The Lallantop

एक कविता रोज: उसकी कत्थई आंखों में हैं

'चाक़ू-वाक़ू, छुरियां-वुरियां, ख़ंजर-वंजर सब'

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
आज हम आपको पढ़ा रहे हैं राहत इंदौरी कि सबसे ज्यादा पढ़ी, सुनी और रटी गई गजल. क्योंकि कभी-कभी इश्क कर लेना चाहिए.
  उसकी कत्थई आंखों में हैं जंतर-मंतर सब चाक़ू-वाक़ू, छुरियां-वुरियां, ख़ंजर-वंजर सब जिस दिन से तुम रूठीं मुझ से रूठे-रूठे हैं चादर-वादर, तकिया-वकिया, बिस्तर-विस्तर सब मुझसे बिछड़ कर वह भी कहां अब पहले जैसी है फीके पड़ गए कपड़े-वपड़े, ज़ेवर-वेवर सब आखिर मैं किस दिन डूबूंगा फ़िक्रें करते हैं कश्ती-वश्ती, दरिया-वरिया, लंगर-वंगर सब https://www.youtube.com/watch?v=l4QkMp_7fS4 ***

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement