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कर्नाटक में BJP-NDA से कौन खेल गया? 11 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर कांग्रेस को जिताया

रिपोर्ट्स हैं कि कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कम से कम छह बीजेपी विधायकों और चार से आठ JD(S) विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर वोट डाला. इस घटनाक्रम ने कर्नाटक में NDA के अंदर चल रहे मतभेदों और अंदरूनी खींचतान को फिर से उजागर कर दिया है.

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विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस के पांच उम्मीदवार जीते. फोटो- PTI

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  • कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस ने सात में से पांच सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, जबकि बीजेपी को केवल दो सीटों पर सफलता मिली।
  • चुनाव में बीजेपी और JD(S) के कई विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ क्रॉस-वोटिंग की, जिससे कांग्रेस को अतिरिक्त समर्थन मिला।
  • बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने क्रॉस-वोटिंग की जांच के लिए कर्नाटक अध्यक्ष को तलब किया है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है।

देश की कई राजनीतिक पार्टियों के लिए ये समय किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के बागी विधायक-सांसदों ने अपनी-अपनी पार्टियों की लीडरशिप को बड़े संकट में डाल दिया है. उत्तर प्रदेश में बीजेपी के बड़े नेता समाजवादी पार्टी के टूटने के दावे कर रहे हैं.

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लेकिन टूटन से छूटन बीजेपी को भी नहीं मिली. कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने पार्टी को चौंका दिया. यहां BJP के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर कांग्रेस को जितवा दिया है. डीके शिवकुमार के सत्ता संभालने के बाद हुए इन चुनावों के नतीजे बीजेपी के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने सात में से पांच सीटों पर कब्जा कर लिया है. कांग्रेस की इस जीत के पीछे BJP और JD(S) का भी हाथ है. दोनों पार्टियों के कुछ विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की है. रिपोर्ट्स हैं कि कम से कम छह बीजेपी विधायकों और चार से आठ JD(S) विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर वोट डाला. इस घटनाक्रम ने कर्नाटक में NDA के अंदर चल रहे मतभेदों और अंदरूनी खींचतान को फिर से उजागर कर दिया है.

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चुनाव में क्या हुआ?

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि NDA गठबंधन के कम से कम 11 विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की. इसी वजह से कांग्रेस को पांचवीं सीट पर जीत मिली. इससे 75 सदस्यीय विधान परिषद में उसकी स्थिति और मजबूत हो गई है. विधान परिषद की सात सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस ने पांच सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी को दो सीटों पर जीत मिली.

वहीं, JD(S) के उम्मीदवार गोविंदराजू चुनाव हार गए. अंतिम सीट के लिए उनकी पार्टी को बीजेपी के समर्थन पर भरोसा था. JD(S) के पास 18 विधायक हैं, इसलिए उम्मीद थी कि गोविंदराजू को कम से कम 18 वोट मिलेंगे और बीजेपी के वोट भी उनके खाते में जुड़ेंगे. लेकिन गोविंदराजू को 14 वोट मिले. इससे पता चलता है कि JD(S) के कम से कम चार विधायकों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर वोट डाला. 

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजेपी ने भी अपने तीन विधायकों को JD(S) उम्मीदवार के समर्थन में वोट देने का निर्देश दिया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. नतीजतन, गोविंदराजू हार गए.

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जाहिर है इस घटनाक्रम से बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व नाराज़ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कर्नाटक बीजेपी प्रमुख बी.वाई. विजयेंद्र को तलब किया है. उनसे पूछा गया है कि क्रॉस-वोटिंग कैसे हुई.

विजयेंद्र ने माना है कि उनकी पार्टी और JD(S) के कुछ विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की है. उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी के जिन विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की है, उन्हें किसी भी हाल में माफ नहीं किया जाएगा. हमारे पास इस पूरे खेल के पीछे शामिल लोगों के बारे में कुछ जानकारी भी है."

विजयेंद्र ने कहा, "वोटिंग के दौरान JD(S) की ओर से छह से सात और बीजेपी की ओर से कम से कम चार से पांच क्रॉस-वोट पड़े हैं. हमें इसकी जानकारी मिली है."

विजयेंद्र ने कहा कि उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मिलने का समय मांगा है. 22 जून तक ये मुलाकात होने की उम्मीद है. उन्होंने ये भी कहा कि पार्टी लाइन से हटकर वोट देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

NDA को झटका, कांग्रेस की बढ़ी ताकत

MLC का ये चुनाव इसलिए कराया गया था क्योंकि 30 जून को सात सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है. इनमें कांग्रेस के नसीर अहमद, टिप्पन्नप्पा और बी.के. हरिप्रसाद, बीजेपी के एन. नागराज (एमटीबी), प्रताप सिम्हा नायक के. और सुनील वल्लीपुर और JD(S) के गोविंदराजू शामिल हैं.

अब चुनाव नतीजों के बाद विधान परिषद में कांग्रेस की संख्या 34 से बढ़कर 39 हो गई है. वहीं BJP के 29 सदस्य, JD(S)) के 6 और एक निर्दलीय सदस्य हैं.

224 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 134 विधायक हैं. इस आधार पर पार्टी अपने दम पर चार उम्मीदवारों को जिता सकती थी. लेकिन पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे कम से कम छह अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत थी. चुनाव नतीजों से साफ है कि क्रॉस-वोटिंग हुई है. हालांकि इसमें कितने विधायक शामिल थे, इसका सही आंकड़ा पार्टियों की आंतरिक समीक्षा के बाद ही सामने आएगा.

इस बड़ी जीत के बाद कांग्रेस जश्न मना रही है. पार्टी का कहना है कि क्रॉस-वोटिंग से साफ पता चलता है कि BJP और JD(S) के भीतर नेतृत्व की कमी है. कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा, "यह नतीजा साबित करता है कि BJP और JD(S) के पास मजबूत नेतृत्व नहीं है. यह विधायकों द्वारा अशोक, विजयेंद्र और कुमारस्वामी के नेतृत्व को खारिज किए जाने जैसा है."

वहीं, कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि इस चुनाव के नतीजे दिखाते हैं कि राज्य के कई विधायक कांग्रेस सरकार के कामकाज और उसकी नीतियों का समर्थन कर रहे हैं.

वीडियो: राजधानी: क्या शिवकुमार कर्नाटक संभाल पाएंगे?

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