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रॉनी सॉमेक की कविताएं: रेगिस्तान के जबड़ों में दूध के दांत-सी भेड़ें

आज पढ़िए इस इजरायली कवि की कविताएं जिनका अनुवाद सुशोभित सक्तावत ने किया है.

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फोटो - thelallantop
Sushobhitइन कविताओं का अनुवाद सुशोभित सक्तावत ने किया है. जिसे इन्होंने फेसबुक पर लगाया था. सुशोभित कविता, संगीत और सिनेमा में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. इनके लिखे आर्टिकल हम आपसे शेयर करते रहते हैं. आपके पास भी कायदे का कंटेंट हो तो हमें lallantopmail@gmail.com पर भेज सकते हैं. ठीक लगा तो हम छापेंगे.
  "द अमेरिकन पोएट्री रिव्यून" के पन्नें उलटते हुए इज़रायली कवि रॉनी सॉमेक की कविताओं ने सहसा ध्यान खींचा. उसमें ग्राम जीवन और नगर सभ्य्ता के बीच का अजब तनाव था. पुरातनता और आधुनिकता का टकराव भी, जो आपको मध्यभ-पूर्व के तक़रीबन हर कवि-कथाकार में मिलेगा. तिस पर एक तीखा भावबोध और सजीव बिम्बों की लड़ियां. बग़दाद में जन्मे रॉनी सॉमेक हिब्रू में कविताएं लिखते हैं. वे प्रतिष्ठित येहूदा अमीख़ाई पुरस्कारर से सम्मालनित हो चुके हैं और जैज़ संगीतकार एलियट शार्प के साथ भी उनकी रिकॉर्डिंग्सब जारी हुई हैं. "द अमेरिकन पोएट्री रिव्यूच" में प्रकाशित उनकी कविताओं में से कुछ का अनुवाद करने से मैं ख़ुद को रोक नहीं पाया. -सुशोभित सक्तावत
 

1. अराद की ओर

अराद को जातीं सफ़ेद भेड़ें रेगिस्तान के जबड़ों में दूध के दांत की तरह हैं जारी है जंग भेड़ों के बीच लुक-छिपकर रहने वाला भेड़िया अभी नहीं जन्मा़.
 

2. मृत सागर

शायद वह रेगिस्तासन के मृत्यु लेख की घुमावदार लिपि है उसके ऊपर धप्प धप्पन सा चलता है क्लांत आकाश संतरा उगाने वाले के किसान के जूते पहने. औ' भारीपन इतना कि मानो शाम की हवा भी बहती हो किसी ट्रम्पेीट में से होकर.
 

3. आग रहती है लाल रंग में

दिसंबर का आखिर. और सम्राट सॉउल एवेन्यू का हरापन अपने आपमें नक़ल है पत्तियों की और आग ठहरी रहती है लाल रंग में और पीला पीला है. आज की रात औचक बारिश के अधबीच वह बतियाती है मार्टिन बूबर के बाबत. कारों की हेडलाइट और ट्रैफिक सिग्नतल्स से फूटती यह कैसी रोशनी, जो अब तक छुपी थी! और मेरी देह में स्थगित हैं उसके शब्द सितारों की तरह, जिनकी छांह में सिहरती है उसकी याद जैसे लहराता हंसिया.
 

4. कविता, जो चेख़ोव की पंक्तियों से शुरू होती है

पहले अंक में नमूदार होने वाली पिस्तौल तीसरे में दाग़ी ही जानी चाहिए. पिस्तौल की नाल थूकेगी जैकेटों के बक्कल, लोहे की जंजीर और ऊंची सैंडिल पहनने वाली लड़की की क़दमताल जो छील देगी येहूदा हेल्वीच सड़क को अनेक छोटे-छोटे टुकड़ों में. इस दौरान वह अपने बालों को लाल रंगती है जैसे कोई अरबी चरवाहा रंगता हो अपनी भेड़ें कौन जाने, किसी चरवाहे की बांसुरी ही हो उसके सपनों का सीमांत. ***

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