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'पुराना बिल लाइए, सपोर्ट करेंगे', मोदी सरकार के विधेयक पर प्रियंका गांधी क्या-क्या बोलीं?

Priyanka Gandhi ने आरोप लगाया कि सरकार ने एक बड़े राजनीतिक मकसद के साथ इन घटनाओं को अंजाम दिया था. सत्ता में बने रहने के लिए एक पूरी साजिश रची गई थी.

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प्रियंका गांधी ने संसद की स्पीच के बाद अगले दिन प्रेस कांफ्रेंस की (PHOTO-India Today)

केरलम के वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी ने बीजेपी पर तीखा निशाना साधा है. संविधान संशोधन बिल (परिसीमन) के लोकसभा में गिरने को उन्होंने ‘लोकतंत्र की बड़ी जीत’ बताया और कहा कि इस घटना ने सरकार को बड़ा झटका दिया है. उन्हें पहली बार ऐसी हार मिली है. यही वजह है कि यह उनके लिए ‘ब्लैक डे’ है. प्रियंका ने कहा कि इस नतीजे से विपक्षी एकता की ताकत जाहिर हुई. प्रियंका गांधी ने कहा कि बिल गिरने का असर सत्ता में बैठे लोगों के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था. उन्होंने कहा,

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17 अप्रैल को जो हुआ वह डेमोक्रेसी के लिए एक बड़ी जीत थी. फेडरल स्ट्रक्चर को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ भी एक जीत है. यह उनके (बीजेपी के) लिए एक ब्लैक डे है क्योंकि उन्हें पहली बार ऐसा झटका लगा है, जिसके वे हकदार थे.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने एक बड़े राजनीतिक मकसद के साथ इन घटनाओं को अंजाम दिया था. सत्ता में बने रहने के लिए एक पूरी साजिश रची गई थी. संसद के सत्र का अचानक बुलाया जाना किसी भी तरह से एक स्थायी सरकार बनाने की योजना का ही एक हिस्सा था. प्रियंका गांधी ने कहा कि सत्ता पक्ष ने खुद को इस तरह से पेश किया कि नतीजा चाहे जो भी हो, उसका क्रेडिट उन्हें ही मिले. उन्होंने कहा, 

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उन्हें लगता था कि अगर बिल पास हो गया तो यह उनकी जीत होगी. अगर पास नहीं भी हुआ, तब भी यह उनकी ही जीत होगी. उन्हें उम्मीद थी कि वे महिलाओं के मसीहा बनकर उभरेंगे लेकिन यह इतना आसान नहीं है. यह मुद्दा सिर्फ महिलाओं के आरक्षण तक सीमित नहीं है. बल्कि यह मनमाने ढंग से काम करने की उनकी आजादी से जुड़ा है.

परिसीमन को लेकर सरकार पर हमला

प्रियंका गांधी ने कहा कि ऐसी सरकार, जिसका संस्थाओं के प्रति कोई सम्मान नहीं है, उसे विपक्ष संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने के नाम पर लोकसभा सांसदों की संख्या बदलने की इजाजत कैसे दे सकता है? प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि विपक्ष महिलाओं के लिए आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन उसने मौजूदा तरीके के पीछे की मंशा पर सवाल उठाया. यह बिल असल में महिलाओं के आरक्षण के बारे में नहीं था. यह साफ हो गया है. देश की महिलाओं को बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता. 

उन्होंने आगे कहा, 

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हमने उन्नाव और हाथरस देखा है. मणिपुर में महिलाओं के लिए किसने आवाज उठाई? सरकार का रिकॉर्ड उसके दावों से मेल नहीं खाता.

प्रियंका ने विपक्षी एकता के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि वो बहुत खुश हैं, क्योंकि जब विपक्ष एकजुट होता है तो क्या होता है ये सबने देख लिया. उन्होंने सरकार से इस कानून का पुराना वाला रूप वापस लाने की अपील की. ​​उन्होंने कहा कि अगर आप सच में महिलाओं के लिए कुछ करना चाहते हैं तो 2023 वाला बिल वापस लाइए और हम उसका समर्थन करेंगे. प्रियंका के अनुसार, 2023 वाले बिल में यह साफतौर पर कहा गया था कि महिलाओं के लिए आरक्षण मौजूदा सीटों के अंदर ही लागू किया जाएगा. 

उन्होंने फिर दोहराया कि विपक्ष मौजूदा हालात और मौजूदा सीटों में इसे लागू करने का समर्थन करने के लिए तैयार है. 

सरकार संसद में संविधान का 131वां संशोधन बिल लाई थी, जिसका मकसद महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने और 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का परिसीमन करना था. लेकिन ये बिल 17 अप्रैल को निचले सदन में जरूरी दो तिहाई बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा. यहां 298 सांसदों ने बिल के पक्ष में वोट दिया. वहीं 230 ने इसका विरोध किया.

भाजपा ने क्या कहा?

इस मुद्दे को लेकर भाजपा ने कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष पर हमला बोला. केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण बिल के पास न होने के बाद कांग्रेस की आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का रवैया उसकी मानसिकता को दिखाता है. उन्होंने इस घटना को कांग्रेस पर एक काला धब्बा बताया. रिजिजू ने कहा कि इस नतीजे को सरकार या BJP के लिए एक झटका नहीं, बल्कि पूरे देश की महिलाओं के लिए एक नुकसान के तौर पर देखा जाना चाहिए. 

उन्होंने कहा कि हम सभी इस बात से दुखी हैं कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष ने महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रस्ताव को हरा दिया. यह दुख इसलिए नहीं है कि हम सरकार या BJP का हिस्सा हैं, बल्कि इसलिए है कि महिलाओं को उनका हक नहीं मिला.

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