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क्या आपके लिए पोस्टपेड मोबाइल कनेक्शन लेने का वक्त आ गया है?

साल 2020 में प्रीपेड मोबाइल का महीने का खर्च 84 रुपये था तो पोस्टपेड (Prepaid Vs Postpaid) का औसत 250 रुपये. मतलब 166 रुपये का फर्क. टेलिकॉम टॉक की रिपोर्ट बताती है कि साल 2025 में ये अंतर महज 5 रुपये रह गया. पोस्टपेड का खर्च 199 रुपये है तो प्रीपेड 194 रुपये पर आ गया है. तो क्या पोस्टपेड लेना अच्छा होगा जहां 30+15 की बिलिंग साइकिल और ऑफर्स नत्थी मिलते हैं?

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प्रीपेड और पोस्टपेड के बीच का फर्क खत्म हो रहा है

करीब 10 साल पहले तक पोस्टपेड (Postpaid) मोबाइल कनेक्शन को कॉर्पोरेट्स और पैसे वालों का प्रोडक्ट माना जाता था. पोस्टपेड मतलब कम से कम 1000 रुपये महीने का फटका. जबकि प्रीपेड (Prepaid) में 300-400 रुपये में काम चल जाता था. फिर आया जियो और सब बदल गया. प्रीपेड मोबाइल 199 रुपये में आराम से महीने भर चल जाता था. पोस्टपेड अभी भी महंगा ही था. लेकिन साल 2026 में कहानी बदल गई है. पोस्टपेड और प्रीपेड के बीच अंतर महज 5 रुपये का हो गया है. तो क्या अब पोस्टपेड लेना ठीक रहेगा क्या?

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पोस्टपेड सस्ता हुआ या प्रीपेड महंगा?

साल 2020 में प्रीपेड मोबाइल का महीने का खर्च 84 रुपये था तो पोस्टपेड का औसत 250 रुपये. मतलब 166 रुपये का फर्क. टेलिकॉम टॉक की रिपोर्ट बताती है कि साल 2025 में ये अंतर महज 5 रुपये रह गया. पोस्टपेड का खर्च 199 रुपये है तो प्रीपेड 194 रुपये पर आ गया है. साफ है कि पोस्टपेड प्लान किफायती हो गए हैं और प्रीपेड रिचार्ज का दाम बढ़ता ही जा रहा है. वैसे 199 वाला पोस्टपेड हर टेलिकॉम ऑपरेटर के पास नहीं है, मगर है तो सही. पोस्टपेड में कई बार सर्किल के हिसाब से भी प्लान होते हैं. 

तो क्या अब पोस्टपेड लेना ठीक रहेगा?

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ARPU और डुओपॉली का चक्कर बाबू भईया

प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज के दाम लगातार बढ़े हैं. कभी टेलिकॉम कंपनियों ने चिल्ला-चिल्लाकर दाम बढ़ा दिए तो कभी बिना हो-हल्ले के थोड़ी-थोड़ी बढ़ोतरी कर दी. इसके पीछे एक कारण जो सामने से दिखता है वो डुओपॉली है. देश के टेलिकॉम सेक्टर पर दो कंपनियों, जियो और एयरटेल का कब्जा है. बीएसएनएल और वोडाफोन-आइडिया हैं तो सही मगर हालत अच्छी नहीं. माने एक ने दाम बढ़ाए तो दूसरा भी बढ़ा देगा. रिचार्ज के दाम बढ़ने के पीछे ARPU भी एक कारण है.

Average Revenue Per User माने एक यूजर के महीने का औसत रिचार्ज. एयरटेल वाले सुनील भारती मित्तल साफ कह चुके हैं कि जब तक ARPU, 350 रुपये पर नहीं आता तब तक बात नहीं बनेगी. माने रिचार्ज के दाम अभी और बढ़ेंगे. प्रीपेड यूजर बावरे मन जैसा होता है. कभी इधर तो कभी उधर. ऐसे में टेलिकॉम कंपनी उसके रहते ही उससे वसूली कर लेना चाहती है.

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दूसरी तरफ है पोस्टपेड यूजर जो कंपनियों के लिए बंधे ग्राहक जैसा है. एक बार जो कस्टमर बन गया, वो आसानी से जाता नहीं. टेलिकॉम कंपनियां इसमें फैमिली प्लान तो सालों से ऑफर कर ही रही हैं, माने ओरिजनल प्लान के आधे में एक और नंबर जुड़ जाता है. अब इसके साथ कई ऑफर्स भी नत्थी होकर आ रहे. जैसे OTT और गूगल वन. ऐप्पल म्यूजिक भी आजकल खूब मिल रहा. इसमें डेटा को आगे चिपकाने का भी प्रबंध होता है. माने पिछले महीने का अगर बच गया तो अगले महीने चला लो.

प्रीपेड में 28 और 30 दिन की साइकिल होती है. प्लान खत्म होने के कई दिन पहले से कॉल के पहले रिचार्ज का गाना सुनना पड़ता है. जबकि पोस्टपेड में यूजर को 30 दिन की बिलिंग साइकिल के साथ 15 दिन बिल भरने के भी मिलते हैं. माने 30+15 की साइकिल. टेलिकॉम कंपनियां आम तौर पर पोस्टपेड के दाम नहीं बढ़ाती हैं. इसलिए दोनों प्लान में कीमतों का अंतर कम हो रहा है.

आपको क्या करना चाहिए वो पूरी तरह आपकी जरूरत पर निर्भर करता है. अकेले हैं और आमदनी नहीं, या कम है तो प्रीपेड अच्छा. परिवार में कई मोबाइल हैं और नौकरीपेशा हैं तो पोस्टपेड जिन्दाबाद. 

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