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बंगाल और असम के नतीजों में उलझा रहा देश, उधर आसमान में बेंगलुरु वालों ने खेला कर दिया

बेंगलुरु के स्टार्ट अप GalaxEye ने अंतरिक्ष में 190 किलो वजनी सैटेलाइट भेजा है. Mission Drishti के तहत भेजे गए इस निजी सैटेलाइट की मदद से गहरे घने बादलों के बीच, घुप्प अंधेरे वाली रात में भी साफ तस्वीरें खींची जा सकती हैं. गौरतलब है कि ऐसी तकनीक अभी तलक किसी भी कमर्शियल सेटेलाइट में नहीं है.

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GalaxEye का कमाल

बंगाल में टीएमसी जितेगी या बीजेपी? असम में हिमंता का जादू चलेगा या गोगोई बाजी मारेंगे? तमिलनाडु मे थलपति विजय कुछ कमाल कर पाएंगे. पिछले दो-तीन दिनों में पूरा देश सियासत में खेला होने की उम्मीद लगाए बैठा था. उधर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु की एक कंपनी ने हौले-हौले खेला कर दिया. वो भी धरती पर नहीं बल्कि आसमान में.

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बेंगलुरु बेस्ड स्टार्टअप ने देश के आसमान में शानदार जबरदस्त जिन्दाबाद काम कर दिया है. वैसे देश क्यों दुनिया ही कहना चाहिए. GalaxEye ने टेक की दुनिया में कमाल ही कर दिया. इस स्टार्टअप ने अंतरिक्ष में एक सेटेलाइट भेजा है और इसने वो कर दिया जो आजतक नहीं हुआ. Mission Drishti सेटेलाइट की मदद से गहरे घने बादलों के बीच, घुप्प अंधेरे वाली रात में भी साफ तस्वीरें खींची जा सकती हैं. आपके मन में सवाल होगा, ऐसा तो पहले भी होता है. हां भी और नहीं भी. पहले क्या होता था और अब क्या होगा, बताते, पहले जरा GalaxEye से रूबरू हो लेते हैं.

क्या है GalaxEye?

आईआईटी मद्रास के चार इंजीनियर्स का स्टार्टअप है जो 2021 में बनाया गया है. मकसद सैटेलाइट से आने वाली तस्वीरों को एकदम वैसे बना देना जैसे मानो उनको आपके फोन से क्लिक किया गया हो. कंपनी SAR तकनीक को बेहतर बनाने पर काम कर रही है जिसकी मदद से अभी दुनिया भर के सेटेलाइट 'दानेदार' तस्वीरें लेते हैं. लेकिन GalaxEye का Mission Drishti एकदम साफ तस्वीरें लेगा. 190 किलो का ये निजी कंपनी का सेटेलाइट तेज बारिश और तूफान के बीच, रात में भी साफ तस्वीरें क्लिक करेगा.

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GalaxEye
Mission Drishti 
अभी क्या होता है

सामान्य उपग्रह पृथ्वी की तस्वीरें लेने के लिए ऑप्टिकल कैमरों का उपयोग करते हैं. ठीक वैसे ही जैसे आपके फोन का कैमरा करता है, लेकिन 500 किलोमीटर ऊपर से समस्या हो जाती है. घने बादल, रात, कोहरा, और धुआं तस्वीरों को खराब करते हैं. यदि इनमें से कोई भी बाधा हो, तो तस्वीर बेकार हो जाती है. भारत जैसे देश में जहां साल में 4 महीने मानसून रहता है, वहां ऑप्टिकल उपग्रह देश के बड़े हिस्से को पूरी तरह से या आंशिक रूप से ही देख पाते हैं.

इसका विकल्प है सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR). प्रकाश से तस्वीरें लेने के बजाय, यह रडार तरंगें भेजता है और जो तरंगें वापस आती हैं उन्हें पढ़कर तस्वीर बनाता है. रडार बादलों, अंधेरे और धुएं से होकर गुजर सकता है. SAR वाला उपग्रह चक्रवात के दौरान रात के 2 बजे भी बाढ़ग्रस्त गांव की तस्वीर ले सकता है, जब कोई भी ऑप्टिकल उपग्रह कुछ भी नहीं देख सकता.

Mission Drishti
Mission Drishti 

सब ठीक है मगर इसकी तस्वीरें आम कैमरे जैसी नहीं होती बल्कि ये दानेदार, काले-सफेद रडार मानचित्रों जैसी लगती हैं. मिलिट्री के एक्सपर्ट और geospatial एक्सपर्ट तो इसे पढ़ सकते हैं लेकिन एक किसान, आपदा राहत दल या शहर का प्लान बनाने वाले इन्हें नहीं पढ़ सकते. अगर साफ तस्वीर चाहिए तो एक ही जगह ऑप्टिकल और SAR सेटेलाइट एक साथ चाहिए जो बहुत मुश्किल और खर्चीला है.

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OptoSAR ये कर सकता है

इसी समस्या का समाधान है गैलक्सी आई का OptoSAR. गैलक्सी आई ने दोनों सेंसरों को एक ही उपग्रह पर फिट कर दिया है. ऑप्टिकल और SAR को मिलाकर OptoSAR नामक एक तकनीक बनाई है. ये सेंसर अभी की तुलना में तीन गुना अधिक जानकारी दे सकता है. इस तकनीक से क्लिक की गई तस्वीरों को उपग्रह पर ही NVIDIA AI द्वारा 1.8 मीटर के रिज़ॉल्यूशन पर प्रोसेस किया जाता है.

Mission Drishti
Mission Drishti 

इस तकनीक के आने से ओडिशा में चक्रवात के दौरान, एक ही सैटेलाइट से स्पष्ट तस्वीर मिल जाएंगी. रियल टाइम में पता चलेगा कि कौन से गाँव बाढ़ग्रस्त हैं, कौन सी सड़कें अवरुद्ध हैं और कौन सी इमारतें खड़ी हैं. दिन हो या रात, बादल हों या आसमान में धुआं हो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. डिफेंस फोर्स मौसम की परवाह किए बिना चौबीसों घंटे सीमावर्ती क्षेत्र की निगरानी कर सकते हैं. कृषि क्षेत्र में पूरे मानसून के मौसम में बिना किसी रुकावट के फसलों की सेहत पर नज़र रखी जा सकेगी. साफ मौसम का इंतजार किए बिना राजमार्गों और पुलों के निर्माण की प्रगति को भी मॉनिटर किया जा सकेगा.

गैलेक्सीआई ने ISRO के POEM ऑर्बिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी तकनीक का परीक्षण किया है और IN-SPACe ने इनको मंजूरी प्रदान की है. इसरो की वाणिज्यिक शाखा, NSIL ग्लोबल लेवल पर इस सेटेलाइट की तस्वीरों को बांटने का काम करेगी. एक बात और, इस सेटेलाइट को एलन मस्क के स्पेसएक्स द्वारा लॉन्च किया गया क्योंकि इसरो के पीएसएलवी के पास इस मिशन के लिए उपयुक्त ऑर्बिट स्लॉट नहीं था.

मम्मी सही कहती थी. पढ़ लो. 

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