6,6,6,6,6,6... जब युवराज सिंह ने पापा रेफरी के सामने बेटे स्टुअर्ट ब्रॉड को कूटा!
टीम इंडिया के पूर्व ऑलराउंडर Yuvraj Singh ने जब इंग्लैंड के पेसर Stuart Broad के खिलाफ ओवर में 6 छक्के लगाए थे. स्टुअर्ट के पिता Chris Broad, जो T20 वर्ल्ड कप में मैच रेफरी थे वो भी स्टेडियम में मौजूद थे.

19 सितंबर 2007. डरबन का किंग्समीड मैदान. T20 वर्ल्ड कप का पहला एडिशन. इंग्लैंड के कप्तान पॉल कॉलिंगवुड ने गेंद जवान खून स्टुअर्ट ब्रॉड को थमाई. पारी का ये 19वें ओवर था. 6 गेंद में 14 रन बनाकर युवराज सिंह स्ट्राइक पर थे. अगली 6 गेंदों में वो हुआ, जो न भारत भूल सकता था. न इंग्लैंड अब तक भूल पाया है. काऊ कॉर्नर, बैकवर्ड स्क्वायर लेग, एक्सट्रा कवर, बैकवर्ड पॉइंट, मिड विकेट और लॉन्ग ऑन. मैदान का ऐसा कोई कोना नहीं बचा था, जहां युवराज ने सीधे बॉल को बाउंड्री के पार न पहुंचाया हो.
युवराज के हर छक्के के साथ कॉमेंट्री बॉक्स में रवि शास्त्री उछल रहे थे. लेकिन, बगल के ही कमरे में बैठे एक मैच रेफरी का सीना छलनी हो रहा था. वैसे तो मैच रेफरी का काम निष्पक्षता से निर्णय करना है. लेकिन, जब युवराज के सामने बॉलर खुुद रेफरी का बेटा हो, तो बुरा तो लगेेेगा ही. वो रेफरी कोई ओर नहीं स्टुअर्ट ब्रॉड के पिता क्रिस ब्रॉड थे. ब्रॉड उस मैच के तो रेफरी नहीं थे. क्योंकि रेफरी हमेशा न्यूट्रल देश का होता है. लेकिन, T20 वर्ल्ड कप में वो भी बतौर रेफरी शामिल थे.
ये T20 वर्ल्ड कप के ग्रुप स्टेज का वही मैच था, जिसमें युवराज सिंह ने ब्रॉड के ओवर में 6 छक्के जड़े थे. वही, ब्रॉड जो आगे चलकर इंग्लैंड के सबसे महान बॉलर्स में से एक बने. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने इंग्लैंड के लिए 600 विकेट झटके. आगे चलकर यही मैच उनके करियर और जीवन दोनों का टर्निंग पॉइंट बन गया.
14 दिन पहले लिखी गई थी पटकथा19 सितंबर को युवराज के बल्ले से निकली इस ऐतिहासिक पारी की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी. 14 दिन पहले, जब इंग्लैंड के एक बैटर ने युवराज की रातों की नींद उड़ा दी थी. तारीख थी 5 सितंबर 2007. मैदान था लंदन का द ओवल. भारत और इंग्लैंड के बीच 7 मैचों की ODI सीरीज चल रही थी. सीरीज का ये छठा मैच था.
कप्तान राहुल द्रविड़ ने आखिरी ओवर ऑलराउंडर युवराज को सौंप दिया. सामने थे इंग्लिश ऑलराउंडर दिमित्रि मस्कैरेहनस. युवराज बॉल करते गए और मस्कैरेहनस छक्के लगाते चले गए. उन्होंने ओवर में 5 छक्के लगा दिए. हालांकि, भारत ये मैच सचिन तेंदुलकर की शानदार पारी से जीत गया. लेकिन, युवराज इस अपमान को नहीं भूल पाए.
14 दिन बाद, T20 वर्ल्ड कप में भारत और इंग्लैंड एक बार फिर आमने-सामने थे. ग्रुप स्टेज में न्यूजीलैंड से मिली हार के बाद भारत के लिए ये करो या मरो का मुकाबला था. सुपर सिक्स में जगह बनाने के लिए ये बहुत टेंस मुकाबला था. भारत के लिए सब दांव पर था. मैच में टीम इंडिया को गौतम गंभीर और वीरेंद्र सहवाग ने अच्छी शुरुआत दिलाई. दोनों ने पहले विकेट के लिए 136 रन जोड़े.
लेकिन, मैच का असली रुख रॉबिन उथप्पा के विकेट के बाद पलटा. जब युवराज सिंह बैटिंग करने उतरे. 14 दिन पहले हुए अपमान को अभी वो भूले भी नहीं थे. इधर, एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने उन्हें फिर भड़का दिया. उसके बाद जो हुआ, वो क्रिकेट की सबसे यादगार कहानियों में से एक है.
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फ्लिंटॉफ ने युवराज को भड़का दिया थादरअसल, 18वें ओवर में युवराज ने फ्लिंटॉफ के खिलाफ दो चौके जड़ दिए थे. फ्लिंटॉफ इस पर इतना भड़क गए कि उन्होंने गालियां देते हुए युवराज का गला काटने की बात तक कह दी. दोनों के बीच काफी गहमागहमी हो गई. इस विवाद ने 14 दिन पहले हुए अपमान के जख्म को भी हरा कर दिया. विवाद और अपमान के उस घूंट को अब युवराज सूत समेत लौटाना चाहते थे. युवराज पर गुस्सा हावी था.
इंग्लैंड के कप्तान पॉल कॉलिंगवुड ने अब गेंद स्टुअर्ट ब्रॉड को थमाई. ब्रॉड का ये चौथा ओवर था. अब तक तीन ओवर में उन्होंने सिर्फ 24 रन दिए थे. ऐसे में कप्तान को उम्मीद थी कि एक बार फिर वो किफायती ओवर निकालने में सफल होंगे. लेकिन, हुआ इसके बिलकुल उलट. युवराज आर या पार का मन बना चुके थे. दिन भी उन्हीं का था. फिर क्या था. ब्रॉड एक के बाद एक बॉल करते गए. युवराज गगनचुंबी छक्के लगाते चले गए.
युवराज के यादगार 6 छक्केओवर की पहली बॉल. युवराज बैठे और मिड विकेट के ऊपर से काऊ कॉर्नर में छक्का जड़ दिया. गेंद स्टेडियम के बाहर चली गई. 111 मीटर के इस छक्के ने युवराज का इरादा ज़ाहिर कर दिया.
ब्रॉड ने सोचा इस बार युवराज के पैड्स को टारगेट करेंगे. लेकिन, युवराज भी तैयार थे. उन्होंने फ्लिक कर बॉल को बैकवर्ड स्क्वायर लेग के ऊपर से बाउंड्री के पार गिराया.
जब पैरों पर बॉल डालने की रणनीति विफल हुई. ब्रॉड ने वाइड यॉर्कर का सहारा लिया. युवराज जानते थे कि इस बार बॉलर का निशाना ऑफ स्टंप के बाहर की वाइड लाइन होगी. उन्होंने पूरी ताकत से बल्ला घुमाया और एक्स्ट्रा कवर और लॉन्ग ऑफ के बीच बॉल को बाउंड्री के पार पहुंचा दिया.
लगातार तीन बॉल्स पर तीन छक्के लगने के बाद ब्रॉड ओवर से अराउंड द विकेट चले गए. लेकिन, वो बॉल को पिच नहीं कर सके. चौथी बॉल फुल टॉस गिर गई. युवराज तो तैयार थे ही. उन्होंने इस बार बैकवर्ड पॉइंट पर छक्का लगा दिया.
अब ओवर की 5वीं बॉल आई. युवराज जैसे ब्रॉड के दिमाग से खेल रहे हों. वो जानते थे कि बॉलर अब गिव अप कर चुका है. युवराज ने इस बार घुटनों पर बैठकर मिड विकेट की दिशा में एक और लंबा छक्का लगा दिया.
इंग्लैंड के कप्तान, साथी बॉलर्स सब ब्रॉड से बातचीत कर रहे थे. लेकिन, युवराज की नज़र सिर्फ एक प्लेयर पर थी. दिमित्रि मस्कैरेहनस. उनका हिसाब चुकता हो गया था.
लेकिन, फ्लिंटॉफ वाला गुस्सा अब तक नहीं निकला था. युवराज ने अंतिम बॉल भी ब्रॉड के ऊपर से लॉन्ग ऑन की दिशा में बाउंड्री के पार गिरा दिया.
ब्रॉड ने आगे चलकर 600 टेस्ट विकेट लिएइसी के साथ युवराज की फिफ्टी भी पूरी हो गई. वो भी महज 12 बॉल्स में. फिफ्टी का जश्न उन्होंने नॉन स्ट्राइकर एंड पर खड़े होकर एंजॉय कर रहे टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी से मिलकर मनाया. दोनों की वो खुशी बता रही थी कि इंग्लैंड चारों खाने चित हो गया है. ब्रॉड लंबे समय तक युवराज की तरफ से मिली इस ज़लालत को नहीं भूल सके. उन्हें मेंटल कंडीशनिंग कोचेज का सहारा लेना पड़ा. तब जाकर वो इस ट्रॉमा से बाहर आ पाए.
उनके पिता का डर कि कहीं ये उनके बेटे के करियर का अंत न बन जाए. सिर्फ डर ही रहा. ब्रॉड ने आगे चलकर टेस्ट क्रिकेट में इंग्लैंड के लिए 600 से ज्यादा शिकार किए. लेकिन, उन्हें जब-जब याद किया जाता है, युवराज के उन 6 छक्कों की बात भी ज़रूर होती है. युवराज की वो जर्सी शायद उनके लिए आगे चलकर मोटिवेशन का कारण बनी हो. लेकिन, उसने उन्हें ट्रॉमा में बार-बार जरूर धकेला होगा.
अब तक नहीं टूटा युवराज का रिकॉर्डइस वाकये को अब लगभग 19 साल हो गए हैं. लेकिन, अब तक युवराज की सबसे तेज फिफ्टी का रिकॉर्ड कोई भी इंडियन बैटर नहीं तोड़ सका है. 2023 में नेपाल के बैटर दीपेंद्र सिंह एरी ने मंगोलिया के खिलाफ 9 बॉल्स में फिफ्टी जरूर बनाई, पर टेस्ट प्लेइंग नेशन का कोई भी बैटर उनके रिकॉर्ड के आसपास भी नहीं पहुंच सका है.
हालांकि, इंटरनेशनल क्रिकेट में एक ओवर में 6 छक्के लगाने वाले युवराज एकमात्र बैटर नहीं हैं. उनसे पहले, 2007 ODI वर्ल्ड कप में नीदरलैंड्स के खिलाफ साउथ अफ्रीकी ओपर हर्शेल गीब्स ने ये कारनामा किया था. लेकिन, युवराज का ये रिकॉर्ड कई मायनों में उनसे बेहतर है. युवराज ने इंग्लैंड जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ और करो या मरो के मैच में ये कारनामा किया था. साथ ही ये युवराज के लिए ये सिर्फ उपलब्धि नहीं थी. ये उसे अपमान का बदला था, जो 14 दिन पहले इंग्लैंड में उन्होंने झेला था.
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