The Lallantop

एक कविता रोज: तू मुझे इतने प्यार से मत देख

'तेरी पलकों के नर्म साये में, धूप भी चांदनी सी लगती है'

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
''तुम ही तनहा मेरे ग़मख़ाने में आ सकती हो.'' यह न्योता भी है और सलाह भी.  बार-बार पढ़े जाने पर यह पंक्ति आपके भीतर कुछ बोती है. आप वो चेहरा खोजने लगते हैं, जिसको इस तरह संबोधित कर सकें. इसे बलरामपुर के शायर अली सरदार जाफरी ने लिखा है. आज पढ़िए, उनकी दो छोटी नज़्में. साथ ही सुनिए, अली सरदार जाफरी को कुलदीप सरदार की आवाज़ में.

मेरे दरवाजे से

मेरे दरवाज़े से अब चांद को रुख़सत कर दो साथ आया है तुम्हारे जो तुम्हारे घर से अपने माथे से हटा दो ये चमकता हुआ ताज फेंक दो जिस्म से किरणों का सुनहरी ज़ेवर तुम ही तन्हा मेरे ग़म-खाने में आ सकती हो एक मुद्दत से तुम्हारे ही लिए रखा है मेरे जलते हुए सीने का दहकता हुआ चांद

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

***

https://www.youtube.com/watch?v=mgJ_a4YnVo8&feature=youtu.be

तू मुझे इतने प्यार से मत देख

तू मुझे इतने प्यार से मत देख तेरी पलकों के नर्म साये में धूप भी चांदनी सी लगती है और मुझे कितनी दूर जाना है रेत है गर्म, पांव के छाले यूँ दमकते हैं जैसे अंगारे प्यार की ये नज़र रहे, न रहे कौन दश्त-ए-वफ़ा में जाता है तेरे दिल को ख़बर रहे न रहे तू मुझे इतने प्यार से मत देख

Advertisement

***

https://www.youtube.com/watch?v=8m7dGCRKB5s

Advertisement
Advertisement