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सानिया की 'मेंटॉरशिप' को ट्रोल कर रहे लोगों को असल बात समझ नहीं आ रही!

सानिया RCB की मेंटॉर क्यों नहीं हो सकती?

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सानिया मिर्ज़ा (फोटो - इंडिया टुडे)

'RCB ने सानिया मिर्ज़ा को विमेन RCB का मेंटॉर बनाया है. अब चाकदा एक्सप्रेस में झूलन गोस्वामी का रोल करने वाली अनुष्का शर्मा को, बोलिंग कोच बनाने के उनके फैसले का इंतजार नहीं कर सकता.'

ये उन तमाम विचारों में से एक है, जो RCB द्वारा लिए गए एक फैसले के बाद से लगातार दिख रहे हैं. फैसला, सानिया मिर्ज़ा को RCB विमेन टीम का मेंटॉर बनाना. RCB ने ये अनाउंस करते हुए ट्वीट किया था,

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'जब हमारा कोचिंग स्टाफ क्रिकेट से जुड़ी चीजों को हैंडल कर रहा हो, हमारी विमेन क्रिकेटर्स को अंडर प्रेशर बेहतर करने के लिए गाइड करने की भूमिका में हम इससे बेहतर किसी को नहीं सोच सकते. हमारे साथ जुड़कर स्वागत कीजिए हमारी विमिंस टीम की मेंटॉर, एक चैंपियन एथलीट और एक मार्गदर्शक. नमस्कार सानिया मिर्ज़ा.'

और आप इस ट्वीट के रिप्लाई और क़ोट ट्वीट में जाएंगे, तो पता चलेगा कि दुनिया कितनी तार्किक है. लोग इस फैसले के बाद से ही RCB और सानिया दोनों को ट्रोल कर रहे हैं. कई लोग चाहते हैं कि इस हाल में सचिन तेंडुलकर को जॉन सीना का कोच बन जाना चाहिए. तो कई लोगों की मांग है कि शाहरुख खान इंडियन हॉकी टीम के कोच बन जाएं.

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तो कई लोग बस इसलिए इस फैसले के खिलाफ़ हैं क्योंकि सानिया ने कभी क्रिकेट नहीं खेली. ऐसे तमाम लोग ना तो इस ट्वीट को पढ़ रहे हैं, ना सानिया का रोल समझ रहे हैं. बस अपनी भड़ास निकालने के लिए कुछ भी लिखे जा रहे हैं. जबकि टीम RCB ने क्लियर कर दिया है कि क्रिकेट से जुड़े मामले दूसरी टीम देखेगी.

और इस टीम में कमाल के क़ाबिल लोग हैं. अपनी कोचिंग में तीन बार वर्ल्ड चैंपियन बन चुके बंदे को इन्होंने हेड कोच बनाया है. तमाम दिग्गजों के साथ काम कर चुका बंदा इनका बैटिंग कोच है. माइक हेसन खुद हेड ऑफ क्रिकेट ऑपरेशंस हैं. लेकिन जनता को क्या, इन्हें तो कोई टॉपिक चाहिए. फ्री में मिल रहे इंटरनेट को खर्च भी तो करना है.

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मिल गया टॉपिक. कोई कह रहा कि कभी टीम गेम ना खेलीं सानिया किसी टीम की मेंटॉर कैसे हो सकती हैं. अब इनका क्या करें? सबसे पहले तो इन्हें टीम की डेफिनेशन बताएं. और ऑक्सफोर्ड के मुताबिक टीम का अर्थ- लोगों का वह समूह जो एकसाथ मिलकर दूसरे समूह के खिलाफ़ कोई खेल खेलें. और समूह तो एक से ज्यादा लोग ही होते हैं.

सानिया ने डबल्स और मिक्स्ड डबल्स में खूब मैच खेले हैं. डेविस कप या एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे इवेंट्स में भी वो खेली हैं. यानी टीम गेम ना खेलने वाली तो कोई बात ही नहीं हैगी. सानिया के पास टीम गेम का पूरा अनुभव है. उन्होंने तमाम ग्रैंडस्लैम जीते हैं. टेनिस के सबसे बड़े इवेंट में कितना प्रेशर होता होगा, आप जानते ही हैं.

ऐसे में अगर टीम चाहती है कि उनके प्लेयर्स को एक चैंपियन आकर प्रेशर से डील करना सिखाए, तो बुराई क्या है? हां, ये ठीक बात है कि पहले हमने ऐसे उदाहरण कम देखे हैं, जब किसी और गेम का लेजेंड किसी और गेम के प्लेयर्स को मेंटॉर कर रहा हो. लेकिन कुछ नया ट्राई करने में बुराई क्या है? क्या सानिया इंडिया में विमिंस स्पोर्ट्स के सबसे बड़े नामों में से एक नहीं हैं?

क्या सानिया ने अपने गेम में सबसे ऊंचा दर्जा नहीं हासिल किया? और जब क्रिकेट से जुड़ी चीजों के लिए अलग टीम रखकर, RCB चाहती है कि सानिया भी उनकी टीम के साथ रहें, तो इसमें बुराई क्या है? जिस देश की सरकारी संस्था सलमान खान जैसे एक्टर को ओलंपिक्स जैसे इवेंट में गुडविल अंबेसडर बनाने का फैसला कर सकती है, वहां एक चैंपियन एथलीट अगर दूसरे एथलीट्स की मदद कर रही है तो इसमें सर पीटने जैसा क्या है? सर, आपके पास तो ज्यादा काम हैं नहीं, सानिया को तो उनका काम कर लेने दीजिए.

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