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Artemis II के एस्ट्रोनॉट चांद तक जाएंगे लेकिन उतरेंगे नहीं, फिर काम क्या करेंगे?

NASA ने 2 अप्रैल को Artemis II मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया. आर्टेमिस II मिशन के रॉकेट ने फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरी. इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री भेजे गए हैं.

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आर्टेमिस II चांद के आसपास चक्कर लगाएगा. (NASA)

नासा ने 50 साल से भी ज्यादा समय बाद चंद्रमा को लेकर कोई मानव मिशन शुरू किया है. 2 अप्रैल को स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट ‘ओरियन क्रू कैप्सूल’ में 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ. फ्लोरिडा के केप कैनावेरल स्थित केनेडी स्पेस सेंटर इस ऐतिहासिक पल का गवाह बना. इस मिशन को Artemis II नाम दिया गया है. 

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10 दिन के Artemis 2 मिशन में अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर नहीं उतरेंगे, बल्कि चांद का चक्कर लगाते हुए पृथ्वी से उतनी दूर जाएंगे जहां पर आज तक कोई नहीं गया है. नासा के इस मिशन का लक्ष्य साल 2028 में Artemis IV मिशन के जरिए एक बार फिर से चांद की सतह पर उतरने का है.

इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री भेजे गए हैं. इनमें तीन अमेरिकी रीड वाइसमैन, क्रिस्टीन कोच, विक्टर ग्लोवर और कनाडाई यात्री जेरेमी हेनसन शामिल हैं. पृथ्वी के उपग्रह के चारों ओर की इनकी यात्रा आगे चलकर चांद पर उतरने और वहां एक बेस बनाने का रास्ता तैयार करेगी.

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अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, नासा के Artemis मिशन में कई सालों की मेहनत है. हजारों लोगों ने इसमें योगदान दिया है. इस योजना पर अब तक 93 अरब डॉलर (8,835 अरब रुपये) की लागत आई है. अगर नासा का ये मिशन योजना के मुताबिक चलता है तो कैप्सूल छठवें दिन (6 अप्रैल के आसपास) चंद्रमा के पास पहुंच जाएगा. अंतरिक्ष यात्रियों के साथ गया ओरियन कैप्सूल चंद्रमा के चारों ओर उड़ान भरेगा. यह चंद्रमा के सबसे नजदीकी पॉइंट तक पहुंचेगा, फिर 10 अप्रैल को इसके पृथ्वी पर वापस लौटने की उम्मीद है.

10 दिन में क्या-क्या करेगा ओरियन कैप्सूल?

# ओरियन क्रू लॉन्च होने वाले दिन, यानी पहले दिन पृथ्वी की ऊपरी कक्षा (High Orbit) में एंट्री करेगा.

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# दूसरे दिन क्रू मेंबर्स स्पेसक्राफ्ट (कैप्सूल) की पूरी तरह से जांच करेंगे. जांच पूरी हो जाने के बाद कैप्सूल का प्रोपल्शन सिस्टम ट्रांसलूनर इंजेक्शन करेगा. इससे थ्रस्ट (झटका) पैदा होगा जिससे कैप्सूल पृथ्वी के कक्ष से चांद की ओर बढ़ेगा.

# तीसरे दिन कैप्सूल पृथ्वी के कक्ष से बाहर निकलकर चांद की ओर बढ़ेगा. इस दौरान यात्री कैप्सूल की निगरानी जारी रखेंगे.

#  चौथे दिन कैप्सूल चंद्रमा के पीछे से गुजरेगा. यह ऐसा रास्ता है जिससे होकर कैप्सूल बिना किसी प्रोपल्शन के नेचुरली पृथ्वी की ओर वापस लौट सकेगा.

#  पांचवें दिन ओरियन चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश करेगा. यहां चंद्रमा का गुरुत्व बल पृथ्वी से ज्यादा मजबूत हो जाता है. इस दिन के पहले कुछ घंटों में अंतरिक्ष यात्री अपने स्पेससूट की टेस्टिंग करेंगे. वे कितनी जल्दी उन्हें पहन सकते हैं, उस पर कितना प्रेशर डाल सकते हैं और अपनी सीटों पर उन्हें कसकर बांध सकते हैं या नहीं, इसकी पूरी तरह से जांच पड़ताल कर लेंगे.

छठवें दिन क्रू (चालक दल) चांद के सबसे करीब से उड़ान भरेगा. इस दौरान कैप्सूल चंद्रमा की सतह से लगभग 4,000 से 6,000 मील (6,450 से 9,650 किलोमीटर) दूर होगा.

#  सातवें से नौंवे दिन तक ओरियन अपने लौटने के रास्ते पर बना रहेगा. इस दौरान क्रू सदस्य स्पेस साइंस से जुड़े डेटा इकट्ठा करेंगे. उनकी हेल्थ कंडीशन, नींद के पैटर्न और आपसी व्यवहार से जुड़े डेटा रिकॉर्ड होंगे. इस स्टडी को 'ARCHER' नाम दिया गया है. ये स्टडी भविष्य के मिशन में इंसानों को चांद पर बेहतर तरीके से एडॉप्ट होने में मदद करेगी.

# दसवें दिन ओरियन लगभग 40,230 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर प्रशांत महासागर में लैंड करेगा.

चांद की सतह पर उतरने की तैयारी

Artemis 2 के बाद नासा Artemis III मिशन पर काम करेगा. उसमें डॉकिंग सिस्टम की टेस्टिंग होगी. अगर सब कुछ उम्मीद के मुताबिक रहा तो साल 2028 में Artemis IV के जरिए अमेरिका एक बार फिर से इंसान को चांद पर उतारेगा. इससे पहले साल 2022 में मानवरहित Artemis 1 को चांद पर भेजा गया था. 

वीडियो: साथ आए नासा और इसरो, लॉन्च करेंगे निसार मिशन

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