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ऑनलाइन फ़ैंटसी गेम्स: स्किल कह लो या जुआ, इसकी लत से जान पर बन आती है

नीति आयोग इसे रेग्युलेट करना चाहता है!

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नीति आयोग फ़ैंटसी गेम इंडस्ट्री को रेग्युलेट करना चाहता है.
Online Fantasy Game खेलने वाले एक शख्स का मेल द लल्लनटॉप को आया. इन्होंने बताया कि किस तरह से इन गेम्स की लत ने इनको कंगाल कर दिया और इनके पास खुद की जान लेने के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचा है. इनसे बात करके इन्हें ऐसा कदम उठाने से तो रोक लिया गया मगर इससे हमारा ध्यान ऑनलाइन फ़ैंटसी गेम्स और इनकी लत की तरफ़ गया.
फ़ैंटसी गेम्स को लेकर पहले से एक बहस छिड़ी हुई है जहां एक तबका इसे ऑनलाइन पोकर और रमी की तरह जुआ बताता है तो दूसरा तबका स्किल-बेस्ड कॉन्टेस्ट. दोनों पक्षों के पास अपने-अपने व्यू से जुड़े तथ्य हैं. अलग-अलग राज्य सरकारों के पास भी अलग-अलग मत हैं. तमिलनाडु ने पिछले साल नवंबर में ऑनलाइन पोकर और रमी को बैन किया मगर फ़ैंटसी गेम्स को नहीं. वहीं उससे पहले आंध्र प्रदेश ने फ़ैंटसी स्पोर्ट्स को भी ऑनलाइन गैम्बलिंग के साथ शामिल करके बैन कर दिया.
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि ऑनलाइन फ़ैंटसी गेम्स एक बहुत बड़ी इंडस्ट्री है जहां करोड़ों रुपए बस बरसने को तैयार हैं मगर देश में ऑनलाइन फ़ैंटसी गेम्स को लेकर इस तरह के अलग मतों के बीच न इंडस्ट्री चल पा रही है और न ही बंद हो पा रही है. बहरहाल सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग के हिसाब से फ़ैंटसी गेम्स में किस्मत नहीं स्किल से काम होता है. अपने ड्राफ्ट में नीति आयोग ने कहा है कि फ़ैंटसी स्पोर्ट्स को लेकर अलग-अलग राज्यों में अलग नियम “ईज़ ऑफ़ डुइंग बिज़नेस” के खिलाफ़ जाता है और इसके साथ ही अलग-अलग जगह पर लोगों के पास अपनी सुरक्षा को लेकर अलग-अलग अधिकार हैं.
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Fantasy Sport जुआ है या स्किल बेस्ड गेम?

नीति आयोग ने बताया कि PricewaterhouseCoopers India की रिपोर्ट के मुताबिक, फ़ैंटसी स्पोर्ट्स इंडस्ट्री अगले 2-3 सालों में 5000 से ज्यादा डायरेक्ट जॉब और 7000 से ज्यादा इनडायरेक्ट जॉब पैदा कर सकती है. इसके साथ ही ये इंडस्ट्री अगले 5 सालों में 3,000 करोड़ से 3,500 करोड़ रुपए GST में बना सकती है और 7000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपए इनकम टैक्स और कॉर्पोरेट टैक्स के जरिए सरकार को पहुंचा सकती है.
नीति आयोग का मानना है कि फ़ैंटसी स्पोर्ट्स को बैन करने की जगह रेग्युलेट करने की जरूरत है. और ऐसा करने के लिए एक केन्द्रीय नियमावली का होना जरूरी है जो लोगों के अधिकारों की रक्षा करे और फ़ैंटसी गेम्स के नाम पर चल रही गलत प्रैक्टिसेज़ को भी रोके. मगर फिलहाल इस ड्राफ़्ट में एडिक्शन या लत को लेकर कोई बात नहीं कही गई है. ज़माना कहे लत ये गलत लग गई! हमारे इलाके में IPL के टाइम पर सट्टा चलता है. लोग अपनी क्रिकेट से जुड़ी हुई जानकारी का इस्तेमाल करके पैसा लगाते हैं. कौन टीम जीतेगी, कौन खिलाड़ी सबसे ज्यादा रन बनाएगा, कौन सबसे ज्यादा विकेट लेगा, कौन फिफ्टी मरेगा, कौन सेंचुरी पूरी करेगा, कौन नॉट आउट जाएगा वग़ैरह-वग़ैरह. असली का पैसा दांव पर लगता है, कभी जीत मिलती है तो कभी हार. मगर हारने वाले और जीतने वाले दोनों ही टूर्नामेंट खत्म होने तक पैसा झोंकते रहते हैं. हारने वाले जीतने की उम्मीद में और जीतने वाले जीत का और ज्यादा मज़ा लेने के लिए. कुछ इस तरह सट्टे की लत लग जाती है और फ़िर IPL के बाद बिग बैश जैसी हर छोटी-बड़ी सीरीज़ पर भी पैसा लगने लगता है.
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क्रिकेट पर बने हुए ज़्यादातर फ़ैंटसी गेम्स सीरीज़ के साथ पूरे हो जाते हैं. (फ़ोटो: Niti Aayog)

पबजी जैसे ऑनलाइन गेम की लत लग जाए तो लोगों का पूरा टाइम खर्च हो जाता है, लेकिन सट्टे में वो टाइम के साथ अपना पैसा भी जला देते हैं. और फ़ैंटसी स्पोर्ट्स चाहे कॉन्टेस्ट हो या जुआ, यहां भी पैसा लगाया जाता है. और इसकी लत भी ठीक वैसी ही है जैसी बाकी चीज़ों की. इस सिलसिले में हमने मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल डॉक्टर अखिल अग्रवाल से बात की. इनका कहना है:
“कोई भी चीज़ जिसमें इंसान को मज़ा आता है, उसे लगातार करते रहने से लत लग सकती है. ऐसा दिमाग में एक प्लेज़र पाथ बनने की वजह से होता है. अगर इस ऐक्टिविटी में पैसा शामिल हो जाता है तो लत और भी ज़्यादा आसानी से लग सकती है. इस आधार पर ये बात कही जा सकती है कि ऑनलाइन फ़ैंटसी स्पोर्ट्स की भी लत लग सकती है.”
डॉक्टर अग्रवाल का कहना है कि ऑनलाइन फ़ैंटसी स्पोर्ट्स की लत गैम्ब्लिंग या बाकी दूसरी लत की ही तरह होती है. एडिक्शन से बचने को लेकर लिए डॉक्टर अग्रवाल कहते हैं:
“सबसे अच्छा बचाव तो ये है है कि उस रास्ते पर चला ही न जाए जो लत लगा सकता है. हमें पता है कि शराब की लत लगती है, जुए की लत लगती है तो इन चीज़ों से जितना दूर हो सके उतना दूर रहना चाहिए. अगर आप इस तरह की कोई चीज़ करते भी हैं तो लत से बचने के लिए इतना ध्यान रखें कि उस ऐक्टिविटी से अपने आप को थोड़ा-थोड़ा ब्रेक देते रहें. लत की शुरुआत आदत से होती है.”
पश्चिमी देशों में तो इंटरनेट और सोशल मीडिया की लत से छुटकारा पाने के लिए भी डी-एडिक्शन सेंटर या कैम्प वग़ैरह चलते हैं जहां इंसान ऐड्मिट होकर इलाज पाता है. अपने देश में इस तरह की लत छुड़ाने वाले कैम्प तो नहीं है मगर मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स इसका इलाज रिलैक्सेशन थेरेपी वग़ैरह से करते हैं.
नीति आयोग के ड्राफ़्ट में एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा गया है कि ऑनलाइन फ़ैंटसी स्पोर्ट्स खेलने वालों की तादाद इंडिया में बहुत तेज़ी से बढ़ रही है. जून 2016 में जहां ये तादाद 20 लाख थी, दिसंबर 2019 तक ये संख्या 9 करोड़ पहुंच चुकी है. ऑनलाइन फ़ैंटसी गेम्स को रेग्युलेट करने वाले फाइनल प्रपोज़ल में अगर एडिक्शन को रोकने के लिए भी कुछ प्रावधान हों तो बढ़िया रहे.

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