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क्या आपने अब तक का बेस्ट वनडे क्रिकेट मैच देखा है?

क्रिकेट वर्ल्ड कप 1999. ऑस्ट्रेलिया वर्सेज़ साउथ अफ्रीका. सेमी-फाइनल मैच.

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फोटो - thelallantop
साल 1999. साउथ अफ़्रीका. जून बीत जुलाई आ चुका था. साउथ अफ़्रीका घोड़े की रेसों के लिए मशहूर है. और डर्बन में इन रेसों का अड्डा होता है. डर्बन जुलाई साउथ अफ़्रीका की हर साल होने वाली सबसे मशहूर रेस है. शॉन पॉलक इसी डर्बन जुलाई में पहुंचे थे. रेस देखने. एक आदमी उनके पास आता है. कंधे के ऊपर हाथ रख कान में धीरे से पूछता है, "आप किस घोड़े पर दांव लगा रहे हैं?" शॉन पॉलक घोड़ों परदांव नहीं लगाते थे. उनकी आदत में ये शामिल नहीं था. उन्हें ज़्यादा कुछ मालूम भी नहीं था. लेकिन चूंकि ये रेस देश की परम्परा में शामिल थी इसलिए वो सोच में पड़ गए. तमाम ऑप्शन्स नज़र आ रहे थे. लेकिन इससे पहले कि वो कुछ कह पाते उस आदमी ने दोबारा उनके कान में कहा "कुछ भी करना, 10 नम्बर के घोड़े पर पैसे मत लगान. 10 नम्बर वाले दौड़ नहीं पाते." शॉन पॉलक को मालूम हो चुका था. वहां उन्हें उस बात की याद दिलाई जा रही थी जिसे वो पूरी तरह से भूलना चाहते थे. आध महीने पहले ही साउथ अफ़्रीका वर्ल्ड कप से बाहर हुई थी. 17 जून. 1999. एजबैस्टन. डेमियन फ़्लेमिंग बॉलिंग कर रहे थे. लांस क्लूज़नर बैटिंग पर. आखिरी ओवर. ऑस्ट्रेलिया की प्लानिंग थी, क्लूज़नर को गेंद फेंकनी है तो बस यॉर्कर. ब्लॉक होल नहीं तो ऑफ स्टम्प पर. न आगे न पीछे. एक ही जगह. 'रन ही नहीं बनाने देंगे' वाली सोच. पहली गेंद, फुल लेंथ. ऑफ स्टम्प से मुश्किल से 20 सेंटीमीटर बाहर. क्लूज़नर लेग साइड के प्लेयर थे. उस दिन कवर्स में गेंद मार दी. लगभग यॉर्कर लेंथ की गेंद. चार रन! जीत के लिए अब बस पांच और रन चाहिए थे. दूसरी गेंद पर वाइड लॉन्ग ऑफ़ के मुंह के सामने से चार रन. मार्क वॉ इससे पहले सोच पाते कि गेंद पकड़ें, गेंद बाउंड्री तक पहुंच चुकी थी. साउथ अफ़्रीका बस सेमी फाइनल का पत्थर पार करने ही वाला था. जीत को बस एक रन. चार गेंदें बची हुई थीं. तीसरी गेंद, डाउन द विकेट, मिड ऑन पर मारी. डैरेन लेहमेन के पास गेंद पहुंची. लेहमेन जितनी जल्दी आ सकते थे, गेंद पर आये, दूसरे एंड पर खड़े एलेन डोनाल्ड बैक-अप में कुछ ज़्यादा ही आगे बढ़ गए थे. लेहमेन ने अगर गेंद सीधे स्टम्प पे मारी होती तो कहानी पैक थी.

South Africa vs Australia 1999

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चौथी गेंद, ऑफ स्टम्प के बाहर. इस ओवर की सबसे ज़्यादा फुल लेंथ गेंद. क्लूज़नर ने गेंद मारी, डाउन द विकेट गयी. गेंद परफेक्ट यॉर्कर, जिसकी वजह से गेंद मारते वक़्त जोर नहीं लग पाया. बावजूद इसके, क्लूज़नर दौड़ पड़े. डोनाल्ड अपनी ही जगह पर खड़े थे. इस गेंद के बाद दो गेंदें और थीं और रन एक ही बनाना था. लिहाज़ा रुका जा सकता था. लेकिन क्लूज़नर कुछ और ही सोच रहे थे. गेंद बहुत ज़्यादा दूर नहीं गयी थी. मार्क वॉ ने गेंद पकड़ी और स्टम्प पर मारी. मगर मिस कर गए. इस वक़्त तक क्लूज़नर दौड़ कर नॉन-स्ट्राइकिंग एंड पर पहुंच चुके थे. डोनाल्ड भी वहीँ खड़े थे. वो दौड़े ही नहीं. बस गेंद देख रहे थे. South Africa vs Australia 1999 वॉ की फेंकी गेंद, फ़्लेमिंग के हाथ में पहुंची. उन्होंने तुरंत ही गेंद को गिलक्रिस्ट की ओर फेंक दिया. अंडरआर्म. गेंद लुढ़कते हुए गिलक्रिस्ट के पास पहुंची लेकिन डोनाल्ड अभी भी आधी पिच में ही खड़े थे. गिलक्रिस्ट ने वो काम किया जो वो सालों से करते आ रहे थे. गिल्लियां बिखेर दीं. क्लूज़नर दौड़ते ही रहे. वो रुके नहीं. सीधे मैदान के बाहर चले गए. पूरी ऑस्ट्रेलिया की टीम मैदान के बीचों बीच एक दूजे पर चढ़ी हुई थी. वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे शानदार जश्न मनाया जा रहा था. वन-डे क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा मैच खतम हो चुका था. मैच टाई हुआ. अफ़्रीका हार गया. कैसे/ क्यूंकि सुपर सिक्स खतम होने पर ऑस्ट्रेलिया का रन रेट ज़्यादा था. यहां से साउथ-अफ्रीका पर चोकर्स का टैग लगा. क्रिकेट पर जान छिड़कने वालों की मेमोरी में एक और यादगार मैच शामिल हुआ. स्टैट्स बढ़े. साउथ अफ़्रीका बाहर हुआ, ऑस्ट्रेलिया फाइनल में पाकिस्तान से भिड़ने वाली थी. और शॉन पॉलक ने सीखा -

'दस नम्बर के घोड़ों पर दांव नहीं लगाना चाहिए.' https://www.youtube.com/watch?v=f7BNvHI-7BE

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