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एक कविता रोज: फ़र्ज़ करो

आज पढ़िए इब्ने इंशा का ये गीत.

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फोटो - thelallantop
आज पढ़िए इब्ने इंशा का ये गीत और सुनिए दिव्य प्रकाश दुबे को इसे पढ़ते हुए.
 

फ़र्ज़ करो

https://www.youtube.com/watch?v=w0aUToPhBEs&feature=youtu.be फ़र्ज़ करो हम अहले वफ़ा हों, फ़र्ज़ करो दीवाने हों फ़र्ज़ करो ये दोनों बातें झूठी हों अफ़साने हों फ़र्ज़ करो ये जी की बिपता, जी से जोड़ सुनाई हो फ़र्ज़ करो अभी और हो इतनी, आधी हमने छुपाई हो फ़र्ज़ करो तुम्हें ख़ुश करने के ढूंढे हमने बहाने हों फ़र्ज़ करो ये नैन तुम्हारे सचमुच के मयख़ाने हों फ़र्ज़ करो ये रोग हो झूठा, झूठी पीत हमारी हो फ़र्ज़ करो इस पीत के रोग में सांस भी हम पर भारी हो फ़र्ज़ करो ये जोग बिजोग का हमने ढोंग रचाया हो फ़र्ज़ करो बस यही हक़ीक़त बाक़ी सब कुछ माया हो ***

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