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केरल के 42 विधायक शपथ ग्रहण में भूल गए 'ईश्वर' का नाम?

केरल के नए चुने गए विधायकों में 42 ऐसे MLA रहे, जिन्होंने ईश्वर के नाम पर शपथ नहीं ली. नियमों के मुताबिक, जनप्रतिनिधि चाहें, तो ईश्वर के नाम पर शपथ ले सकते हैं, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है.

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कांग्रेस विधायक वी टी बलराम ने ईश्वर के नाम का इस्तेमाल नहीं किया (PHOTO-X)

केरल के तिरुवनंतपुरम में 21 मई को जीते हुए विधायकों ने शपथ ली. लेकिन इस शपथ ग्रहण में नजारा थोड़ा अलग सा रहा. विधायकों के शपथ ग्रहण समारोह में केरल की विविधता और राजनीतिक प्रतिबद्धता देखने को मिली. जनप्रतिनिधि शपथ में ईश्वर का नाम ले सकते हैं, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है. यह पूरी तरह से निजी आस्था और मूल्यों की बात होती है. केरल के 42 विधायकों ने 'ईश्वर' के नाम पर शपथ नहीं ली. खास बात यह भी है कि विधायकों ने अलग-अलग भाषाओं में शपथ ली.

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किन विधायकों ने ली शपथ?

कुल मिला कर 42 ऐसे विधायक थे जिन्होंने 'ईश्वर के नाम' की शपथ नहीं ली. इनमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया - मार्क्सवादी (CPIM) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के सारे विधायक शामिल थे. इनके अलावा कांग्रेस विधायक वी टी बलराम और सुमेश अचुतन, रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP) के शिबु बेबी जॉन और विष्णु मोहन और रेवोलुयोंस्ट मार्क्सवादी पार्टी ऑफ इंडिया (RMP) विधायक के के रीमा ने भी 'ईश्वर के नाम' पर शपथ नहीं ली. साथ ही गोविंदन, कुन्हीकृष्णन और कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी केरल स्टेट कमेटी (CMP KSC) के विधायक ने भी यही रास्ता चुना.

भाजपा विधायकों ने अब भी ईश्वर के नाम से शपथ ली

 42 विधायकों की शपथ के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के तीन विधायकों और LDF की सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के एक विधायक ने ईश्वर के नाम पर शपथ ली. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक शपथ ग्रहण में जहां कुछ नवनिर्वाचित विधायक पैदल चलकर या साइकिल से विधानसभा पहुंचे. दूसरे विधायकों ने अलग-अलग भाषाओं में, ईश्वर के नाम पर शपथ ली. इससे शपथ ग्रहण समारोह में हर विधायक का पर्सनल टच देखने को मिला.

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चुनाव की कड़वाहट भूलकर साथ बैठे विरोधी

इस दिन राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने भी चुनाव प्रचार की कड़वाहट को भुला दिया. समारोह के बाद नेताओं ने एक-दूसरे का अभिवादन किया और मुस्कुराए, जिससे विधानसभा के अंदर भाईचारे वाला एक दुर्लभ सा माहौल बन गया. शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने हालिया विवाद पर प्रतिक्रिया भी दी. दरअसल सोशल मीडिया और कांग्रेस के अंदर ही कुछ गुटों में इस सप्ताह की शुरुआत में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते समय अपनी जाति का जिक्र करने पर उनकी आलोचना की गई थी. सतीशन ने इस पर शुरू हुए विवाद को खारिज कर दिया.

विधायक के रूप में शपथ लेते समय, सतीशन ने एक बार फिर अपना पूरा नाम वदस्सेरी दामोदरा मेनन सतीशान इस्तेमाल किया. ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने सोमवार को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते समय किया था. इस आलोचना का जवाब देते हुए, सतीशान ने कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाति वाले नाम के इस्तेमाल का बचाव किया. उन्होंने कहा कि उन्होंने शपथ लेते समय केवल अपने पिता का नाम लिया था और ऐसे अवसर पर ऐसा करने में उन्हें कुछ भी अनुचित नहीं लगा.

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