जोहानिसबर्ग का मैदान. सामने धुर विरोधी पाकिस्तान. आखिरी ओवर में जीत के लिए चाहिए थे, सिर्फ 13 रन. स्ट्राइक पर था वो बल्लेबाज, जिसे पूरी दुनिया 'मैच फिनिशर' मानती थी. मिसबाह-उल-हक.
धोनी कैसे बने टीम इंडिया के कप्तान? सचिन ने निभाया था अहम रोल
टीम इंडिया को 2007 T20 वर्ल्ड कप चैंपियन बनाने वाले कप्तान Mahendra Singh Dhoni फर्स्ट चॉइस नहीं थे. फिर ऐसा क्या हुआ कि वो टीम इंडिया के कप्तान बन गए?
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कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के पास दो विकल्प थे. एक थे अनुभवी हरभजन सिंह. दूसरे तीन मैच पहले डेब्यू करने वाले मीडियम पेसर जोगिंदर शर्मा. उस टेंस मोमेंट पर शायद कोई दूसरा कप्तान अनुभव के साथ ही जाता. लेकिन, हमें पता है महेंद्र सिंह धोनी ने किसे चुना और आगे क्या हुआ?
लेकिन, क्या आप जानते हैं भारत को पहली बार T20 वर्ल्ड कप जिताने वाला कप्तान महेंद्र सिंह धोनी फर्स्ट चॉइस कैप्टन नहीं थे. फिर ऐसा क्या हुआ कि महेंद्र सिंह धोनी भारत के कप्तान बन गए?
इसकी शुुरुआत हुई वेस्टइंडीज में हुए 50 ओवर के वर्ल्ड कप से. टूर्नामेंट में टीम इंडिया की ऐसी फजीहत हुई कि पूछिए मत. बांग्लादेश से ग्रुप स्टेज में हारकर टीम बाहर हो गई. राहुल द्रविड़ तब टीम इंडिया के कप्तान थे. उनकी कप्तानी पर सवाल उठने लगे.
सचिन और गांगुली का भी ढलान होता दिख रहा था. देश में फैंस क्रिकेटर्स के पुतले फूंक रहे थे. सचिन ने बाद में बताया कि वो क्रिकेट को अलविदा कहने तक का मन बना चुके थे.
तभी एंट्री हुई एक ऐसे टूर्नामेंट की, जिसे कोई सीरियसली नहीं ले रहा था. T20 वर्ल्ड कप 2007. वैसे तो ये वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका में होना था. लेकिन, सबसे बड़ा सवाल ये था कि टूर्नामेंट में क्या टीम इंडिया भाग लेगी?
बीसीसीआई के सचिव निरंजन शाह ने जब T20 वर्ल्ड कप का प्रस्ताव सुना तो उन्होंने सीधा मना कर दिया. लेकिन, जब आईसीसी ने 2011 वर्ल्ड कप की मेजबानी छीनने की धमकी दी तो मजबूरी में BCCI टीम भेजने को तैयार हुआ.
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राहुल, सचिन और गांगुली हट गएइधर, ODI वर्ल्ड कप में मिली करारी हार के बाद कप्तान राहुल द्रविड़ ने साफ इन्कार कर दिया कि वो तो इस टूर्नामेंट में नहीं खेलेंगे. साथ ही उन्होंने अपने दो दिग्गज साथियों का भी नाम ले लिया. उन्होंने कहा कि सौरव गांगुली और सचिन तेंदुलकर भी इस टूर्नामेंट में नहीं खेलेंगे. सीनियर्स का कहना था कि T20 यंग्सटर्स का खेल है.
अब BCCI का सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि टीम तो भेज देंगे पर कप्तानी कौन करेगा? रेस में युवराज का नाम सबसे आगे था. वो थे भी टीम इंडिया के वाइस कैैप्टन. बीसीसीआई की बैठक हुई. दिलीप वेंगसरकर की अगुवाई वाली चयन समिति के मन में एक नाम था. रांची से आने वाला लंबे बालों वाला विकेटकीपर बैटर महेंद्र सिंह धोनी.
धोनी की कप्तानी में सचिन का रोललेकिन, वेंगसरकर के मन में वो नाम आया कहां से? उनका नाम किसी और ने नहीं, बल्कि टीम इंडिया के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने ही सुझाया था. दरअसल, हुआ यूं कि BCCI के तत्कालीन अध्यक्ष शरद पवार ने सचिन तेंदुलकर से मशविरा मांगा कि 'किसे कप्तान बनाया जाए?' सचिन ने बिना देर किए धोनी का नाम ले लिया.
सचिन का लॉजिक सिंपल था. धोनी की मैच को रीड करने की काबिलियत और उनका शांत दिमाग उनकी ताकत थी. सचिन ने गौर किया था कि विकेट के पीछे से धोनी फील्डिंग और गेंदबाजी को लेकर जो सुझाव देते थे, वो एकदम सटीक बैठते थे.
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युवराज हो गए थे मायूसहालांकि, सचिव निरंजन शाह चीफ सेलेक्टर वेंगसरकर की इस मांग से सहमत नहीं थे. उन्हें लगता था कि युवराज को ही कप्तान बनाया जाना चाहिए. बहस हुई, वोटिंग हुई और अंत में तय हुआ कि धोनी को कप्तानी सौंप दी जाए. लेकिन, तब तक बातें सिर्फ टी20 वर्ल्ड कप तक ही सीमित थीं.
क्योंकि दिलीप वेंगसरकर की अध्यक्षता वाली चयन समिति जानती थी ये दांव उल्टा भी पड़ सकता है. युवराज सिंह, जो कप्तानी के लिए टकटकी लगाए बैठे थे. वो भी थोड़े मायूस हुए. लेकिन, टीम की कमान अब धोेनी के हाथों में आ गई थी.
और फिर जो हुआ, वो इतिहास है…
धोनी ने अपनी 'यंगिस्तान' की फौज तैयार की. दक्षिण अफ्रीका पहुंचे. फाइनल में पाकिस्तान को हराकर वो कप उठा लाए, जिसे कोई भारत की झोली में नहीं देख रहा था.
द्रविड़ ने छोड़ी कप्तानीलेकिन, कहानी में असली ट्विस्ट आया T20 वर्ल्ड कप के बीच. 14 सितंबर 2007 को राहुल द्रविड़ ने भारतीय टीम की कप्तानी छोड़ दी. 10 दिन बाद धोनी ने T20 वर्ल्ड कप जितवा दिया. जो कप्तान सिर्फ एक टूर्नामेंट का बैकअप था, अब BCCI को भविष्य का कप्तान दिखने लगा.
वाइट बॉल क्रिकेट में BCCI ने धोनी को कमान सौंप दी. टेस्ट की कमान मिलने में एक साल लगा. लेकिन, एक साल के भीतर टीम इंडिया के ऑल फॉर्मेट कैप्टन बन गए. इसके बाद धोनी ने भारत को ODI वर्ल्ड कप, टेस्ट मेस और चैंपियंस ट्रॉफी चैंपियन सब बनाया.
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