ब्रांड न्यू स्मार्टफोन (Smartphone), जो बाकायदा डब्बे के अंदर पैक होकर आता है, उसमें भी गड़बड़ी के मामले सुनने को मिल जाते हैं. ऐसे में अगर आप कोई पुराना स्मार्टफोन खरीद रहे हैं, तो ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है. मतलब सिर्फ बिल, बॉक्स और वारंटी चेक करने से गारंटी नहीं मिलेगी कि आपको एक सही स्मार्टफोन (Android Smartphone) मिल ही जाएगा. फोन की बॉडी को चेक करना, स्क्रीन पर स्क्रैच देखने और बटन को दबाकर (Things to know before buying old smarytphone) देखने से भी पूरा काम नहीं बनेगा. इसलिए, हम आपको बताएंगे कि असल में क्या-क्या और देखना है.
सेकंड हैंड स्मार्टफोन खरीद रहे? ये काम जरूर करिए, वरना फंस जाएंगे
सेकेंड हैंड स्मार्टफोन खरीदते हुए सावधानी रखना बहुत जरूरी है.


सबसे पहले तो सेटिंग्स में जाकर या फिर स्क्रीन को ऊपर से नीचे स्क्रॉल करके स्क्रीन ब्राइटनेस पर टैप कीजिए. बाकायदा अपनी उंगली से स्लाइड करके देखिए कि फीचर कम और ज्यादा होता भी है या नहीं. किसी कमरे में पूरी लाइट ऑफ करके डिमिंग सेंसर को चेक कीजिए. आप जैसे ही लाइट ऑफ करेंगे, तो सेंसर एक सेकंड में अप हो जाएगा और जैसे ही लाइट ऑन करेंगे, कमरे की लाइट के हिसाब से खुद से सेट हो जाएगा. अगर ऐसा होने में देर लग रही या फिर नहीं हो रहा तो फिर कुछ तो गड़बड़ है.
रिपेयर तो नहीं कियाफोन के बैक को ध्यान से देखिए. अगर कोई रिपेयर होगा, तो छोटे-मोटे स्क्रैच दिख सकते हैं. आजकल स्मार्टफोन IP रेटिंग के साथ आते हैं और रिपेयर फोन में उसको नया जैसा करना बेहद मुश्किल है. ऐसे में बैक पैनल पर किसी किस्म के ग्लू या उसका निशान नजर आए, तो उस फोन से दूर रहिए.
सबसे पहले तो कैमरे का तरीके से मुआयना कीजिए. लेंस पर अगर छोटे से छोटा स्क्रैच है, तो वहीं से टाटा. लेना ही नहीं. अब लेंस सही दिख रहा, तो कैमरे से एक फोटो लीजिए. बढ़िया लाइट में. फोटो को जूम करके ध्यान से देखिए, किनारे पर या नीचे की तरफ कोई डिफरेंस तो नजर नहीं आ रहा. तकनीकी भाषा में कहें तो सैचुरेशन तो नहीं है. अगर है तो आगे क्या करना है, वो आपको पता ही है.
बॉक्स में क्या है?सिर्फ बॉक्स नहीं, बल्कि उसके अंदर क्या है वो पता होना भी बेहद जरूरी है. आजकल स्मार्टफोन फास्ट चार्जिंग के साथ आते हैं, लेकिन एक झोल है. फास्ट चार्जिंग सिर्फ साथ में चार्जर और केबल से ही होती है. ऐसे में अगर बाहर से खरीदा, तो एक तो जेब ढीली होगी, दूसरा चार्जिंग सपोर्ट भी मन का नहीं मिलेगा.
सॉफ्टवेयर अपडेट और सर्विसबहुत पुराना स्मार्टफोन नहीं लें तो अच्छा. स्मार्टफोन मेकर्स अधिकतम तीन-चार साल का सॉफ्टवेयर अपडेट देते हैं, ऐसे में बहुत पुराना फोन लेने का कोई मतलब नहीं है. इसके साथ ये भी देख लीजिए कि संबंधित कंपनी का सर्विस सेंटर आपके शहर में है या नहीं.
इसके अलावा कई सारे सॉफ्टवेयर भी आपको गूगल प्ले स्टोर पर मिल जाएंगे, जो फोन का कच्चा-चिट्ठा खोलकर रख देंगे. आप उनका भी इस्तेमाल कर सकते हैं. वैसे इतने सारे पचड़ों में नहीं पड़ना है, तो कई सारे प्लेटफॉर्म भी पुराने स्मार्टफोन (refurbished) बेचते हैं. आप वहां से भी खरीद सकते हैं.
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