आप देख रहे हैं औरतों से जुड़ा हमारा स्पेशल शो- म्याऊं. महिलाओं के लिए शादी की कानूनी उम्र को बढ़ाकर 21 करने वाले ऐतिहासिक विधेयक की जांच के लिए नियुक्त संसदीय पैनल में 31 सदस्यों में से केवल एक महिला सांसद हैं. एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले, शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी और अन्य सांसदों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि पैनल में और महिला सांसद होनी चाहिए जो महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगी. म्याऊं के इस एपिसोड में हमने चर्चा की कि पैरामेंटरी पैनल के सदस्यों को कैसे चुना जाता है और इसमें महिलाओं का प्रतिनिधित्व इतना कम क्यों है. देखें वीडियो.
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