'ककककक किरन.....' वो हकलाता था तो उसके प्यार से 'डर' लगता था
शाहरूख खान को हकला कहने वाले, उसकी एक्टिंग के आगे नतमस्तक हो रहे हैं.
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एक होता है हीरो. हरदिलअज़ीज़. सबका चहेता. शरीफ भी, सुंदर भी, हंसमुख भी. मां का दुलारा भी और मोहल्ले का प्यारा भी. अच्छाई का प्रतीक भी और बुराई का विनाशक भी. सच की झंडाबरदारी भी करता है, झूठ से पहरेदारी भी. सारे अच्छे काम करता है. हीरोइन से प्यार करता है, बाप के ख़ून का/बहन की अस्मत का बदला लेता है, विलेन से लड़ता है और उसे हरा कर हैप्पी एंडिंग तक ले जाता है कारवां को.
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