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हर तीन में एक भारतीय बच्चा Cyberbullying का शिकार

Cyberbullying पर McAfee की रिपोर्ट आंख खोल देने वाली है.

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Cyberbullying मतलब bullying का ऑनलाइन तरीका(image-pexels)

लॉकडाउन से उपजे हालात में इंटरनेट सभी के काम आया. ऑनलाइन क्लास से लेकर शॉपिंग तक. एक दूसरे से जोड़े रखने से लेकर सिर्फ मनोरंजन तक. सोचिए अगर इंटरनेट नहीं होता तो कोविड की भयावहता और ज्यादा होती. सब ठीक लग रहा है लेकिन हकीकत इससे अलग है. इंटरनेट की यही उपलब्धता ने एक अपराध को खूब बढ़ने दिया. अपराध का नाम है Cyberbullying. Cyberstalking, गोट, griefing (ऑनलाइन गेमिंग), dissing. शायद ये शब्द भी आपने नहीं सुने हों लेकिन ये Cyberbullying के तरीके हैं. क्या बड़े और क्या बच्चे सब इसका शिकार बने. विशेषकर छोटे और जवान होते बच्चे क्योंकि वो इस अपराध की जद में आसानी से आ जाते हैं.    

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Cyberbullying बोले तो bullying का ऑनलाइन तरीका. अब bullying क्या है वो आपको और हमें मालूम है. bullying मतलब बदमाशी कह सकते हैं. वैसे तो ये किसी भी उम्र मे किसी के भी साथ हो सकती है लेकिन आमतौर पर इसको स्कूल या कॉलेज से जोड़कर देखा जाता है. खैर हम वापस आते हैं Cyberbullying पर और समझते हैं ये होती कैसे है.  

साइबरबुलिंग मतलब इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का उपयोग करके दूसरों को धमकाना. माध्यम सोशल मीडिया और मैसेजिंग सेवाएं जिन्हें मोबाइल फोन, टैबलेट या गेमिंग प्लेटफॉर्म पर एक्सेस किया जाता है. साइबरबुलिंग टेक्स्ट, ईमेल और सोशल नेटवर्क और गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए हो सकती है. धमकी, उत्पीड़न, सोशल मीडिया अकाउंट्स में हैकिंग, किसी अन्य व्यक्ति के बारे में व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक रूप से पोस्ट करना या भेजना. तथ्य यह है कि बच्चे और युवा जितना अधिक समय ऑनलाइन बिताते हैं, किसी बिंदु पर निगेटिव अनुभव होने की संभावना उतनी ही अधिक होती है. सबसे दुखद ये कि साइबरबुलिंग का लगभग आधा पीड़ित के किसी परिचित से आता है. उदाहरण के लिए किसी को नेट पर कुछ उल्टा सीधा देखते पकड़ लेना या फिर उनकी किसी चैट को पढ़ लेना. लेकिन ये साइबरबुलिंग है तो आमने-सामने नहीं बल्कि डिजिटल वर्ल्ड में गुंडई की जाती है.    

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थ्योरी से अलग सायबर सिक्योरिटी फर्म McAfee की एक रिपोर्ट आंख खोल देने वाली है. 85% भारतीय बच्चे कभी ना कभी साइबरबुलिंग का शिकार हुए हैं. ये आंकड़ा वैश्विक स्तर पर दोगुना है.  42% बच्चे racist मतलब जातिवाद, 36% ट्रोलिंग, 29% पर्सनल अटैक, 30% सेक्शुअल हराशमेंट, 23% doxing मतलब निजी जानकारी सार्वजनिक होने का शिकार बने. हमने ये सारे आंकड़े आपको सिर्फ इसलिए बताए जिससे आपको समझ आए कि अदृश्य अपराधी उस छोटी सी स्क्रीन के अंदर बैठा हुआ है.

साइबरबुलिंग, catfishing मतलब किसी के प्रोफाइल को चुराना या लोगों को ऑनलाइन रिलेशनशिप शुरू करने का लालच देकर नकली प्रोफाइल बनाना या फिर Fraping यानी किसी और के खाते में लॉगिन करने से भी होती है.

सबसे डराने और दुखी करने वाली बात ये है कि 45% भारतीय बच्चे इसके बारे में अपने परेंट्स से नहीं बताते. रिपोर्ट के मुताबिक, शायद ऐसा communication गैप की वजह से होता है.

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अब जरूरी बात, आपको करना क्या चाहिए?

एक्सपर्ट और उनकी सलाह: अगर आप साइबरबुलिंग के शिकार हैं तो बिना समय गवाएं एक्सपर्ट से बात कीजिए. काउन्सलर, कंसल्टेंट से लेकर लोकल लेवल पर कई संस्थान हैं जो इसमें आपकी मदद कर सकते हैं. साइबरबुलिंग से मेंटल हेल्थ पर असर साफ दिखता है. अगर ऐसा आपके बच्चों या अपनों के बीच नजर आए तो उनको विश्वास में लेकर उनसे बात कीजिए.

परिवार में बात करने का कल्चर

ये बेहद जरूरी है. अपने परिवार, बच्चों के बीच बातचीत का माहौल विकसित कीजिए. बच्चों के अंदर ये विश्वास पैदा कीजिए कि कुछ गलत हो रहा है तो हमसे शेयर करो. झूठ बोलने और छिपाने से बात बिगड़ जाएगी. बच्चों और युवाओं को बताइए कि ऐसा हो सकता है लेकिन उसमें आपकी गलती नहीं है. पेरेंट्स का सपोर्ट और गाइडेंस सबसे बड़ा हथियार है.

बच्चों को तैयार कीजिए

तैयारी से मतलब ऑनलाइन होने पर होने वाली एक्टिविटी से है. बच्चों को बताएं कि हर पॉपअप पर क्लिक नहीं करना है. मैसेंजर ऐप पर आए हर मैसेज का जवाब देना जरूरी नहीं विशेषकर वो किसी अंजान शख्स ने भेजा हो. कैमरे का एक्सेस नहीं देना है. हो सके तो कैमरे को कवर करके रखें. सिर्फ 100 रुपये में ऐसे डिवाइस मिल जाते हैं. बच्चों का ये जानना बहुत जरूरी कि ऐसा होने पर पुलिस और कानून उनकी मदद कर सकता है. डिजिटल दुनिया में दिख रहा कोई जोक या पोस्ट जो बुलिंग वाली फोटो या टेक्स्ट दिखाता है तो उससे दूरी भली.  

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