उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान आखिरी दौर में है. अप्रैल 2026 के मध्य तक फाइनल वोटर लिस्ट आने वाली है. लेकिन शामली जिले का एक गांव इस वक्त चिंता में है. लोग फाइनल लिस्ट का इंतजार कर रहे हैं. उन्हें डर है कि कहीं उनका नाम लिस्ट से हटा न दिया जाए. गांव वालों का आरोप है कि ‘वेद पाल’ नाम के एक शख्स ने मुस्लिम वोटरों का नाम हटाने के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास फॉर्म जमा किए.
यूपी के इस गांव में 544 मुस्लिम वोटरों के नाम काटने की थी तैयारी, एक नौजवान ने साजिश पकड़ ली
Shamli Loharipur SIR News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक गांव इस वक्त चिंता में है. गांव वालों का आरोप है कि ‘वेद पाल’ नाम के एक शख्स ने मुस्लिम वोटरों का नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए BLO के पास फॉर्म जमा किए. हैरानी की बात यह थी कि ये सभी ‘फॉर्म 7’ थे, जो वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होते हैं. मामले पर Shamli के DM का बयान भी आया है.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शामली जिले के लोहारिपुर गांव में करीब 1,100 वोटर हैं. लेकिन 14 फरवरी को BLO मुकेश के पास अचानक 544 लोगों के नाम हटाने के लिए फॉर्म जमा मिले. ये सभी मुस्लिम थे. हैरानी की बात यह थी कि ये सभी ‘फॉर्म 7’ थे, जो वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होते हैं, और सभी पर एक ही शख्स ‘वेद पाल’ का नाम लिखा था.
बताते चलें कि SIR के लिए ‘फॉर्म 7’ का इस्तेमाल वोटर लिस्ट से किसी मौजूदा नाम को हटाने के लिए किया जाता है. पेच यह है कि कोई भी व्यक्ति इस फॉर्म को भर सकता है. विपक्ष पहले भी इस फॉर्म के ‘बड़े पैमाने पर दुरुपयोग’ का आरोप लगा चुका है. कांग्रेस का आरोप है कि फॉर्म-7 के पहले से ही प्रिंटेड आवेदन बड़ी संख्या में तैयार कर BLO को सौंपे जा रहे हैं, ताकि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों और वरिष्ठ नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा सकें.
अब लोहारिपुर गांव के लोगों ने भी कुछ ऐसे ही आरोप लगाए हैं. गांव वालों का कहना है कि जिन लोगों के नाम हटाने की बात कही गई, वे सभी यहीं रहते हैं. फॉर्म में यह वजह दी गई थी कि ये लोग गांव छोड़कर जा चुके हैं, जिसे लोगों ने पूरी तरह गलत बताया. जब एक स्थानीय युवक ने ये फॉर्म देखे, तो उसे शक हुआ और उसने दूसरों को बताया. इसके बाद गांव में पंचायत हुई और लोगों ने प्रशासन से शिकायत की. कुछ लोगों ने फॉर्म की कॉपी भी रख ली, ताकि सबूत रहे.
इन 544 लोगों की लिस्ट में नुसरत (35) भी थीं, जो 2016 से 2021 के बीच लोहारिपुर गांव की प्रधान थीं. वे कहती हैं कि जिस नौजवान ने सबसे पहले इन फॉर्मों को देखा था, वह ग्रेजुएट है, इसलिए वह समझ गया कि ये फॉर्म किस बारे में हैं. उन्होंने कहा,
“अगर उसने ऐसा न किया होता, तो शायद हमारे नाम लिस्ट से हटा दिए गए होते. प्रशासन ने इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है.”
मामले ने तूल पकड़ा तो कांधला पुलिस स्टेशन से पुलिस आ गई. इसके बाद गांव वाले शामली के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) अरविंद कुमार चौहान से मिले, जिन्होंने इस मामले की जांच के आदेश दिए. द इंडियन एक्सप्रेस ने DM चौहान से मुलाकात की. उन्होंने कहा,
"इस मामले में कोई दम नहीं है. हमने जांच करवाई और हमें कुछ भी नहीं मिला."
जब उनसे पूछा गया कि क्या वेद पाल से पूछताछ की गई थी और उन 544 फॉर्मों का सोर्स क्या था. इस पर DM ने कहा, “नहीं, हम उन्हें (पाल को) ढूंढ नहीं पाए. वे सभी फॉर्म नकली थे.” कांधला पुलिस स्टेशन के SHO सतीश कुमार ने भी यही बात कही.
हालांकि, गांव वाले इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं. उनका सवाल है कि जब एक ही नाम से इतने फॉर्म भरे गए, तो उस व्यक्ति से पूछताछ क्यों नहीं हुई. साथ ही, एक सरकारी कर्मचारी (BLO) के पास ये फॉर्म कैसे पहुंचे, इसका भी जवाब नहीं मिला.
जब द इंडियन एक्सप्रेस ने फोन पर वेद पाल से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा, "मैं इस मामले के बारे में कोई बात नहीं करना चाहता." वहीं, BLO मुकेश से जब फॉर्म 7 को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने यह कहकर टाल दिया, “मेरे पास बहुत सारा काम पेंडिंग पड़ा है.”
अब गांव के लोग अप्रैल में आने वाली फाइनल वोटर लिस्ट का इंतजार कर रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि उनके नाम सुरक्षित रहेंगे, लेकिन अंदर ही अंदर डर भी बना हुआ है कि कहीं कोई गड़बड़ी न हो जाए.
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