बीती दिनों Colors TV ने ट्विटर और इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है. ये डेली सोप 'थपकी प्यार की' का एक सीन है. इसमें लीड मेल कैरेक्टर पूरब के हाथों से थपकी की मांग में सिंदूर लग जाता है. हीरो के फिसलने, सिंदूर उसके हाथ में लगने और फिर उसके हाथ से थपकी की मांग में सिंदूर लग जाने का साइंस और लॉजिक देखकर जनता लोट-पोट हुई जा रही है. पहले आप वीडियो देखिए,
"न्यूटन ने अपनी कब्र से फोन किया था. ये जानने में उनकी बड़ी दिलचस्पी है कि उनके थ्योरी ऑफ मोशन में ये एक्सेप्शन कैसे हो गया."
Screenshot (172)एक यूज़र ने लिखा,
"डियर फ्यूचर हसबेंड, अगर तुम इस तरह से गिरते हुए सिंदूर नहीं लगा सकते तो हमारी शादी कैंसिल."

एक यूज़र ने लिखा,
"हर रोज़ राइटर्स इकट्ठे बैठकर लड़की की मांग में सिंदूर भरने के नए तरीके खोजते हैं."

ये ऐसा इकलौता शो नहीं है जिसमें इस तरह से मांग भरते दिखाया गया हो. सोनी के शो 'पहरेदार पिया की' में तो इससे ज्यादा अतरंगी तरीके से लड़की की मांग में सिंदूर गिराया गया है.
सीन में होता ये है कि लड़की ड्रेसिंग टेबल के सामने तैयार हो रही है, लड़का भी वहीं खड़ा है और टेबल से कंघी उठाते वक्त सिंदूर उसकी आस्तीन में लग जाता है. बाल बनाते हुए सिंदूर सामने बैठी लड़की की मांग में गिर जाता है . 'आस्तीन का सांप' तो सुना था पर 'आस्तीन का सिंदूर' ? सीरियल बनाने वालों ऑडियंस पर कुछ तो रहम करो .
फिल्में भी कुछ कम नहीं
अगर आप समझ रहे हैं कि ये सब सिर्फ 'सास - बहू' ड्रामा वाले सीरियल्स में होता है तो ऐसा नहीं है . ऐसे बहुतेरे सीन्स आपको बड़ी-बड़ी बॉलीवुड फिल्मों में भी दिख जाएंगे. 2002 में आई करीना कपूर, रानी मुखर्जी और हृतिक रोशन की 'मुझसे दोस्ती करोगे' याद है? फिल्म के क्लाइमैक्स में अचानक हवा चलती है , थाली में रखे दीये से हृतिक की उंगलियां जलती हैं और झटके से हाथ हटाते वक्त थाली में रखा सिंदूर स्लो मोशन में रानी मुखर्जी की मांग में गिर जाता है . अमूमन ऐसे सीन्स में इसे भगवान की मर्ज़ी मानकर लोग लड़का - लड़की की शादी स्वीकार कर लेते हैं . जैसे सिंदूर नहीं पत्थर की लकीर है जो एक बार खींच गई तो उसे मिटाया नहीं जा सकता .
फिल्म 'मुझसे दोस्ती करोगी' का सीन
आखिर क्यों लिखे जाते हैं ऐसे सीन्स
ऐसे सीन्स को लिखने वाले क्रिएटिव राइटर्स ऑडियंस के सामने प्यार और शादी का एक बेतुका और घीसा - पिटा एंगल परोसते हैं जहां प्यार का मतलब शादी और शादी की गैरन्टी सिंदूर होता है . जैसे प्रॉपर्टी के कागज़ात पर दस्तखत करते ही प्रॉपर्टी आपकी हो जाती है वैसे ही लड़की के मांग में सिंदूर लग जाने से वो लड़के की हो जाती है . संविधान के मैरिज एक्ट बनाने वाले भी ऐसे सीन्स को देखकर कहते होंगे " मैं क्या करूं, जॉब छोड़ दूं फिर?"सिर्फ मांग भर जाने से शादी या प्यार ग्रांटेड हो जाते हैं क्या? 'खून भरी मांग' , 'सिंदूर' , 'मांग भरो सजना' जैसी फिल्में मार्केट में सिंदूर की कीमत बढ़ाए या न बढ़ाए हमारे मॉरल वैल्यूस में सिंदूर की कीमत इतनी बढ़ा देती हैं कि हम इसके बिना लड़का - लड़की के संबंध का कोई दूसरा रीअलिस्टिक एंगल इमैजिन ही नहीं कर पाते.










