रेट्स महंगे हो सकते हैं.

एयरटेल एक वक्त में भारत की सबसे बड़ी कंपनी थी. लेकिन जियो के आने के बाद उनके मुनाफ़े में सेंध लग गई.
एयरटेल एक वक्त में भारत की सबसे बड़ी कंपनी थी. लेकिन जियो के आने के बाद उनके मुनाफ़े में सेंध लग गई.

देश का टेलिकॉम सेक्टर बहुत बुरे दौर से गुज़र रहा है. कर्ज़ में डूबा है. रिलायंस, टाटा, एयरसेल, वीडियोकॉन जैसी कंपनियां मार्केट के तगड़े कंपटीशन में खुद को टिका न सकीं. BSNL की हालत भी किसी से छुपी नहीं है.

ग्राहकों के पास इस वक्त मोटे तौर पर तीन ही ऑप्शन हैं. एयरटेल, आइडिया-वोडाफोन और जियो. इनमें भी जियो ही ऐसी कंपनी है जिसकी आर्थिक स्थिति थोड़ी संभली हुई है. आइडिया-वोडाफोन की हालत इन तीनों में से सबसे ख़राब है. आइडिया-वोडाफोन पर अपनी मार्केट वैल्युएशन का क़रीब 6 गुना कर्ज़ है. कंपनियां चार्जेस बढ़ाकर हर ग्राहक से होने वाली कमाई को 200 रुपये से ज़्यादा करने की कोशिश में हैं. जानकारों का अनुमान था कि टैरिफ को 50 फीसदी से ज़्यादा बढ़ाने पर स्थिति संभल सकती है.

वोडाफोन-आइडिया के विलय के बाद ये देश की सबसे बड़ी कंपनी बन गई थी.
वोडाफोन-आइडिया के विलय के बाद ये देश की सबसे बड़ी कंपनी बन गई थी.

दो बड़े कारण हैं जिसकी वजह से कंपनियों ने टैरिफ प्लान महंगे किए हैं.

AGR
टेलिकॉम कंपनियों को पहला झटका सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगा था. 24 अक्टूबर को. कोर्ट ने फैसला दिया कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्यूनिकेशन (DoT) की तरफ से तय AGR के फॉर्मूले को कंपनियों को मानना होगा. AGR यानी adjusted gross revenue. AGR में टेलिकॉम कंपनियों की हर तरह की कमाई से सरकार को एक तय हिस्सा मिलता है. चाहे वो कमाई कॉलिंग से हो या ख़रीद-फरोख्त से.

कंपनियों का कहना था कि सरकार को सिर्फ टेलिकॉम के कोर ऑपरेशन यानी कॉलिंग और इंटरनेट ऑपरेशन से होने वाली कमाई से ही हिस्सा लेना चाहिए. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन कंपनियों को AGR चुकाना होगा. वो भी 3 महीने के भीतर. ऐसा अनुमान है कि तीन टॉप टेलिकॉम ऑपरेटरों के साथ-साथ बाकी कंपनियों का AGR भी जोड़ दें तो टेलिकॉम सेक्टर भारत सरकार को क़रीब 1 लाख करोड़ रुपये चुकाएगा.

आइडिया-वोडाफोन को हो रहे नुकसान के बाद मार्केट में एयरटेल और जियो के बीच ही टक्कर रह गई है.
आइडिया-वोडाफोन को हो रहे नुकसान के बाद मार्केट में एयरटेल और जियो के बीच ही टक्कर रह गई है.

भयंकर घाटा
आइडिया-वोडाफोन देश के आर्थिक इतिहास में एक तिमाही के अंदर सबसे ज़्यादा घाटा उठाने वाली कंपनी बन गई है. सितंबर में ख़त्म हुई तिमाही में आइडिया-वोडाफोन कंपनी को 50, 922 करोड़ का घाटा हुआ है. ख़बरें उड़ने लगी थीं कि देसी कंपनी आइडिया की विदेशी जोड़ीदार वोडाफोन भारत छोड़ देगी. बाद में टॉप मैनजमेंट को इस पर सफाई देनी पड़ी. हाल एयरटेल का भी मंदा है. एयरटेल को सितंबर तिमाही में 23, 045 करोड़ का नुकसान हुआ है.

वोडाफोन-आइडिया के विलय के बाद ये देश की सबसे बड़ी कंपनी बन गई थी.
वोडाफोन-आइडिया के विलय के बाद ये देश की सबसे बड़ी कंपनी बन गई थी.

जियो ने IUC को वजह बताया
शुरुआत से ही कॉलिंग हमेशा के लिए फ्री रहने का दावा करने वाली जियो ने भी मौका नहीं छोड़ा. जियो बहुत नुकसान में नहीं है. लेकिन उसने चार्जेस बढ़ाने की अलग दलील दी है. जियो का कहना है कि उन्हें बतौर IUC चार्ज दूसरी कंपनियों को बहुत पैसा चुकाना पड़ रहा है. IUC चार्ज वो चार्ज होता है जो एक टेलिकॉम ऑपरेटर दूसरे टेलिकॉम को चुकाता है, जब भी पहले टेलिकॉम ऑपरेटर से दूसरे के नेटवर्क पर कॉल जाती है. टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के नियमानुसार IUC की दर 6 पैसा प्रति मिनट तय हुई है. जियो ने ये खुद चुकाने की बजाए, ग्राहकों से वसूलने का फैसला किया है. इसका बाकी टेलिकॉम ऑपरेटरों ने विरोध भी किया था.

टेलीकॉम सेक्टर में रिलायंस जियो फिलहाल सबसे बेहतर स्थिति में है.
टेलीकॉम सेक्टर में रिलायंस जियो फिलहाल सबसे बेहतर स्थिति में है.

सरकारी राहत
सरकार ने टेलिकॉम ऑपरेटरों को कुछ राहत ज़रूर दी है. सरकार ने 2020-2022 तक इस्तेमाल होने वाले टेलिकॉम स्पेक्ट्रम पर अभी चार्ज न लेने का फैसला किया है. टेलिकॉम कंपनियों को इन दो सालों में सरकार को क़रीब 42 हज़ार करोड़ चुकाने थे. अब वो ये पैसा देरी से चुका सकेंगे. ये सरकारी मरहम है. कितना फायदा होगा कंपनियों को वो वक्त बताएगा. कुल मिलाकर मुद्दा यही है कि सज्जनों से फोन पर बतियाना महंगा होने वाला है. इसी हफ्ते से.

वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर.
वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर.

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