दिल्ली में चल रहे AI Impact Summit में AI से ज्यादा चर्चा ‘कुत्ते’ की हो रही है. टेक वाली भाषा में कहें तो Robot Dog खूब चर्चा में है. ना-ना जो आप सोच रहे हम अब वो बात नहीं करने वाले. हम तो बस ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि टेक कंपनियों को Robot Dog ही क्यों बनाना होता है. चार पैर तो और जानवरों के भी होते हैं. Robo Cat बनाते या Robo Bull बना देते. Robo Lion बना देते तो क्या ही भौकाल होता? मगर नहीं, टेक कंपनियां तो कुत्ते के पीछे पड़ी हैं. क्यों?
टेक कंपनियां Robodog ही क्यों बनाती हैं? रोबो शेर या हाथी क्यों नहीं?
टेक कंपनियों को Robo Dog ही क्यों बनाना होता है? चार पैर तो और जानवरों के भी होते हैं. Robo Cat बनाते या Robo बैल बना देते. Robo शेर बना देते तो क्या ही भौकाल होता. रोबो डॉग बनाने के पीछे साइंस कम और इमोशनल एंगल ज्यादा है.


टेक कंपनियों के कुत्ता प्रेम को समझने के लिए पहले जरा इंसान और कुत्ते का दोस्ताना समझ लीजिए. 30 हजार साल से ज्यादा पुरानी है दोनों की दोस्ती. चार पैरों वाले इस जानवर को इंसानों का सबसे वफादार साथी माना जाता है. आजकल के जमाने में लोग प्यार से इनको furry friends कहते हैं. माने कुत्ता तो हमारे मानस में बसा हुआ है. अब जानते हैं कि रोबो कुत्ता की यात्रा कब से स्टार्ट हुई.
# John Hays Hammond Jr.ने साल 1940 में "Sparko" के नाम से पहला रोबो कुत्ता बनाया था. इसे प्रोटोटाइप कह सकते हैं. हालांकि इसके चार पैर नहीं थे. बल्कि ये गोलू-मोलू था.
# साल 1968 में University of Southern California के वैज्ञानिकों ने The Phony Pony के नाम से रोबोटिक कुत्ता बनाया था. इसके चार पैर थे और चलता भी था, मगर तार के साथ.
# Sony's AIBO को आप रोबो कुत्ते का पहला सही उदाहरण समझ सकते हैं. Toshitada Doi की टीम ने इसे बनाया था. पहला रोबो कुत्ता जो पब्लिक के लिए भी उपलब्ध था. जापानी स्टोर पर आते ही 20 मिनट में ये आउट ऑफ स्टॉक हो गया था.
# रोबो कुत्ता असल में तब बड़ा हुआ जब 2005 में Boston Dynamics नाम की कंपनी ने BigDog को लॉन्च किया. 154 वजनी ये रोबो कुत्ता अमेरिकी सेना के साथ काम करने के लिए बनाया गया था. मैदान में सेना से आगे जाकर जानकारी जुटाने के लिए. काम तो ठीकठाक करता था, मगर इसकी मोटर खूब आवाज करती थी इसलिए सेना ने इसे बाहर कर दिया.
# इसके बाद कई कंपनियों ने रोबो डॉग बनाना स्टार्ट किए. Swiss रोबोटिक कंपनी ANYbotics का ANYmal जो इंडस्ट्री में काम करने के लिए बनाया गया. Boston Dynamics जो आज की तारीख में रोबोटिक में सबसे बड़ी कंपनी है, इसके भी कुत्ते खूब लोकप्रिय हैं. इनमें सबसे ज्यादा फेमस Atlas है जो गुलाटी भी मारता है. इनका सबसे महंगा रोबो कुत्ता तकरीबन 70 लाख रुपये का आता है.
AI Impact Summit में जो कुत्ता गलगोटिया यूनिवर्सिटी और विप्रो के पवेलियन में ‘भौं-भौं’ कर रहा था, उसे चीनी कंपनी Unitree ने बनाया है. ये कंपनी कई और कमाल के रोबो बनाती है जो Kung Fu से लेकर शानदार डांस करते हैं.
कुत्ता ही क्यों बनाना?रोबो डॉग बनाने के पीछे साइंस कम और इमोशनल एंगल ज्यादा है. कुत्ते को देखते ही इंसान उससे अपना जुड़ाव महसूस करता है. डॉग का फेस और आकार आसानी से भावनात्मक और अक्सर सकारात्मक संबंध बनाता है, जिससे इसे अपनाने में आसानी होती है और बातचीत को बढ़ावा मिलता है. अब भीड़ में अगर आपको कोई शेर या डायनासोर के आकार का कुछ दिखेगा तो एक पल को आप सहम ही जाएंगे. सांप भले रबर का क्यों ना हो, अगर सामने दिखा तो चीख निकल जानी है. लेकिन कुत्ता देखकर ऐसा नहीं होता. National Library of Medicine की रिसर्च भी यही कहती है.
पैसे का चक्कर भी बाबू भईया टेक कंपनियों के कुत्ता प्रेम का एक बड़ा कारण है. कुत्ते वाले विज्ञापन और वीडियो कुछ ज्यादा ही पसंद किए जाते हैं. इनकी मार्केटिंग करना और इनको बेचना दूसरे जानवरों के मुकाबले बहुत आसान है. माने अगर रोबो का डिजाइन कुत्ते का है तो उसे आप अस्पताल में रखो या ऑफिस में या फिर कॉलेज में, हर जगह प्रेम पा ही जाएगा.
अब बात करें साइंस की तो कुत्ते की पहचान हमेशा से ऐसे जानवर की रही है जो आसानी से संतुलन बनाए रख सकता है. उबड़-खाबड़, असमान या अप्रत्याशित वातावरण को बेहतर ढंग से संभाल सकता है.
कुत्ते का आकार गति देने के लिए एक प्राकृतिक, कुशल और अच्छी तरह से समझी जाने वाली संरचना है, जो रोबोटों को नेविगेट करने, चढ़ने और तेजी से चलने की अनुमति देती है. वैसे कई कंपनियां दूसरे डिजाइन भी बनाती हैं जैसे Pleo the Dinosaur, मगर उनको कोई खास लोकप्रियता नहीं मिली है.
कुत्ते का असली कारनामालोगों का मनोरंजन करने जैसे काम से इतर रोबो डॉग कई कमाल के काम कर सकते हैं. उदाहरण के लिए, Boston Dynamics का Spot रोबो भूकंप से लेकर किसी भी आपदा में काम कर सकता है. मलबे में दबे लोगों को तलाश सकता है तो इमरजेंसी में दवाइयां भी पहुंचा सकता है. इसमें लगे कैमरा साफ तस्वीरें खींच सकते हैं, तो सेंसर इंसान की सांस भी पहचान सकते हैं.
युद्ध के मैदान पर भी इनका जौहर देखा जा सकता है. फोर्ब्स की रिपोर्ट कहती है कि यूक्रेन ने अपनी पूरी रोबो डॉग आर्मी बना रखी है जो रूस से लड़ाई में उनके साथ लड़ रहा है. गन से लेकर बम से लैस ऐसे डॉग की कीमत 80 लाख रुपये तक हो सकती है.
कुत्तों का जलवा है फिर वो असली वाला हो या मशीन वाला. समिट से लेकर संसद और सुप्रीम कोर्ट में इनकी चर्चा होती रहती है.
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