शौक बड़ी चीज होती है. शायद इसका अंदाजा स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों को शुरू से था. तभी तो फ्लैगशिप स्मार्टफोन के नाम पर हमेशा मोटी कीमत वसूली गई. नैनो याद है न.... अरे वही टाटा नैनो...लखटकिया कार. उसका जमाना तो चला गया है. अब दिन हैं लखटकिया हैंडसेट के. देखा जाए तो फोन लाख क्या उससे भी ज़्यादा महंगे आने लगे हैं. लेकिन हर कोई उसे खरीद सके ऐसा भी नहीं है तो फिर शौक का क्या? वो भी तो पूरा करना ही है. ऐसे में आता है रामबाण इलाज. सेकेंड हैंड स्मार्टफोन. सस्ता तो मिलेगा लेकिन हमारी कही मानी तो अच्छा मिलने के भी पूरे चांस हैं.
सेकेंड हैंड स्मार्टफोन लेने से पहले आपको ये तो करना ही होगा...
सेकेंड हैंड फोन का मार्केट भारत में तेजी से बढ़ रहा है.
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सेकेंड हेंड स्मार्टफोन लेने के कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी
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अब नाम से ही पता चलता है कि सेकेंड हैंड बोले तो वो फोन जिसको पहले किसी ने चलाया हो. ये कुछ दिन, कुछ महीने और कुछ साल पुराना हो सकता है. कुछ मतलब एक या ज्यादा से ज्यादा दो साल, उससे ज्यादा पुराना लिया तो ओखली में सर देने जैसा होगा.
सेकेंड हैंड फोन लेना तो बहुत आसान है लेकिन वो ठीक से चलेगा या नहीं, कितना चलेगा, सर्विस और वारंटी जैसे कई और फेक्टर भी हैं जिनको देखे बिना यदि आपने फोन लिया तो पछताना पड़ सकता है. आपको पछताना न पड़े और एक अच्छा सेकेंड हेंड फोन भी आपको मिल जाए उसके लिए हम हैं.
बजट तय करना
आपको लगेगा कि जब सेकेंड हेंड फोन ही लेना है तो बजट क्यूं? भाई वो इसलिए कि सबसे पहले होती है ज़रूरत. फिर ज़रूरत को पूरा करने के लिए लगते हैं पैसे. पैसे तो आप उतने ही दोगे न जितना आपके बजट में है. सेकेंड फोन लेना का उद्देश्य ये होता है कि जो चीज नई में महंगी मिलेगी उसे थोड़े सस्ते में खरीद लिया जाए. कई लोग ऐसा करके फ्लैगशिप हैंडसेट को अपना बनाना चाहते हैं तो कई लोग मिडरेंज सेंगमेंट के डिवाइस को बजट के रेंज में खरीदना चाहते हैं. आपको अपने हिसाब से फोन खरीदना है तो बजट ही सर्वोपरि होगा.
हाल क्या हैं आपके अगले फोन के?
आप Second hand फोन ले रहे हैं तो फोन को जांचना और परखना आसान है, क्यूंकि वह बॉक्स में बंद नहीं है. अच्छे से देखिए कि फोन का शेप आड़ा तिरछा तो नहीं है. बॉडी पर खरोंच या किसी अन्य किस्म के निशान तो नहीं हैं. याद रखिए कि एक छोटा सा निशान भी फोन की परफॉर्मेंस को खराब कर सकता है. जैसे हो सकता है कि आपको कोने पर एक बहुत छोटा निशान दिखे और वो कैमरे के पास हो तो पूरी संभावना है कि कैमरे पर असर पड़ा हो तो बढ़िया से देख लीजिए फोन को. आवाज कम और ज्यादा करने के बटन और पावर ऑफ करने के बटन भी बॉडी पर होते हैं उनको भी चेक कीजिए. कैमरे का लेंस भी साफ होना चाहिए मतलब अंदर धूल वगैरह न भरी हो.
डिस्प्ले चेक करना
बॉडी तो देख ली अब गौर से चेक करना है डिस्प्ले. खरोंच तो आसानी से दिख जाएगी लेकिन आपको फोन बकायदा चला कर देखना है. फोन लगाकर और सुनकर दोनों तरीके से देखिए. दो चार ऐप्स भी खोल कर देखने में कोई बुराई नहीं है. मैसेज या नोट्स ऐप पर टाइप करके देखिए और लगे हाथ जो कीपैड स्क्रीन पर आता है उसके सभी अक्षर दबा डालिए. कॉल लगाकर देखने से आपको फोन के रिसीवर और माइक्रोफोन की कंडीशन भी पता चल जाएगी और स्पीकर की भी. वैसे आजकल फोन में डिस्प्ले चेक करने का जुगाड़ होता है जैसे कि सैमसंग गैलेक्सी फोन में आप #0# डायल करने पर स्क्रीन पर लाल, हरा और नीले रंग पर टैप करके देख सकते हैं लेकिन ये कोड हर फोन का अलग-अलग है. आप इस परेशानी से निपट भी सकते हैं किसी भी थर्ड पार्टी ऐप से, जैसे TestM या फिर Phone check, डिस्प्ले ठीक से काम कर रहा है या नहीं, चुटकियों में पता चल जाएगा.
चार्जिंग पोर्ट और कनेक्टिविटी पोर्ट
चार्जिंग ठीक से हो रही है मतलब 100% और वो भी फोन के असली चार्जर से ये देखिए. यदि फोन में किस्मत से 3.5 mm जैक है तो कायदे से हेडफोन लगाकर देखिए. संगीत बजना चाहिए और साथ में कॉल भी ढंग से काम कर रहा हो. ब्लूटूथ और WiFi की कनेक्टिविटी देखना भी उतना ही जरूरी है, यदि संभव हो तो अपने किसी ब्लूटूथ डिवाइस से जोड़कर डेखिए और WiFi भी किसी दूसरे नेटवर्क पर चलाकर. फोन के बाहर की चेक लिस्ट में सिम ट्रे चेक करना भी जरूरी है, कहीं टूटा तो नहीं है और आराम से खुल जाता है या नहीं.
कैमरा ऐप
अब तक आपने फोन को ऊपर-ऊपर से जांचा है. अब आते हैं फोन के अंदर. सबसे पहले कैमरा चेक कीजिए, खोलकर नहीं बल्कि दो चार फोटो लेकर वो भी अलग अलग तरीके से जैसे कि नॉर्मल, वाइड एंगल, पोर्ट्रेट, सेल्फ़ी और वीडियो भी. एक काम और आप कर सकते है फोन के कैमरा ऐप की सेटिंग्स में जाइए. वहां जितने भी डिफॉल्ट फीचर्स हैं उनको एक बार खुद आजमा लीजिए.
बैटरी की हेल्थ
फोन यदि बहुत नया है तो बैटरी ठीक ही होगी, लेकिन यदि कुछ महीने भी पुराना है तो बैटरी की हेल्थ देखना जरूरी है. आजकल फोन की सेटिंग्स में ये विकल्प मिल जाता है, लेकिन ये फीचर अभी फ्लैगशिप फोन तक ही सीमित है. आप चाहें तो सेटिंग्स में जाकर बैटरी युसेज देख सकते हैं कि बैटरी कैसा परफार्म कर रही है. नॉर्मल यूज में चार्ज से निकालने के बाद जितना ज्यादा टाइम दिखे बैटरी उतनी अच्छी. आप थोड़ा और ज्यादा जानकारी चाहते हैं तो AccuBattery ऐप एक बढ़िया साधन है. ये ऐप आपको बता देगा कि अभी बैटरी की मैक्सिमम क्षमता कितनी है, 85 से 90 प्रतिशत परफॉर्म करने वाली बैटरी ठीक होती है.
स्पेसफिकेशन
देखिए किसी फोन की क्षमता सिर्फ स्पेसिफिकेशन्स से तय नहीं हो सकती. लेकिन आप इसे नज़रअंदाज नहीं कर सकते. खासकर रैम और स्टोरेज को. कम से कम 4 जीबी रैम होने ही चाहिए एक डिवाइस की स्मूथ ऑपरेशन्स के लिए. स्टोरेज जितनी ज़्यादा उतना बेहतर. अगर माइक्रोएसडी कार्ड के लिए सपोर्ट है तो सोने पे सुहागा. डब्बा और साथ में आने वाले सामान फोन का बॉक्स और साथ में आने वाले सामान जैसे चार्जर, हेडफोन, बिल, यूएसबी ट्रांसफर केबल और आजकल तो कई कंपनी बैक कवर भी देती है. आपको ये सब फोन खरीदते समय मिल जाए तो बहुत बढ़िया. अगर फोन वारंटी में है तो आपकी लॉटरी लग गई समझो.
IMEI नंबर देखना
इतना सब देखने के बाद भी एक और चीज़ सुनिश्चित करना ज़रूरी है वो है आइएमईआई चेक करना. आइएमईआई हर फोन का युनीक होता है और ये आपको फोन के सेटिंग्स में अबाउट में मिल जाएगा, या फिर फोन ऐप पर *#06# डायल करके भी आसानी से देख सकते हैं. इसके बाद आपको जाना है https://www.imei.info/ पर यहां आप आइएमईआई डालिए और आपको तकरीबन सारी जानकारी मिल जाएगी.
भरोसे वाला सोर्स सेकेंड हैंड फोन लेना है तो सबसे महत्वपूर्ण है कि फोन आप कहां से ले रहे हैं. सबसे पहले तो अपने आसपास परिचित में देख लीजिए. आपको फोन मिल सकता है लेकिन हो सकता है कि आप मोल-भाव न कर पाएं, लेकिन प्रोडक्ट आपको अच्छा मिल जाएगा. आखिरकार WhatsApp पर बने भतेरे ग्रुप कब काम आएंगे, डाल दीजिए एक मैसेज कि भैया एक सेकेंड हैंड फोन चाहिए. दूसरा आजकल कई कंपनिया यहां तक कि एमेजॉन और फ्लिपकार्ट भी सेकेंड हैंड या रीफ़रबिश्ड फोन बेचतीं है. इन प्लेटफॉर्म्स पर ऊपर बताए सारे टेस्ट तो होते ही हैं, साथ में वारंटी भी मिल जाती है. तो ये कुछ बुनियादी पैमाने हैं जिनको ध्यान में रखकर आप सेकेंड हैंड फोन खरीद सकते हैं
सेकेंड हैंड फोन लेना तो बहुत आसान है लेकिन वो ठीक से चलेगा या नहीं, कितना चलेगा, सर्विस और वारंटी जैसे कई और फेक्टर भी हैं जिनको देखे बिना यदि आपने फोन लिया तो पछताना पड़ सकता है. आपको पछताना न पड़े और एक अच्छा सेकेंड हेंड फोन भी आपको मिल जाए उसके लिए हम हैं.
बजट तय करना
आपको लगेगा कि जब सेकेंड हेंड फोन ही लेना है तो बजट क्यूं? भाई वो इसलिए कि सबसे पहले होती है ज़रूरत. फिर ज़रूरत को पूरा करने के लिए लगते हैं पैसे. पैसे तो आप उतने ही दोगे न जितना आपके बजट में है. सेकेंड फोन लेना का उद्देश्य ये होता है कि जो चीज नई में महंगी मिलेगी उसे थोड़े सस्ते में खरीद लिया जाए. कई लोग ऐसा करके फ्लैगशिप हैंडसेट को अपना बनाना चाहते हैं तो कई लोग मिडरेंज सेंगमेंट के डिवाइस को बजट के रेंज में खरीदना चाहते हैं. आपको अपने हिसाब से फोन खरीदना है तो बजट ही सर्वोपरि होगा.
हाल क्या हैं आपके अगले फोन के?
आप Second hand फोन ले रहे हैं तो फोन को जांचना और परखना आसान है, क्यूंकि वह बॉक्स में बंद नहीं है. अच्छे से देखिए कि फोन का शेप आड़ा तिरछा तो नहीं है. बॉडी पर खरोंच या किसी अन्य किस्म के निशान तो नहीं हैं. याद रखिए कि एक छोटा सा निशान भी फोन की परफॉर्मेंस को खराब कर सकता है. जैसे हो सकता है कि आपको कोने पर एक बहुत छोटा निशान दिखे और वो कैमरे के पास हो तो पूरी संभावना है कि कैमरे पर असर पड़ा हो तो बढ़िया से देख लीजिए फोन को. आवाज कम और ज्यादा करने के बटन और पावर ऑफ करने के बटन भी बॉडी पर होते हैं उनको भी चेक कीजिए. कैमरे का लेंस भी साफ होना चाहिए मतलब अंदर धूल वगैरह न भरी हो.
डिस्प्ले चेक करना
बॉडी तो देख ली अब गौर से चेक करना है डिस्प्ले. खरोंच तो आसानी से दिख जाएगी लेकिन आपको फोन बकायदा चला कर देखना है. फोन लगाकर और सुनकर दोनों तरीके से देखिए. दो चार ऐप्स भी खोल कर देखने में कोई बुराई नहीं है. मैसेज या नोट्स ऐप पर टाइप करके देखिए और लगे हाथ जो कीपैड स्क्रीन पर आता है उसके सभी अक्षर दबा डालिए. कॉल लगाकर देखने से आपको फोन के रिसीवर और माइक्रोफोन की कंडीशन भी पता चल जाएगी और स्पीकर की भी. वैसे आजकल फोन में डिस्प्ले चेक करने का जुगाड़ होता है जैसे कि सैमसंग गैलेक्सी फोन में आप #0# डायल करने पर स्क्रीन पर लाल, हरा और नीले रंग पर टैप करके देख सकते हैं लेकिन ये कोड हर फोन का अलग-अलग है. आप इस परेशानी से निपट भी सकते हैं किसी भी थर्ड पार्टी ऐप से, जैसे TestM या फिर Phone check, डिस्प्ले ठीक से काम कर रहा है या नहीं, चुटकियों में पता चल जाएगा.
चार्जिंग पोर्ट और कनेक्टिविटी पोर्ट
चार्जिंग ठीक से हो रही है मतलब 100% और वो भी फोन के असली चार्जर से ये देखिए. यदि फोन में किस्मत से 3.5 mm जैक है तो कायदे से हेडफोन लगाकर देखिए. संगीत बजना चाहिए और साथ में कॉल भी ढंग से काम कर रहा हो. ब्लूटूथ और WiFi की कनेक्टिविटी देखना भी उतना ही जरूरी है, यदि संभव हो तो अपने किसी ब्लूटूथ डिवाइस से जोड़कर डेखिए और WiFi भी किसी दूसरे नेटवर्क पर चलाकर. फोन के बाहर की चेक लिस्ट में सिम ट्रे चेक करना भी जरूरी है, कहीं टूटा तो नहीं है और आराम से खुल जाता है या नहीं.
कैमरा ऐप
अब तक आपने फोन को ऊपर-ऊपर से जांचा है. अब आते हैं फोन के अंदर. सबसे पहले कैमरा चेक कीजिए, खोलकर नहीं बल्कि दो चार फोटो लेकर वो भी अलग अलग तरीके से जैसे कि नॉर्मल, वाइड एंगल, पोर्ट्रेट, सेल्फ़ी और वीडियो भी. एक काम और आप कर सकते है फोन के कैमरा ऐप की सेटिंग्स में जाइए. वहां जितने भी डिफॉल्ट फीचर्स हैं उनको एक बार खुद आजमा लीजिए.
बैटरी की हेल्थ
फोन यदि बहुत नया है तो बैटरी ठीक ही होगी, लेकिन यदि कुछ महीने भी पुराना है तो बैटरी की हेल्थ देखना जरूरी है. आजकल फोन की सेटिंग्स में ये विकल्प मिल जाता है, लेकिन ये फीचर अभी फ्लैगशिप फोन तक ही सीमित है. आप चाहें तो सेटिंग्स में जाकर बैटरी युसेज देख सकते हैं कि बैटरी कैसा परफार्म कर रही है. नॉर्मल यूज में चार्ज से निकालने के बाद जितना ज्यादा टाइम दिखे बैटरी उतनी अच्छी. आप थोड़ा और ज्यादा जानकारी चाहते हैं तो AccuBattery ऐप एक बढ़िया साधन है. ये ऐप आपको बता देगा कि अभी बैटरी की मैक्सिमम क्षमता कितनी है, 85 से 90 प्रतिशत परफॉर्म करने वाली बैटरी ठीक होती है.
स्पेसफिकेशन
देखिए किसी फोन की क्षमता सिर्फ स्पेसिफिकेशन्स से तय नहीं हो सकती. लेकिन आप इसे नज़रअंदाज नहीं कर सकते. खासकर रैम और स्टोरेज को. कम से कम 4 जीबी रैम होने ही चाहिए एक डिवाइस की स्मूथ ऑपरेशन्स के लिए. स्टोरेज जितनी ज़्यादा उतना बेहतर. अगर माइक्रोएसडी कार्ड के लिए सपोर्ट है तो सोने पे सुहागा. डब्बा और साथ में आने वाले सामान फोन का बॉक्स और साथ में आने वाले सामान जैसे चार्जर, हेडफोन, बिल, यूएसबी ट्रांसफर केबल और आजकल तो कई कंपनी बैक कवर भी देती है. आपको ये सब फोन खरीदते समय मिल जाए तो बहुत बढ़िया. अगर फोन वारंटी में है तो आपकी लॉटरी लग गई समझो.
IMEI नंबर देखना
इतना सब देखने के बाद भी एक और चीज़ सुनिश्चित करना ज़रूरी है वो है आइएमईआई चेक करना. आइएमईआई हर फोन का युनीक होता है और ये आपको फोन के सेटिंग्स में अबाउट में मिल जाएगा, या फिर फोन ऐप पर *#06# डायल करके भी आसानी से देख सकते हैं. इसके बाद आपको जाना है https://www.imei.info/ पर यहां आप आइएमईआई डालिए और आपको तकरीबन सारी जानकारी मिल जाएगी.
भरोसे वाला सोर्स सेकेंड हैंड फोन लेना है तो सबसे महत्वपूर्ण है कि फोन आप कहां से ले रहे हैं. सबसे पहले तो अपने आसपास परिचित में देख लीजिए. आपको फोन मिल सकता है लेकिन हो सकता है कि आप मोल-भाव न कर पाएं, लेकिन प्रोडक्ट आपको अच्छा मिल जाएगा. आखिरकार WhatsApp पर बने भतेरे ग्रुप कब काम आएंगे, डाल दीजिए एक मैसेज कि भैया एक सेकेंड हैंड फोन चाहिए. दूसरा आजकल कई कंपनिया यहां तक कि एमेजॉन और फ्लिपकार्ट भी सेकेंड हैंड या रीफ़रबिश्ड फोन बेचतीं है. इन प्लेटफॉर्म्स पर ऊपर बताए सारे टेस्ट तो होते ही हैं, साथ में वारंटी भी मिल जाती है. तो ये कुछ बुनियादी पैमाने हैं जिनको ध्यान में रखकर आप सेकेंड हैंड फोन खरीद सकते हैं Advertisement













