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‘नारी अपमान नहीं भूलेगी’, संविधान संशोधन बिल गिरने पर मोदी ने विपक्ष को खूब सुनाया

पीएम मोदी ने हाथ जोड़े और कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन को वो पास नहीं करा पाए. इसलिए सभी माताओं और बहनों से क्षमा मांगता हूं.

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नरेंद्र मोदी ने हाथ जोड़कर देश की महिलाओं से माफी मांगी. (फोटो- India Today)

संविधान संशोधन बिल के लोकसभा में गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों को जमकर कोसा है. शनिवार, 18 अप्रैल को देश के नाम अपने संशोधन में पीएम मोदी ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम जैसी विपक्षी पार्टियों को ‘स्वार्थी’ बताते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकार छीनकर ये लोग संसद में मेजें थपथपा रहे थे. पीएम मोदी ने हाथ जोड़े और कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन को वो पास नहीं करा पाए. इसलिए सभी माताओं और बहनों से वो क्षमा मांगते हैं.

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पीएम मोदी जिस बिल की बात कर रहे थे, उसे संविधान का 131वां संशोधन बिल कहा गया. इसे लोकसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को तेज करने के मकसद से लाया गया था. लेकिन शुक्रवार, 17 अप्रैल को यह सदन में पास नहीं हो सका. साल 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार की यह पहली बड़ी ‘हार’ मानी जा रही है. बीजेपी और उसके नेताओं ने इसे लेकर विपक्ष पर महिला विरोधी होने के आरोप लगाए. 

वहीं विपक्ष का कहना है कि यह बिल महिला आरक्षण के लिए लाया ही नहीं गया था. बल्कि इसका मकसद कुछ और ही था. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि इस बिल के जरिए मोदी सरकार देश के संघीय ढांचे और संविधान पर हमला करना चाहती है और मनमाने तरीके से परिसीमन करके स्थायी तौर पर सत्ता में बने रहना चाहती है.  

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क्या-क्या बोले पीएम मोदी

हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आरोप पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन संशोधन किसी से भी कुछ छीनने का नहीं था. बल्कि यह हर किसी को कुछ न कुछ देने के लिए संशोधन था. पीएम मोदी ने कहा कि ये बिल देश की 50 फीसदी यानी आधी आबादी को उसका अधिकार देने का साफ नीयत और ईमानदारी से किया गया एक पवित्र प्रयास था.

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों को बिल पास न होने पर जिम्मेदार ठहराया और कहा कि कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश की नारी शक्ति को उठाना पड़ा है. उनके लिए दलहित देशहित से बड़ा हो गया है. पीएम ने कहा, 

नारी हित का ये प्रस्ताव जब गिरा तो कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, सपा जैसी परिवारवादी पार्टियां खुशी से तालियां बजा रही थीं. महिलाओं से उनके अधिकार छीनकर यह लोग मेजें थपथपा रहे थे. उन्होंने जो किया वो केवल टेबल पर थाप नहीं थी. वो नारी के स्वाभिमान और आत्मसम्मान पर चोट थी. 

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पीएम ने कहा कि नारी सब भूल जाती है लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती. उन्होंने कहा कि संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन का जिन दलों ने विरोध किया है उनसे दो टूक कहूंगा यह लोग नारी शक्ति को फॉर ग्रांटेड ले रहे हैं. वो यह भूल रहे हैं कि 21वीं सदी की नारी देश की हर घटना पर नजर रख रही है इसलिए महिला आरक्षण विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है, इसकी उन्हें सजा जरूर मिलेगी.

पीएम मोदी ने कहा, 

मुझे व्यक्तिगत तौर पर आशा थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेगी. अपने पापों का प्रायश्चित करेगी लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने का, महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का अवसर खो दिया. 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों की पीठ पर सवार होकर खुद को जिंदा रखे है. लेकिन वो ये भी नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़े. इसलिए कांग्रेस ने इस संशोधन का विरोध करवाकर अनेक क्षेत्रीय दलों के भविष्य को अंधकार में धकेलने का राजनीतिक षड्यंत्र किया है.

पीएम ने कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण के विषय से ही नफरत करती है. उसने हमेशा से ही महिला आरक्षण को रोकने के लिए षड्यंत्र किए हैं. इस बार भी कांग्रेस और उसके साथियों ने महिला आरक्षण को रोकने के लिए एक के बाद एक नए झूठ का सहारा लिया. ऐसा करके उसने अपना असली चेहरा सामने ला दिया है. अपना मुखौटा उतार दिया है.

परिसीमन को लेकर विवाद पर पीएम ने कहा कि कांग्रेस और उसके साथी दल डीलिमिटेशन पर लगातार लगातार झूठ बोल रहे हैं. यह इस बहाने विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं. क्योंकि बांटो और राज करो की पॉलिटिक्स कांग्रेस अंग्रेजों से विरासत में सीख कर आई है. उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने यह झूठ फैलाया कि डीलिमिटेशन यानी परिसीमन से कुछ राज्यों को नुकसान होगा जबकि सरकार ने पहले दिन से साफ किया है कि न किसी राज्य की भागीदारी का अनुपात बदलेगा. न किसी का रिप्रेजेंटेशन कम होगा. बल्कि सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में ही बढ़ेंगी.

PM मोदी ने कहा कि डीएमके के पास मौका था कि वो और ज्यादा तमिल लोगों को सांसद विधायक बना सकती थी. तमिलनाडु की आवाज और मजबूत कर सकती थी. लेकिन उसने वह मौका खो दिया. टीएमसी के पास भी बंगाल के लोगों को आगे बढ़ाने का मौका था लेकिन टीएमसी ने भी यह मौका गंवा दिया. समाजवादी पार्टी के पास भी मौका था कि वो महिला विरोधी छवि के दाग को कुछ कम कर सके लेकिन सपा भी इसमें चूक गई. समाजवादी पार्टी लोहिया जी को तो पहले ही भूल चुकी है. नारी शक्ति वंदन संशोधन का विरोध करके लोहिया जी के सारे सपनों को पैरों तले रौंद दिया. 

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