Dhurandhar से जुड़े हर एक्टर को ऑडियंस से बढ़िया रिस्पॉन्स मिल रहा है. चाहे वो Akshaye Khanna हों, Ranveer Singh हों या Rakesh Bedi. इस फेहरिस्त से एक नाम Mustafa Ahmed का भी है. मुस्तफ़ा ने फिल्म में रॉ एजेंट रिज़वान का किरदार निभाया है. पहले पार्ट में उनका किरदार अरशद पप्पू की गैंग में शामिल होकर उसकी मुखबिरी करता है. मगर दूसरे पार्ट में वो हम्ज़ा अली मज़ारी उर्फ जसकीरत सिंह रांगी का राइट हैंड बन जाता है. फिल्म में उनके कैरेक्टर आर्क ने सबका ध्यान खींचा. मगर कम ही लोगों को पता है कि मुस्तफ़ा इस प्रोजेक्ट से पहले रणवीर, Hrithik Roshan, Vicky Kaushal और Yami Gautam जैसे एक्टर्स के जिम ट्रेनर भी रह चुके हैं.
ऋतिक रोशन के ट्रेनर मुस्तफा 'धुरंधर 2' में हम्ज़ा के राइट हैंड कैसे बन गए?
कहानी 'धुरंधर 2' में रिज़वान का रोल करने वाले मुस्तफा अहमद की, जो डिसलेक्सिया से लड़े, ऋतिक रोशन को ट्रेन किया और देश की सबसे बड़ी फिल्म का हिस्सा बन गए.


मुस्तफा के परिवार की जड़ें अफगानिस्तान में हैं. उनके मुताबिक, घर में बाकी सभी लोग मॉडल जैसे नज़र आते हैं. उनके बीच वो खुद को बदसूरत मानते थे. हालांकि एक बार उन्होंने एक अफगानी शादी में ऐसा डांस किया कि हर कोई उनसे इंप्रेस हो गया. इसके बाद उनके कॉन्फिडेंस में इजाफा हुआ. हालांकि मुस्तफ़ा को देखते ही जो बात सबसे ज़्यादा नोटिस में आती है, वो है उनका डील-डौल. बॉडी बिल्डिंग उनके लिए शौक से ज़्यादा खुद को बचाए रखने का ज़रिया था. जैग ऑफ ऑल ट्रेड पॉडकास्ट पर उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही डिसलेक्सिया था. वही बीमारी जो ‘तारे ज़मीन पर’ में ईशान अवस्थी को थी. इस कंडिशन में अक्षरों को पढ़ने-समझने में दिक्कत आती है. स्कूल के दिनों में वो इससे काफ़ी स्ट्रगल कर रहे थे. तंग आकर उन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई छोड़ दी.
मगर ज़िंदगी जीने का कुछ तो मक़सद होना चाहिए. बस इसी ख्याल से मुस्तफा ने पढ़ाई के इतर विकल्पों की तलाश शुरू कर दी. उसी दौरान उन्हें एहसास हुआ कि वो फिजिकल एक्टिविटी में अच्छे हैं. वो भी सिर्फ बॉडी बिल्डिंग नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स और डांस में भी. उन्होंने टीनएज के दिनों से ही अपने शरीर पर काम करना शुरू कर दिया था. साथ ही गुजारे के लिए एक कॉल सेंटर भी जॉइन कर लिया. वहां उन्होंने इतनी मेहनत की कि मात्र 21 साल की उम्र में वो उस कॉल सेंटर के सबसे यंग टीम लीडर बन गए थे. ये साल 2001 की बात है और उस वक्त वो हर महीने एक लाख रुपये की सैलरी पा रहे थे. देखा जाए तो उनकी ज़िंदगी में सब बढ़िया चल रहा था. मगर फिर एक घटना ने उनकी ज़िंदगी बदल दी.
दरअसल, एक दिन मुस्तफ़ा दिल्ली के जनकपुरी के एक जिम में ट्रेनिंग कर रहे थे. उसी दौरान उन्होंने वहां एक 40-45 साल की महिला को देखा. उन्होंने नोटिस किया कि जिम ट्रेनर उस औरत को प्रॉपर ट्रेनिंग नहीं दे रहा और इग्नोर कर रहा है. ऐसे में मुस्तफ़ा आए और उन्हें जिम में गाइड करने लगे. अल्फ़ा कोच पॉडकास्ट में मुस्तफ़ा बताते हैं,
"कुछ महीनों बाद उन महिला ने मुझे एक लिफाफा दिया और कहा कि इसे घर जाकर पढ़ना. मैं थोड़ा डर गया था. लेकिन उस चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि वर्कआउट करने से उनकी शादी में फिर से स्पार्क आ गया है. उन्होंने ही मुझसे कहा था कि जिम ट्रेनिंग मेरा असली काम है. अगर मैं इसे नहीं अपनाऊं, तो ये बहुत गलत होगा."
उस एक ख़त ने मुस्तफा की सोच बदल दी. तब तक वो खुद के लिए जिम कर रहे थे. डिस्लेक्सिया की गिरफ्त से बचने के लिए भारी वजन उठा रहे थे. लेकिन उस महिला की बात ने उन्हें नया नज़रिया दिया. जोश में आकर मुस्तफ़ा ने अपनी जॉब छोड़ दी. वही जॉब, जिससे वो हर महीने लाखों कमा रहे थे. उनके इस फैसले पर उनके मैनेजर ने उन्हें बावला करार दिया. उनकी मां ने उनसे बात करनी बंद कर दी. खासकर इसलिए क्योंकि वो पढ़ाई छोड़कर जिस स्टेबल जॉब में गए थे, उन्होंने खुद को वहां से भी अलग कर लिया.
मगर मुस्तफा अब फैसला कर चुके थे. उन्होंने अपना बोरिया बिस्तर बांधा और वेस्ट दिल्ली के एक जिम में ट्रेनर बन गए. सैलरी- मात्र 10 हजार रुपए प्रति माह. वो हर सुबह 4 बजे जगते और देर रात तक लोगों को ट्रेन करते. कुछ समय ऐसा करने के बाद वो दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित फिटनेस फर्स्ट जिम गए. वहां के मालिक ने जब मुस्तफा की फिजिक देखी तो उन्हें सीधे जॉब ऑफर कर दिया. उन्हें 18 हजार रुपये की सैलरी देने की बात हुई. उन्हें हर सेशन के लिए अलग से 600 रुपये मिलते थे. उस 600 में से 300 रुपये कंपनी अपने पास रखती थी और बाकी 300 रुपये उन्हें देती थी. कल तक मुस्तफ़ा दिन-रात 10 हजार रुपये में अपना शरीर तोड़ रहे थे. इसलिए उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि लोग उन्हें सिर्फ एक घंटे के काम के लिए इतने पैसे दे रहे हैं. ठीक उसी वक्त उन्हें एहसास हुआ कि वो जिम ट्रेनिंग की फील्ड में आगे भी बड़ा करियर बना सकते हैं.
इसके बाद उन्होंने इतनी मेहनत की कि अगले तीन महीनों में वो फिटनेस फर्स्ट के एशिया में नंबर 1 ट्रेनर बन गए. वो रोज़ करीब 14 सेशन लेते और हफ्ते में 6 दिन काम करते थे. इस तरह वो महीने में लगभग 400 घंटे काम कर 1.4 लाख रुपये से ज़्यादा कमा रहे थे. कुछ समय बाद उनकी पत्नी राधिका ने बेकिंग का काम शुरू किया. उसके ज़रिए उनका कनेक्शन एक सेलिब्रिटी फिटनेस ट्रेनर से हुआ. वो ट्रेनर ऋतिक रोशन से जुड़ा हुआ था. उससे ही ऋतिक को मुस्तफा के बारे में पता चला. साल 2015 में ऋतिक ने एक दिन अचानक मुस्तफा को मैसेज किया. दरअसल, वो एक जिम ट्रेनर की तलाश में थे और मुस्तफा की प्रोफ़ाइल से काफ़ी प्रभावित थे. दोनों मिले, बात की और दो दिन बाद ऋतिक, मुस्तफा के पहले सेलेब्रिटी क्लाइंट बन गए.

एक वो दिन है और एक आज, तबसे अबतक मुस्तफा ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. ऋतिक के बाद वो धीरे-धीरे अन्य सेलिब्रिटीज़ को ट्रेन करने लग गए. उन्होंने 'पद्मावत' के दौरान रणवीर को अलाउद्दीन खिलजी के किरदार में ढलने में मदद की थी. साथ ही वो लोगों को ऑनलाइन कोचिंग भी देने लगे. कोविड के दौरान वो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुए थे. 2018-19 में उन्होंने विकी कौशल और यामी गौतम को 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' के लिए ट्रेन किया था. उसी दौरान आदित्य धर ने उन्हें पहली बार देखा. वो मुस्तफ़ा की बॉडी से इंप्रेस हुए थे. दोनों कॉन्टैक्ट में आए और बाद में जब 'धुरंधर' की कास्टिंग हुई, तो आदित्य ने ज़्यादा सोचे बिना मुस्तफ़ा से कॉन्टैक्ट किया.

लेकिन मुस्तफ़ा, रिज़वान का रोल करने के लिए तैयार नहीं थे. उन्हें तब एक्टिंग का 'ए' भी नहीं आता था. मगर आदित्य ने उनसे बस इतना कहा- "मैं हूं न. तू कर." इस बात ने उन्हें बल दिया. रिज़वान के किरदार में ढलने के लिए उन्होंने 86 किलो तक अपना वजन बढ़ाया. यही नहीं, उन्होंने आर्मी और पैरा-मिलिट्री के जवानों के साथ ट्रेनिंग भी ली. फिल्म के पोस्ट क्रेडिट सीन के लिए, जहां रणवीर और वो ट्रेनिंग करते नज़र आते हैं. उन्होंने यंग दिखने के लिए अपना वजन घटाकर 78 किलो किया. उनकी ये तमाम मेहनत रंग लाई और अब वो 'धुरंधर 2' के मेजर हाइलाइट बनकर उभरे हैं.
वीडियो: रणवीर सिंह की 'धुरंधर 2' ने पहले ही वीकेंड पर कौन-कौन से रिकॉर्ड बना डाले?






















