T20 वर्ल्ड कप 2026 चल रहा है और दिल्ली में भारत बनाम नामीबिया का मैच होने वाला है. लेकिन मैच से पहले ही नामीबिया की टीम नाराज नजर आ रही है. उनके कप्तान गेरहार्ड इरास्मस ने प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि उनकी टीम को एक भी नाइट ट्रेनिंग सेशन नहीं मिला, जबकि भारत को दो नाइट सेशन मिले हैं. मैच फ्लडलाइट्स में शाम 7 बजे शुरू होगा, ऐसे में सवाल उठता है कि नामीबिया दिन में ट्रेनिंग करके इसकी तैयारी कैसे करेगा?
नाइट ट्रेनिंग में इंडिया को 2, नामीबिया को जीरो सेशन! कैप्टन ने उठाए बड़े सवाल
T20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत बनाम नामीबिया मैच से पहले विवाद खड़ा हो गया है. नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस ने आरोप लगाया कि उनकी टीम को नाइट ट्रेनिंग सेशन नहीं मिला, जबकि भारत को यह सुविधा दी गई. दिल्ली में होने वाले इस मुकाबले से पहले यह मुद्दा क्रिकेट फैंस के बीच चर्चा का विषय बन गया है.


Erasmus ने कहा,
हमें इस मैच से पहले एक भी नाइट ट्रेनिंग सेशन नहीं मिला. पता नहीं क्यों? मुझे लगता है कि भारत ने दो नाइट सेशन लिए हैं. अब आप ही समझ लीजिए.
बात साफ है, यह ICC और आयोजकों पर हल्का तंज है. नामीबिया जैसे एसोसिएट देश के लिए यह बड़ी समस्या है, क्योंकि उनके घरेलू मैदानों पर फ्लडलाइट्स नहीं हैं. वहां दिन-रात के मैच कम होते हैं. टीम के सिर्फ कुछ खिलाड़ियों ने ILT20, नेपाल प्रीमियर लीग या पिछले वर्ल्ड कप में नाइट क्रिकेट खेला है. बाकी खिलाड़ियों को अंधेरे में बल्लेबाजी और गेंदबाजी की ज्यादा आदत नहीं है.
फिर भी टीम का हौसला कम नहीं हुआ है. इरास्मस ने कहा,
"हम नामीबियन स्टाइल में आएंगे और लड़ेंगे.”
नामीबिया के कप्तान ने टीम को चिंगारी बढ़ाने वाला मैसेज भी दिया. बोले,
“बस मोमेंट में रहो, गेंद को मेरिट पर खेलो और मौके का मजा लो. अगर हम इंडिया, क्राउड या सिचुएशन से डर गए तो मजा नहीं आएगा. लेकिन क्लियर माइंड रखोगे तो चांस बढ़ जाएगा."
यानी टीम का जज्बा मजबूत है. अब देखना होगा कि 12 फरवरी को भारत के खिलाफ वह कैसा प्रदर्शन करती है.
बता दें कि नामीबिया ने अपना पहला मैच नीदरलैंड्स के खिलाफ खेला था, जिसमें उसे हार का सामना करना पड़ा. ऐसे में भारत के खिलाफ यह मुकाबला उसके लिए करो या मरो जैसा है. भारत सह-मेजबान होने के साथ डिफेंडिंग चैंपियन भी है और घरेलू परिस्थितियों में खेल रहा है. इसके बावजूद नामीबिया का कहना है, "हम यहां सिर्फ हिस्सा लेने नहीं आए, मुकाबला करने आए हैं."
इस टूर्नामेंट में एसोसिएट टीमों का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है. USA जैसी टीमों ने दिखाया है कि वे बड़ी टीमों को कड़ी टक्कर दे सकती हैं, और नामीबिया भी वही करने की कोशिश में है.
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