इंटरनेशनल लेवल पर पहला मेन्स टी20 मैच 2005 में खेला गया. इस शॉर्टेस्ट फॉर्मेट को ज्यादा पॉपुलर बनाने के लिए साल 2007 में टी20 वर्ल्ड कप का आयोजन हुआ. यह वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका में खेला गया. टीम इंडिया ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन करते हुए खिताब पर कब्जा किया. करीब 19 साल पहले खेले गए, इस फर्स्ट टी20 वर्ल्ड कप की यादें शायद कुछ धुंधली हो गई हैं. चलिए बताते हैं कि भारत की तरफ से इस टूर्नामेंट में किन बैटर्स और बॉलर्स का दबदबा रहा.
पहले T20 वर्ल्ड कप के वो धुरंधर, जिन्होंने टीम इंडिया को बनाया था चैंपियन!
भारत के नाम मेन्स टी20 इतिहास का पहला वर्ल्ड कप जीतने का रिकॉर्ड दर्ज है. साल 2007 में टीम इंडिया ने पाकिस्तान को फाइनल में हराकर विश्व कप जीता था. भारत की तरफ से इस टूर्नामेंट में गौतम गंभीर और RP Singh ने यादगार प्रदर्शन किया.


टी20 वर्ल्ड कप 2007 के लिए जब टीम इंडिया का एलान हुआ तो उसमें कई धुरंधर बल्लेबाज शामिल थे. लेकिन, जब वर्ल्ड कप में भारत के परफॉर्मेंस की बात होती है, तो गौतम गंभीर का नाम लिया जाता है. गंभीर टीम इंडिया की तरफ से टॉप स्कोरर रहे. पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल मुकाबले में उनकी 75 रनों की पारी निर्णयायक साबित हुई. उनकी इसी पारी के चलते भारत टी20 वर्ल्ड कप जीतने में सफल रहा. उन्होंने खिताबी मुकाबले में 8 चौके और 2 छक्के लगाए थे. गंभीर ने टूर्नामेंट में 7 मैचों की 6 पारियों में 227 रन बनाए. इनमें 3 हाफ सेंचुरीज शामिल थीं. इस दौरान उन्होंने 27 चौके और 5 छक्के भी जड़े.
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टी20 वर्ल्ड कप 2007 में भारत के बाकी जिन दो बल्लेबाजों का बैट चला, वो एमएस धोनी और युवराज सिंह हैं. धोनी ने 7 मैचों की 6 इनिंग्स में बैटिंग की. उनके बल्ले से 154 रन निकले. उनका हाईएस्ट स्कोर 45 रन रहा. उन्होंने टूर्नामेंट में 13 चौके और 3 छक्के उड़ाए. वहीं, युवराज सिंह की बात करें, तो उनके लिए यह वर्ल्ड कप काफी यादगार रहा. लीग मैच में उन्होंने इंग्लैंड के पेसर स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में 6 छक्के लगाए थे. पूरे टूर्नामेंट में युवी का बल्ला खूब चला. उन्होंने 5 पारियों में 148 रन स्कोर किए. इनमें 9 चौके और 12 छक्के शामिल थे. इस दौरान युवराज का हाईएस्ट स्कोर 70 रन रहा. इन तीनों बल्लेबाजों के अलावा वीरेंद्र सहवाग ने 133 और रॉबिन उथप्पा ने 113 रन बनाए.
बॉलर्स में आरपी सिंह टॉप परटी20 वर्ल्ड कप 2007 में आरपी सिंह भारत की तरफ से सबसे सक्सेसफुल बॉलर रहे. पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने बेहतरीन बॉलिंग करते हुए 12 विकेट चटकाए. 20 सितंबर 2007 को आरपी सिंह ने डरबन में साउथ अफ्रीका के खिलाफ अपनी गेंदों से कहर बरपाया. मैच में उन्होंने खतरनाक बॉलिंग करते हुए 13 रन देकर 4 विकेट झटके. वर्ल्ड कप में यह उनकी बेस्ट परफॉर्मेंस थी. ओवर ऑल आंकड़े देखें, तो वह सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले संयुक्त रूप से दूसरे बॉलर रहे.
आरपी के अलावा भारत की तरफ से जिन गेंदबाजों ने उम्दा बॉलिंग की, उनके नाम हैं इरफान पठान और हरभजन सिंह. इरफान ने टूर्नामेंट में 6 इनिंग्स में 10 विकेट लिए. उनकी बेस्ट बॉलिंग परफॉर्मेंस वर्ल्ड कप फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ रही. खिताबी मुकाबले में उन्होंने सधी हुई गेंदबाजी करते हुए 16 रन देकर 3 विकेट लिए. इस दमदार परफॉर्मेंस के चलते उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच खिताब दिया गया. वहीं, हरभजन सिंह की बात करें, तो उन्होंने 6 पारियों में बॉलिंग की और 7 विकेट लिए. उनका सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन 24 रन देकर 2 विकेट आउट करना रहा. पूरे टूर्नामेंट में टीम इंडिया ने मिल जुलकर खेला, जिसके चलते भारत टी20 इतिहास का पहला वर्ल्ड कप जीतने में सफल रहा.
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