फिल्म रिव्यू: मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर
टॉयलेट की व्यवस्था करने के लिए लड़ाई की कहानी.
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पिछले दो एक सालों में हिंदी सिनेमा ने कुछेक फ़िल्में ऐसी दी हैं जो टैबू समझे जानी वाली समस्याओं पर बात करती हैं. ‘टॉयलेट-एक प्रेमकथा’, ‘हल्का’, ‘फुल्लू’, ‘पैड-मैन’ जैसी फिल्मों ने उन चीज़ों पर बात की जिनका ज़िक्र ओपनली करना हमारे यहां कभी चलन में नहीं रहा. चाहे माहवारी की समस्या हो या फिर देश के एक बड़े तबके के लिए शौचालय न उपलब्ध होना. ‘मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर’ इसी कड़ी की एक और फिल्म है. और बड़ी ही प्यारी फिल्म है. वीडियो में देखिए क्या खास है इस फिल्म में.
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