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पृथ्वी-सरफ़राज के साथ ये 'कांड' कोहली-शास्त्री के जमाने में होता तो?

सेलेक्शन कमिटी के इन ब्लंडर्स का क्या?

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इंडिया टीम सेलेक्शन पर कई सवाल चल रहे (एपी फाइल)

पृथ्वी शॉ, नीतीश राणा, उमेश यादव, रवि बिश्नोई. इंडियन क्रिकेट के कुछ टैलेंटेड नाम. इन्होंने टीम इंडिया के लिए ठीकठाक मैच खेले हुए हैं. कुछ मैचेज में इन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन कर टीम को जीत दिलाई है. तो कुछ में ये नाकाम भी रहे हैं. जो कि नॉर्मल है. किसी भी पेशे से जुड़े व्यक्ति को ये बात पता है कि वो हर रोज अपने बेस्ट पर नहीं रह सकता.

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लेकिन अभी तो बात बेस्ट या वर्स्ट की है ही नहीं. बात कुछ और है. और अब इस बात पर बात शुरू कर देते हैं.

# मामला क्या है?

इंडियन क्रिकेट टीम. दुनिया की सबसे व्यस्त रहने वाली टीम्स में से एक. इंडियन टीम अभी T20 वर्ल्ड कप खेल रही है. इसके बाद हम न्यूज़ीलैंड और बांग्लादेश का दौरा करेंगे. और बीती शाम, यानी 31 अक्टूबर दिन सोमवार को इस टूर के लिए इंडियन टीम का सेलेक्शन हुआ. इस टीम के सामने आते ही इंस्टाग्राम पर अलग हलचल मच गई.

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ऊपर लिखे नामों द्वारा लगाई गई इंस्टाग्राम स्टोरीज वायरल हो गईं. लोगों ने इंस्टा स्टोरीज के स्क्रीनशॉट लेकर ट्विटर पर ट्रेंड बना दिया. पूरी शाम इन प्लेयर्स पर चर्चा हुई. और इस चर्चा में एक सवाल लगातार पूछा गया- ये चल क्या रहा है? थोड़ा आगे बढ़कर अब यही देखते हैं कि, आखिर चल क्या रहा है.

# चल क्या रहा है?

चेतन शर्मा. 1987 वर्ल्ड कप में हैटट्रिक मारने वाले हीरो. अपने जमाने में शर्मा जी अच्छे ऑलराउंडर्स में से एक माने जाते थे. ऑलराउंडर मतलब वो खिलाड़ी जो असल में थ्री-डी यानी तीन डायमेंशन वाला हो. लेकिन हम लोग बोलिंग और बैटिंग, दोनों करने वाले लोगों को ऑलराउंडर मान लेते हैं. तो चेतन जी ऑलराउंडर थे. वह रिटायरमेंट के बाद फरीदाबाद से लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं.

अभी वह ऑल इंडिया सेलेक्शन कमिटी, यानी सीनियर इंडियन मेंस क्रिकेट टीम चुनने वाली कमिटी के हेड हैं. उनकी सरपरस्ती में ही साल 2020 से भारतीय क्रिकेट टीम चुनी जा रही है. और इस कमिटी की कंसिस्टेंसी ऐसी है कि तब से अब तक. ऐसा कोई सेलेक्शन नहीं गया जिस पर विवाद ना हुआ हो. इस बार भी हो रहा है.

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# विवाद क्या है?

विवाद ये है कि डोमेस्टिक क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी कुछ प्लेयर्स को नेशनल टीम में मौके नहीं मिल रहे. ऐसे प्लेयर्स में पृथ्वी शॉ, सरफ़राज़ खान और नीतीश राणा जैसे नाम आते हैं. तो कई प्लेयर ऐसे भी हैं, जिन्हें टीम इंडिया के साथ रखा गया, खेलने के मौके कम मिले या नहीं मिले और फिर उन्हें बाहर कर दिया गया. ऐसे लोगों में राहुल त्रिपाठी और रवि बिश्नोई जैसों का नाम लिया जा सकता है.

इस बार के सेलेक्शन पर ज्यादा विवाद इसलिए है क्योंकि टीम आते ही तमाम प्लेयर्स ने इस पर खुलकर रिएक्ट किया. और भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में, अपने से अधिक ताकतवर के खिलाफ यूं खुलकर बोलना सिर्फ विपक्ष के लिए आरक्षित है. वो भी इसलिए क्योंकि, कभी वो भी ताकतवर थे. हां, तो यूं खुलकर रिएक्शन आया तो चर्चा हुई. होनी भी थी. क्योंकि स्वस्थ लोकतंत्र में चर्चाओं का बड़ा महत्व है. अब आगे बढ़ते हैं.

# विवाद क्यों है?

जाहिर है कि कुछ ना मिलने पर रिएक्ट वही लोग करते हैं जिन्हें उस चीज के मिलने की उम्मीद होती है. वैसे उम्मीद तो सभी को रखनी चाहिए, क्योंकि उम्मीद पर दुनिया कायम है. लेकिन इंडियन क्रिकेट टीम में जगह पाने की उम्मीद तो सिर्फ काबिल लोग ही रखते हैं. और ये लोग कितने काबिल हैं, इस बात को स्टैट्स से बेहतर कौन बता सकता है.

तो चलिए अब शुरू में लिए गए नामों के स्टैट्स देख लेते हैं. शुरुआत करेंगे पृथ्वी शॉ से. शॉ, जिन्होंने आखिरी बार डेढ़ साल पहले भारतीय टीम के लिए कोई मैच खेला था. जुलाई 2021 के बाद के उनके आंकड़े देखें तो शॉ ने साल 2022 में क्रिकेट के हर फॉर्मेट में खूब रन बनाए हैं.

लिस्ट ए, IPL, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी हो या फिर फर्स्ट क्लास. शॉ ने हर फॉर्मेट में मनचाहे अंदाज में रन जोड़े हैं. लिस्ट ए में 130 से ज्यादा और T20 मैं 150 से बहुत ज्यादा की स्ट्राइक रेट से खेल रहे हैं. और फिर आप जब रोहित-राहुल द्वारा मिल रही शुरुआत को देखते हैं, तो सोचते हैं कि शॉ आखिर बाहर क्यों हैं? चलिए, सोचते रहिए. हम बढ़ते हैं नीतीश राणा की ओर.

राणा. जो इस साल सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में अलग ही खेल रहे हैं. राणा ने इस साल SMAT की सात पारियों में 51 से ज्यादा की ऐवरेज और 143 से ज्यादा की स्ट्राइक रेट से रन कूटे हैं. साथ ही उनके नाम ग्यारह विकेट भी हैं.

बात उमेश की करें, तो उन्होंने हाल ही में मोहम्मद शमी के कोविड रिप्लेसमेंट के रूप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ T20I सीरीज़ खेली थी. तीन साल बाद भारत के T20I सेटअप में उनके लौटने पर काफी चर्चा भी हुई थी. और अब उन्हें एकाएक इस सेटअप से बाहर कर दिया गया.

रवि बिश्नोई का केस तो और यूनीक है. वह बीते कुछ वक्त से लगातार इंडियन T20I सेटअप का हिस्सा हैं. उन्हें मौजूदा वर्ल्ड कप में भी इंडियन टीम के स्टैंडबाई प्लेयर्स में रखा गया है. और अब एकाएक उन्हें टीम से ही बाहर कर दिया गया. यानी तीसरे-चौथे गियर में चल रही गाड़ी को एकाएक रिवर्स गियर लगा दिया गया.

# समाधान क्या?

कम्यूनिकेशन. हिंदी में संचार. तीन अक्षरों का शब्द है. और विद्वान इस शब्द की उपयोगिता से भी वाक़िफ हैं. अगर हमारी सेलेक्शन कमिटी इस शब्द अथवा कला का ठीक प्रयोग कर लेती, तो ऐसे हालात नहीं होते. तरीके पर तो कई तरह की बहस हो सकती है, लेकिन एक चीज तो साफ है कि संचार बेहतर होना चाहिए था. अगर संचार सही होता तो चीजें यूं सतह पर नहीं बिखरी होतीं.

अब जाते-जाते एक चीज और बोलकर निकलेंगे. क्या होता कि ये घटनाएं, यानी यूथों का आउटरेज पिछले कोच-कप्तान के रहते हुआ होता तो?

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