नी रिप्लेसमेंट सर्जरी यानी घुटनों के जोड़ को बदलने वाली सर्जरी. एक उम्र के बाद कई लोग इसे करवाते हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 76 साल की उम्र में ये सर्जरी करवाई थी. लेकिन नी रिप्लेसमेंट सर्जरी को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं. क्योंकि ये धारणा बहुत आम है कि इसे एक बार करवा लिया तो आप कभी दोबारा ठीक तरह से नहीं चल पाएंगे. इसलिए डॉक्टर से जानिए कि क्या ये वाकई सच है? साथ ही जानिए घुटनों के जोड़ बदलने की ज़रूरत क्यों पड़ती है, क्या घुटनों के जोड़ बदलवाना रिस्की है और सर्जरी के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
घुटने बदलवाए तो कभी चल नहीं पाएंगे? Knee Replacement Surgery की गलतफहमियां दूर करें
नी रिप्लेसमेंट सर्जरी को लेकर एक आम धारणा ये है कि इसको करवाने के बाद मरीज ठीक से नहीं चल पाता. डॉक्टर से जानिए कि क्या ये बात सच है? इस सर्जरी की ज़रूरत क्यों पड़ती है? और सर्जरी के बाद किन बातों का ध्यान ज़रूर रखें.


(डॉ. राजेश कुमार वर्मा, कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक्स, मणिपाल हॉस्पिटल, गाज़ियाबाद)
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, जोड़ों में दिक्कत होने लगती है. जोड़ों के बीच में एक गद्दी होती है, इस कार्टिलेज कहते हैं. जब ये कार्टिलेज पूरी तरह घिस जाता है तब जोड़ों में दर्द होता है. इस वजह से रूटीन लाइफ पर असर पड़ता है. ऐसे में मरीज का डायग्नोसिस किया जाता है. मरीज का एक्सरे करवाने पर अगर ये रिपोर्ट सामने आती है कि जोड़ पूरी तरह से घिस गया है तो जोड़ बदलने का सुझाव दिया जाता है.
घुटनों के जोड़ बदलवाना रिस्की है?ये बात एकदम गलत है. सर्जरी एक जटिल प्रॉसेस है. बस एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि सर्जरी को सही से प्लान किया जाए. सही से प्लान हुई सर्जरी 98 -99 % सफ़ल होती है. 1% केसों में कुछ ऐसी समस्याएं होती हैं, जो डॉक्टर के कंट्रोल में नहीं होती हैं. जैसे इन्फेक्शन. हालांकि हमारे देश में मॉडर्न ऑपरेशन थिएटर हैं. यहां इन्फेक्शन न हो, इसके लिए सारी सावधानियां रखी जाती हैं. नी रिप्लेसमेंट दुनिया की सबसे सफ़ल सर्जरी में से एक है. करोड़ों लोगों को इसका फायदा मिला है. मरीजों ने सर्जरी के बाद एक स्वस्थ जीवन जिया है.
सबसे पहला सवाल ये पूछा जाना चाहिए कि इस सर्जरी से क्या फायदा होगा. ये सवाल भी पूछा जा सकता है कि इस सर्जरी के बाद जीवन में क्या फर्क आएगा. एक सवाल दवाइयों से जुड़ा होना चाहिए. अगर मरीज की उम्र ज़्यादा है तो शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों से मरीज पहले से परेशान हो सकता है, तो ये सवाल जरूर पूछें कि इन बीमारियों की दवाइयां और ऑपरेशन के बाद जो नई दवाइयां जुड़ेंगी, उनके बीच तालमेल कैसे बनेगा? जैसे पुरानी दवाइयां बढ़ेंगी या कम होंगी.
अगर मरीज को हार्ट की समस्या भी है तो क्या उसे हार्ट के डॉक्टर से कुछ सलाह लेनी होगी. जैसे हार्ट के मरीजों को ब्लड थिनर दिए जाते हैं, क्या उसे रोकना पड़ेगा या नहीं. तीसरा सवाल डाइट के बारे में होना चाहिए. सर्जरी के पहले और सर्जरी के बाद किन चीजों को खाना है और किन चीज़ो से परहेज करना है. जैसे क्या विटामिंस, फल या कुछ प्रोटीन की चीज़ें बढ़ानी हैं. कैलोरी इनटेक में कुछ बदलाव करना है या नहीं.
इसके साथ दिन में कितनी एक्सरसाइज करनी होगी इसके बारे में भी जानकारी जरूर लें. साथ ही ये बात भी पूछें कि किस एक्सरसाइज को करने से बचना है. चौथा सवाल इस सर्जरी से होने वाले सारे कॉम्प्लिकेशन्स से जुड़ा होना चाहिए. ऑपरेशन के समय और उसके बाद क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं, इसके बारे में जानकारी लें. इससे आप फैसला लेने में सक्षम हो पाएंगे.
सर्जरी के बाद आपको अपने जख्मों का ख्याल रखना पड़ता है. सर्जरी के एरिया को गीला नहीं करना है. दवाइयों को नियमित रूप से खाना है. सही टाइम पर टांके कटवाने हैं. फिजियोथेरेपी डॉक्टर के हिसाब से ही करनी है. डॉक्टर आपके घुटने के रेंज ऑफ़ मोशन और उनकी ताकत के हिसाब से एक्सरसाइज का पैटर्न बनाते हैं. इसलिए जल्दबाजी न करें, 6-8 महीने बाद आप नए जोड़ों का पूरा मजा ले पाएंगे.
नी रिप्लेसमेंट सर्जरी अपने आप में कोई रिस्की सर्जरी नहीं है. पर इसको करवाते हुए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद ज़रूरी है, इसलिए डॉक्टर ने जो टिप्स बताई हैं, उन्हें याद रखियेगा.














