इंग्लैंड की धरती पर चल रहे आईसीसी वीमन्स क्रिकेट वर्ल्ड कप में इंडिया सेमीफाइनल तक पहुंच गया है. अपना पिछला मैच साउथ अफ्रीका के हाथों हारने के बावजूद टीम इंडिया की इन लड़कियों ने न्यूजीलैंड को 186 रनों से हरा दिया है. पहले कप्तान मिताली राज ने अपने करियर का छठा शतक जड़ा और फिर बारी आई 266 रनों के स्कोर को डिफेंड करने की तो स्पिनर राजेश्वरी गायकवाड़ ने महज 15 रन देकर 5 विकेट ले लिए. ये राजेश्वरी की बेस्ट बॉलिंग फिगर है. 7.3 ओवरों में 15 रन देकर 5 विकेट और एक मेडन. इसी बहाने जानिए इस होनहार क्रिकेटर की कहानी.इस वर्ल्ड कप में अपना पहला मैच खेल रहीं राजेश्वरी गायकवाड़ ने जबर वापसी की है. मैच के बाद होने वाली प्रेजटेंशन सेरेमनी में एक सवाल पूछे जाने पर कि उनका फिटनेस लेवल इतना अच्छा कैसे हो गया, राजेश्वरी ने कहा कि टीम से बाहर थी तो बाकी टीम वालों के लिए ड्रिंक्स लेकर खूब दौड़ी-भागी जिससे काफी फिट रही. सवाल अंग्रेजी में थे जिन्हें टीममेट वेदा कृष्णमूर्ति पहले कन्नड़ में उसे समझातीं और राजेश्वरी हिंदी में जवाब देतीं और फिर वेदा अंग्रेजी में बतातीं. प्लेइंग XI से बाहर रही इस खिलाड़ी की इस बात से ही पता चल जाता है कि वो कितनी बड़ी टीमप्लेयर है. गायकवाड़ ने जनवरी 2014 में इंटरनेशनल डेब्यू किया और अपनी पहली ही सीरिज में 8 विकेट लिए. श्रीलंका के खिलाफ. उस सीरिज में वो सबसे ज्यादा विकेट लेने वाली बॉलर थीं. इसके बाद हुई वीमन्स चैंपियनशिप में ये स्पिनर 16 मैचों में 25 विकेटों के साथ दुनिया भर में चौथे नंबर पर आ गई. राजेश्वरी के ऊपर इस लिस्ट में ऑस्ट्रेलिया की जेस जोनासेन, इंग्लैंड की हीदर नाइट औऱ विंडीज की अनीसा मोहम्मद थीं. मगर खास बात ये है कि राजेश्वरी इकॉनमी रेट के मामले में दुनिया के 20 टॉप महिला गेंदबाजों में सबसे ऊपर रहीं. वो भी पूरे 2 साल. राजेश्वरी की ये फॉर्म पहले इसी साल जनवरी में कोलंबो में हुए वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स और फिर साउथ अफ्रीका में हुई चार देशों की सीरिज में कायम रही. राजेश्वरी के अलावा टीम में तीन स्पिनर्स हैं और इसके बावजूद टीम में जगह बनाना कोई आसान बात नहीं रही.
कर्नाटक के बीजापुर जिले से आने वाली इस प्लेयर ने यहां तक पहुंचने के लिए लंबा सफर तय किया है. 11वीं में पढ़ती थी जब 17 साल की राजेश्वरी ने क्रिकेट को अपना करियर बना लिया था. ग्रेजुएशन करते हुए टीम इंडिया में साल जनवरी 2014 में शामिल हुईं. एक सरकारी प्राइमरी स्कूल टीचर की बेटी का नाम कर्नाटक से आने वाली पांचवीं महिला क्रिकेटर के रूप में शामिल हो गया. अपने एक इंटरव्यू में राजेश्वरी ने बताया था कि वो आज टीम इंडिया तक पहु्ंच पाई हैं तो इसके पीछे एक तो पिता का साथ और दूसरा बीजापुर में लड़कियों का क्रिकेट क्लब खुलना शामिल है और इसी के चलते वो क्रिकेट की ट्रेनिंग ले पाईं. द हिंदू को दिए एक इंटरव्यू में राजेश्वरी ने कहा था कि कि वो टीम इंडिया तक पहुंच गईं मगर साथ ही ये भी मानती हैं कि महिला क्रिकेट पर कोई बात ही नहीं करता है. उन्हें बहुत कम पब्लिसिटी मिलती है. वो कहती हैं, महिला क्रिकेट को आज भी बड़े कॉरपोरेट हाउस और मल्टीनेशनल कंपनियों की मदद नहीं मिलती है. साथ ही सवाल भी उठाती हैं कि चाहे हम क्रिकेट या किसी भी दूसरे खेलों को एंटरटेनमेंट मानें मगर कोई भी प्लेयर अपनी पॉकेट से पैसा खर्च करके कब तक किसी गेम को खेलना जारी रख सकता है.
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