अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भारत ने भी बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर ली है. आने वाले समय में रिलायंस इंडस्ट्री एक बड़ा डेटा सेंटर बनाने जा रही है, जिसके बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जहां AI डेवलपमेंट में बड़े कदम उठाए गए हैं. इस पूरे प्रोजेक्ट में 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान लगाया जा रहा है.
रिलायंस बना रहा भारत का सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर, मुकेश अंबानी खर्च करेंगे 1.6 लाख करोड़
Reliance Data Centre: आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में 1.5 गीगावाट का रिलायंस डेटा सेंटर बनने वाला है, जो भारत का सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर होगा. इस पूरे प्रोजेक्ट में 1.6 लाख करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान लगाया जा रहा है.


आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भारत का ये सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर बनने वाला है. अभी तक ये खिताब गूगल डेटा सेंटर के पास है, जिसकी क्षमता 1 गीगावाट है. 1 गीगावाट यानी 10 लाख किलोवाट ,यह इतनी पावर है कि 10 लाख घरों में बिजली पहुंच जाए. इसी पावर से चलते हैं वो स्टोरेज सर्वर, जो लाखों GB डेटा को स्टोर और प्रोसेस करते हैं. लेकिन अब 1.5 गीगावाट यानी 15 लाख किलोवाट वाला मुकेश अंबानी का डेटा सेंटर सबको पीछे छोड़ देगा.
इतना बड़ा डेटा सेंटर क्यों?सबसे बड़ा कारण तो ये है कि AI एक उभरती हुई इंडस्ट्री है, लगातार AI यूजर्स की संख्या बढ़ती जा रही है. अब जितने ज्यादा लोग AI बेस्ड ऐप्स और चैटबॉट चलाएंगे, उतनी ही मांग बढ़ेगी GPU की. GPU यानी Graphics Processing Unit. इसी के लिए बनाए जाते हैं डेटा सेंटर. कुल मिलाकर जब आप लोग चैटबॉट से सवाल पूछते हैं, तो सारी प्रोसेसिंग यहीं होती है. इसी प्रोसेस, या कहें बिज़नेस में सभी अपना हाथ आजमाना चाहते हैं. अंबानी के बाद अडानी भी इसी तैयारी में हैं. अडानी ग्रुप 2035 तक 5 गीगावाट तक के डेटा सेंटर बनाने की तैयारी में है. मुकेश अंबानी इस इंडस्ट्री में पहले से ही आना चाहते थे. अब उनकी दिग्गज AI कंपनी Anthropic के साथ एक बड़ी डील की बातचीत चल रही है. Anthropic एक बड़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी है, जिसके साथ आने से रिलायंस ग्रुप को बहुत फायदा होने की संभावना है.
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रिलायंस डेटा सेंटर कब तक तैयार होगा?डेटा सेंटर का निर्माण तीन चरणों में होगा, जिसमें 1.08 लाख करोड़ रुपये सेंटर क्लस्टर पर और बाकी 51,300 करोड़ रुपये सोलर प्लांट पर लगाए जाएंगे. पहले चरण में पोलिपल्ली गांव में 500 मेगावाट के डेटा सेंटर का निर्माण होगा, जिसके 2028 तक शुरू होने का अनुमान है. इसके बाद दूसरे और तीसरे चरण में 2030 तक इसकी क्षमता को अतिरिक्त 1 गीगावाट बढ़ाया जाएगा.
विशाखापत्तनम बना डेटा सेंटर का हबआंध्र प्रदेश का विशाखापत्तनम डेटा सेंटर का हब बनता जा रहा है. रिलायंस से पहले भी वहां गूगल, Sify, RMZ और Anant Raj Cloud जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों ने अपने डेटा सेंटर बनाए हैं. अब रिलायंस ने भी अपने सेंटर के लिए 935 एकड़ जमीन की मांग की है. इसका बड़ा कारण आंध्र प्रदेश सरकार की डेटा सेंटर पॉलिसी 4.0 रही है. इसमें प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए काफी रियायतें दी गई हैं, जैसे कैपिटल गुड्स पर 100% स्टेट जीएसटी (SGST) रिवर्समेंट, मशीनरी पर 10% कैपिटल सब्सिडी और सीधे बिजली खरीद के लिए डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस.
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